साहब , मेरे नए शोरूम का उदघाटन करना है…??हाथ जोड़कर गुप्ता जी ने मंत्री जी से विनती की ।
” ठीक है , ठीक है , तुम दिन औऱ तारीख़ मेरे पीए को नोट करा दो , मैं कोशिश करूंगा “….मंत्री जी ने जबाब दिया ।
नहीं साहब , आपको आना ही होगा ,आपसे निवेदन है गुप्ता जी ने अपनी बेचारगी दिखाई ।
” ठीक है “…मंत्री जी ने अपनी आवाज़ निकाली ।
दरअसल मशहूर बिजनेस मैन गुप्ता जी का शहर में एक नया भव्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का शोरूम खुलने वाला था , जिसका उदघाटन वे मंत्री जी के कर कमलों से चाहते थे ।
तय वक़्त औऱ दिन मंत्री जी अपने लावलश्कर के साथ गुप्ता जी के नए शोरूम का उदघाटन करने के लिए प्रकट हो गए ।
ढ़ोल नगाड़ो औऱ फूल मालाओं से आवभगत के बाद मंत्री जी ने फीता काटकर भव्य शोरूम का उद्घाटन किया औऱ फ़िर दुकान के अंदर घुसकर मुआयना करने लगे ।
तरह तरह के आकर्षक औऱ उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को देखकर मंत्री जी चकित रह गए । टीवी,फ्रीज़, वाशिंग मशीन ,एसी , म्यूजिक सिस्टम आदि को देख मन ही मन उनके अंदर तृष्णा कौतूहल करने लगी ।
उनसे जब रहा नहीं गया तो उन्होंने गुप्ता जी से पूछा….”ये बड़ी वाली टीवी कितने की है गुप्ता ??
” साहब , तक़रीबन सवा लाख का “…..गुप्ता जी ने चहकते हुए कहा ।
” बहुत अच्छी है “….मंत्री जी की जुबान ने चंचलता दिखाई ।
पेशे से पक्के मझे हुए व्यवसायी गुप्ता जी को समझते ये देर न लगी कि मंत्री को टीवी भा गया है ।
कुछ देर तक अपने मन में गुणा गणित करने के बाद गुप्ता जी ने सोचा कि अगर ये टीवी वे मंत्री महोदय को उपहार स्वरूप दे देते हैं तो भविष्य में उन्हें सेलटैक्स औऱ इनकमटैक्स के झमेलों से राहत मिल जाएगी ।
ये सोचकर गुप्ता जी ने दूर की देख फुदकते हुए मंत्री जी से कहा….साहब, ये टीवी मैं आपको उपहार स्वरूप देता हूँ , आप इसे लेते जाइए ।
मन ही मन मंत्री जी के हृदय में मोतीचूर के लड्डू फूटने लगे , उनकी इच्छा जो पूरी होने के क़रीब थी ।
लेकिन उन्होंने झट अपनी भावनाओं का बेहद कठोरता से दमन करते हुए कहा….” गुप्ता , मैं मुफ़्त की कोई चीज़ नहीं लेता । पूरे इलाके में लोग मेरी ईमानदारी की कसमें खाते हैं….तुम्हें इस टीवी के बदले मुझसें इसकी वाज़िब कीमत लेनी होगी…नहीं तो रहने दो फ़िर ” ।
ये बोल मंत्री जी अब शोरूम से निकलने लगे ।
गुप्ता जी ने तुरंत मैच के आख़री गेंद पर छक्का मारने के मक़सद से कहा……”ठीक है सर ,चलिए इस टीवी के बदले आप मुझें सिर्फ पांच रुपए दे दीजिए ” ।
मंत्री महोदय ने बिना देर किए झट अपनी जेब में हाथ डाला और एक दस का नोट बाहर निकालते हुए उसे गुप्ता जी की ओर बढ़ा दिया ।
अब गुप्ता जी दस का नोट थामकर अपने एक हाथ से अपनी जेब को टटोलते हुए पांच रुपए छुट्टा ढूंढ़ने लगे ताकि मंत्री जी को बाकी रक़म लौटाई जा सके ।
लेकिन गुप्ता जी को बेहद मायूसी हुई जब उन्हें उनकी जेब में पांच रुपए छुट्टे न मिले । आनन फानन में उन्होंने एक एक करके शोरूम के तमाम सदस्यों से पांच रुपए खुदरा लेना चाहा लेकिन इत्तेफ़ाक़न उस वक़्त किसी के पास भी खुल्ले नहीं थे ।
अब मज़बूरी में गुप्ता जी ने मंत्री महोदय से विनती की……” साहब ,फ़िलहाल पांच रुपए खुल्ले तो नहीं हैं लेकिन ये टीवी आप लेते जाइए ” ।
अब मंत्री जी ने हँसते हुए गुप्ता जी के कंधों पर अपना हाथ रखा औऱ धीरे से कहा….” मायूस क्यों होते हो गुप्ता , खुल्ले नहीं हैं तो क्या हुआ , अगर उतने में ये फ्रीज़ भी आ जाए तो उसे भी साथ में पैक करा दो ” ।
गुप्ता जी ने अपना माथा पकड़ लिया क्योंकि मंत्री जी अपने साथ सवा लाख का टीवी सहित पैतालीस हज़ार का फ्रीज़ भी ले उड़े ।
उसके बाद गुप्ता जी ने शोरूम के प्रत्येक सदस्य को अपने पास बुलाया और सबको दो दो बात मारते हुए चिल्लाने लगे…..??कमीनों ,तुमलोग खुल्ले क्यों नहीं रखते , ये तो ऊपरवाले का शुक्र मनाओ कि मंत्री ने बीस का नोट नहीं थमाया नहीं तो अपने साथ एसी औऱ वाशिंग मशीन भी उठा ले जाते……..???
सीख :–
हमेशा अपनी जेब में खुल्ले पैसे रखें औऱ झंझट से दूर रहें ।????






