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धर्म से ऊपर देश: रुबिका लियाकत का बयान बना राष्ट्रीय एकता का संदेश

रुबिका लियाकत का यह भावुक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने अपनी धार्मिक पहचान के साथ राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

एक प्रमुख हिंदी न्यूज एंकर के रूप में वे अपनी साफगोई के लिए जानी जाती हैं।

यह बयान धार्मिक तनावों के दौर में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को मजबूत करने वाला प्रतीत होता है।

बयान का सार :
रुबिका ने कहा, “मुसलमान हूं, रोज़े रखती हूं, नमाज़ पढ़ती हूं, लेकिन सबसे पहले भारत की बेटी हूं।”

मुसीबत में सऊदी नहीं, बगल का हिंदू भाई ही ढाल बनेगा—यह लाइन ने लाखों को प्रभावित किया।

यह संदेश राम मंदिर, वक्फ या CAA जैसे विवादों के बीच आया, जहां एकता की जरूरत महसूस हो रही थी।

रुबिका ने जोर दिया कि विभाजन कमजोरी लाता है, एकता ही ताकत।

रुबिका का सफर :
उदयपुर, राजस्थान की रहने वाली रुबिका ने मुंबई यूनिवर्सिटी से मास मीडिया की पढ़ाई की।

2007 में लाइव इंडिया से करियर शुरू कर न्यूज 24, जी न्यूज, एबीपी न्यूज और भारत 24 होकर न्यूज18 इंडिया में सीनियर एंकर बनीं।

‘मास्टरस्ट्रोक’, ‘दहाड़’, ‘मोदी-मुल्क-मुस्लिम’ जैसे शोज से प्रसिद्धि पाई।

2012 में पत्रकार नासिर कुरैशी से शादी की, दो बच्चे हैं।

वे राष्ट्रवादी मुद्दों पर बेबाकी से बोलती हैं।

सोशल मीडिया पर प्रभाव
बयान शेयर होते ही #RubikaEkta और #HinduMuslimBhaiBhai ट्रेंड करने लगे।

फैंस ने सराहा, “रुबिका ने दिल की बात कही।”

कुछ ने तारीफ की, तो ट्रोलर्स ने धार्मिक टिप्पणियां कीं।

लेकिन बहुमत ने एकता के पैगाम को सलाम किया।

यह वीडियो यूट्यूब पर करोड़ों व्यूज बटोर चुका, जो युवाओं के बीच मैसेज फैला रहा।

एकता का महत्व
रुबिका आदिवासी-मुस्लिम पृष्ठभूमि से हैं, इसलिए उनका स्टैंड प्रेरणादायक है। वे कहती हैं, “धर्म व्यक्तिगत, राष्ट्र साझा।”

यह बयान बॉलीवुड से राजनीति तक चर्चा में रहा।

समाज को याद दिलाता है कि आंतरिक एकता ही बाहरी चुनौतियों का जवाब। कुल मिलाकर, रुबिका ने पत्रकारिता के जरिए एकता का प्रतीक बनने का उदाहरण दिया।

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Author: sssrknews

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