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**दवा नहीं धंधा: जब मुनाफे के लिए बीमारियां ज़िंदा रखी जाती हैं** ????????

आज दुनिया की कई बड़ी फार्मास्यूटिकल कंपनियों पर मुनाफाखोरी और दवा बाजार पर कब्जा जमाने के आरोप लगते रहे हैं। कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

1️⃣ महंगी दवाएं और पेटेंट का खेल

कंपनियां दवाओं पर पेटेंट लेकर उनकी कीमतें आसमान तक बढ़ा देती हैं।

असली लागत से कई गुना ज्यादा दाम वसूले जाते हैं।

2️⃣ बीमारी को “क्योर” नहीं, बल्कि “कंट्रोल” करने का बिज़नेस

कई रिसर्च रिपोर्ट्स कहती हैं कि कंपनियां दवाओं को इस तरह डिज़ाइन करती हैं कि बीमारी खत्म न होकर लंबे समय तक कंट्रोल में रहे।

इससे मरीज को सालों तक दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।

3️⃣ डॉक्टर और मेडिकल सिस्टम पर दबाव

कई फार्मा कंपनियां डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट, ट्रिप और कमीशन देती हैं ताकि वे उनकी दवाएं ही लिखें।

मरीज को सही और सस्ती दवा की बजाय महंगी दवा दी जाती है।

4️⃣ आयुर्वेद और नेचुरल ट्रीटमेंट का दबाव में आना

प्राकृतिक और घरेलू इलाज को प्रमोट नहीं किया जाता, क्योंकि इनसे कंपनियों को मुनाफा नहीं होता।

कई बार हर्बल या सस्ती मेडिसिन को “कम प्रभावी” बताकर बदनाम किया जाता है।

5️⃣ फर्जी रिसर्च और साइड इफेक्ट्स छुपाना

दवाओं के ट्रायल में कई बार साइड इफेक्ट्स छुपा दिए जाते हैं।

FDA जैसी एजेंसियों पर भी बड़े कॉर्पोरेट का दबाव माना जाता है।

*देशी, घरेलू और आयुर्वेद को, अपनाइए अपनों की जान बचाइए…

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Author: sssrknews

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