दुर्ग में नन की गिरफ्तारी का मामला लोकसभा में गूंजा, कांग्रेस ने बताया अन्याय, बीजेपी ने लगाया धर्मांतरण का आरोप — जानिए पूरा मामला
नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के दुर्ग में दो कैथलिक नन की गिरफ्तारी का मुद्दा बुधवार को लोकसभा में गरमा गया। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने शून्यकाल के दौरान इस मामले को उठाते हुए आरोप लगाया कि दोनों नन के साथ दक्षिणपंथी संगठन के सदस्यों ने दुर्व्यवहार किया और पुलिस ने उन्हें बिना किसी ठोस कारण के हिरासत में ले लिया। उन्होंने तत्काल दोनों की रिहाई की मांग की।
वेणुगोपाल ने बताया कि 25 जुलाई को केरल निवासी वंदना और प्रीति नामक दो नन दुर्ग रेलवे स्टेशन पर किसी सेवा कार्य के लिए आई थीं, जहां एक दक्षिणपंथी संगठन के लोगों ने उन पर हमला कर दिया। उन्होंने कहा कि ये नन कैंसर पीड़ितों की सेवा और सामाजिक कार्यों में लगी हुई थीं, बावजूद इसके पुलिस ने पीड़ितों की जगह उन्हें ही गिरफ्तार कर लिया।
उन्होंने कहा,
“दोनों नन बीते पांच दिनों से जेल में हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। क्या हमारा देश ‘बनाना रिपब्लिक’ बन गया है? हमने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखा है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो केरल में स्थिति बिगड़ सकती है।”
केरल से ही कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने भी इस मुद्दे को संसद में उठाया और गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की।
भाजपा सांसद का पलटवार: धर्मांतरण और तस्करी का आरोप
वहीं, छत्तीसगढ़ के बस्तर से बीजेपी सांसद महेश कश्यप ने पलटवार करते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा कार्यों की आड़ में आदिवासी महिलाओं के साथ अन्याय होता है और उन्हें जबरन धर्मांतरण के लिए उकसाया जाता है। उन्होंने सरकार से जनजातीय महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष कानून लाने की मांग की।
क्या है मामला?
दुर्ग रेलवे स्टेशन पर दो नन समेत तीन लोगों को कथित मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) के अधिकारियों के अनुसार, इन पर नारायणपुर की तीन लड़कियों को जबरन धर्म परिवर्तन कराने और उन्हें तस्करी के माध्यम से कहीं ले जाने का आरोप है।
पुलिस ने बताया कि लड़कियों के बयान और शुरुआती जांच के आधार पर आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ धर्मांतरण निषेध अधिनियम और अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
निष्कर्ष
दुर्ग की घटना अब केवल एक स्थानीय मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक और सांप्रदायिक बहस का रूप ले चुका है। जहां कांग्रेस इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बता रही है, वहीं भाजपा आदिवासी हितों की सुरक्षा की मांग को सामने रख रही है। अब निगाहें इस पर हैं कि केंद्र और राज्य सरकारें इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती हैं।






