आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मणिपुर के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। यात्रा के दूसरे दिन शुक्रवार को उन्होंने इंफाल में जनजातीय नेताओं के साथ बैठक की और सामाजिक एकता को मज़बूत करने की अपील की। भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ‘‘समाज को मजबूत करने के लिए पूर्ण समर्पण के साथ काम करता है’’ और ‘‘संघ किसी के खिलाफ नहीं है।’’
उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसएस की स्थापना समाज को विभाजित करने के लिए नहीं, बल्कि उसे और अधिक समृद्ध व संगठित करने के लिए की गई थी। भागवत ने कहा कि संघ न राजनीति करता है और न ही किसी संगठन को रिमोट कंट्रोल से चलाता है; उसका कार्यक्षेत्र मित्रता, स्नेह और सामाजिक सद्भाव पर आधारित है।
‘साझा चेतना हमें जोड़ती है’
भारत की सभ्यतागत निरंतरता पर बात करते हुए भागवत ने कहा कि देश की विविधता के बावजूद लोग ‘‘साझी चेतना’’ के कारण एकजुट हैं। उन्होंने कहा, ‘‘एकता के लिए एक जैसी पहचान जरूरी नहीं होती।’’
उन्होंने आरएसएस संस्थापक डॉ. के. बी. हेडगेवार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि संघ की शुरुआत किसी बाहरी खतरे के जवाब में नहीं, बल्कि समाज के भीतर मौजूद फूट को दूर करने के उद्देश्य से हुई थी।
भागवत ने आरएसएस को ‘‘व्यक्ति–निर्माण और चरित्र–निर्माण’’ का आंदोलन बताया और लोगों से शाखाओं में जाकर संघ के कामकाज को समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता और समाज की सेवा में जुटा हर व्यक्ति, भले ही वह औपचारिक रूप से जुड़ा न हो, ‘‘अघोषित स्वयंसेवक’’ है।
‘संवाद एकता पर आधारित होना चाहिए’
जनजातीय प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मसलों पर भागवत ने कहा कि ये राष्ट्रीय चिंता के विषय हैं और इनका समाधान संविधान के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘परिवार की समस्याओं का समाधान परिवार के भीतर ही होना चाहिए। संवाद सौदेबाजी नहीं, बल्कि एकता की भावना पर आधारित होना चाहिए।’’
उन्होंने यह भी कहा कि कई क्षेत्रीय टकरावों की जड़ें औपनिवेशिक शासन की नीतियों में हैं। भागवत ने जनजातीय नेताओं से अपनी भाषाओं, लिपियों और पारंपरिक जीवनशैली पर गर्व करने की अपील की।
‘भारत एक प्राचीन और सतत सभ्यता है’
युवा नेताओं के साथ अलग बातचीत में भागवत ने कहा कि भारत कोई नया बना राष्ट्र नहीं, बल्कि एक प्राचीन और निरंतर चलने वाली सभ्यता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र–निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने और अपनी क्षमता तथा प्रतिभा का उपयोग देश के लिए करने का आह्वान किया।
भागवत ने कहा कि आरएसएस शाखाओं का उद्देश्य ऐसे जिम्मेदार, सक्षम और निस्वार्थ नागरिक तैयार करना है जो समाज और राष्ट्र के लिए योगदान दे सकें।



