बहुत दुःख होता है ये देखकर कि हर मां-बाप अपने बच्चों के जरा से बुखार से भी चिंतित हो जातें हैं और तुरंत इलाज करवाते हैं..!!
यदि कोई गंभीर रोग हो जाए तो घर द्वार और खेत तक बेच देते हैं अपने लाडले के इलाज के लिए..????
मगर उसी मां या बाप को बुढ़ापे में कोई गंभीर बिमारी हो जाए तो लोग ये सोचकर ईलाज नहीं करवाते है कि लाखों रूपए खर्च हो जाएगा…????
और उनके ज्यादातर अपने परिचित और रिश्तेदार भी यही सलाह देते हैं कि अब उम्र हो गई है…और कितने दिन जिएंगे..????
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हकीकत भी यही है कि बुढ़ापे में आपके अपने ही फैसला करेंगे कि आपके द्वारा कमाए धन को, आप पर कितना खर्च करना है… खर्च करना भी है या नहीं..??
एक बार विचार जरूर करना कि मां-बाप ने हमें जितने लाड-दुलार से पाला था, क्या हम उनका ख्याल वैसे ही रख रहे हैं..??
ध्यान रहे… आपके बच्चे भी आपके साथ वैसा ही व्यवहार करेंगे, जैसा आप अपने मां बाप के साथ करेंगे..!!
जय हिंद ????????






