Home » ताजा खबर » **अमेरिका की धमकी पर नहीं झुके लाल बहादुर शास्त्री — “जय जवान जय किसान” के नारे से जगाई आत्मनिर्भर भारत की लौ**

**अमेरिका की धमकी पर नहीं झुके लाल बहादुर शास्त्री — “जय जवान जय किसान” के नारे से जगाई आत्मनिर्भर भारत की लौ**

1965 की जंग में अमेरिका के राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने लाल बहादुर शास्त्री को चेतावनी दी की अगर पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई नहीं रुकी तो वह भारत को भेजे जाने वाला PL-480 गेहूं रोक देंगे
उस कोई समय भारत गेहूं के उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं था और इसके विदेशी आयात पर निर्भर था। शास्त्री जी को यह बात बहुत चुभी क्योंकि वो स्वाभिमानी व्यक्ति थे।
उन्होंने देशवासियों से कहा कि हम हफ्ते में एक वक्त भोजन नहीं करेंगे उसकी वजह से अमेरिका से आने वाले गेहूं की आपूर्ति न होने पर भी कोई बाधा उत्पन्न नहीं होगी लेकिन इस अपील से पहले उन्होंने अपनी पत्नी ललिता शास्त्री से कहा कि क्या आप ऐसा कर सकती हैं कि आज शाम हमारे यहां खाना ना बने।
मैं कल देशवासियों से एक वक्त का खाना ना खाने की अपील करने जा रहा हूं। शास्त्री ने कहा कि मैं देखना चाहता हूं कि मेरे बच्चे भूखे रह सकते हैं या नहीं। जब उन्होंने देख लिया कि उनके बच्चे एक वक्त बिना खाने के रह सकते हैं तो उन्होंने देशवासियों से भी ऐसा करने के लिए कहा।
शास्त्री ने कहा अमेरिका के दबाव से बचने के लिए भारत को खेती में आत्मनिर्भर बनना होगा इसलिए उन्होंने “जय जवान जय किसान” का नारा दिया और हरित क्रांति को बढ़ावा दिया।
उन्होंने अपने भाषण में कहा,” पेट पर रस्सी बांधो, साग सब्जी ज्यादा खाओ, सप्ताह में 1 दिन एक वक्त उपवास करो, देश को अपना मान दो।”
शास्त्री जी के आह्वान पर देशवासियों का गहरा असर हुआ शहर और गांव के सभी महिलाएं, बच्चे, पुरूष, बुजुर्ग सप्ताह में एक दिन भूखे रहते और देश के लिए अपना योगदान देते किसी ने कोई शिकायत नहीं की।
लाल बहादुर शास्त्री एक ऐसे नेता थे जिनकी आवाज पर देश एकजुट हुआ और उन्होंने जो कहा पहले खुद पर अमल किया। यही उनका सच्चा स्वाभिमान और जन सेवा का उदाहरण है
ऐसे भारत मां के लाल को शत-शत नमन।

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Author: sssrknews

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