उत्तराखंड की श्रुति रावत पहाड़ की वो लड़की जिसने 2.5 लाख की नौकरी छोड़, सेवा को बना लिया जीवन का लक्ष्य
कहते हैं असली सफलता वो नहीं जो आपकी जेब भरे, बल्कि वो है जो किसी की ज़िंदगी बदल दे। उत्तराखंड के पौड़ी जिले की श्रुति रावत इसी सोच की जीती-जागती मिसाल हैं। फैशन डिजाइनिंग की दुनिया में 2.5 लाख रुपये महीना कमाने वाली श्रुति ने सब कुछ छोड़कर समाज सेवा का रास्ता चुना — और आज हजारों लोगों की उम्मीद बन चुकी हैं।
28 जनवरी 1995 को रिखणीखाल (पौड़ी) में जन्मी श्रुति के पिता सरकारी डॉक्टर थे। बचपन खुशहाल था, लेकिन एक सड़क हादसे में पिता के निधन ने परिवार को तोड़ दिया। इसके बाद परिवार दिल्ली आ गया। यहीं से श्रुति ने पढ़ाई पूरी की, MBA किया और फिर फैशन डिजाइनिंग में अपनी अलग पहचान बनाई।
मेहनत रंग लाई और श्रुति जल्द ही इंडस्ट्री का बड़ा नाम बन गईं। पैसा, नाम और आराम — सब कुछ था। लेकिन शादी और बच्चों के बाद समाज की सच्चाइयों ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने महसूस किया कि असली ज़रूरत वहां है, जहां आवाज़ दबा दी जाती है। उसी पल उन्होंने चमकता करियर छोड़ने का सबसे मुश्किल फैसला लिया।
जॉब छोड़ते ही श्रुति ने समाज सेवा शुरू की — खासतौर पर महिलाओं और बेटियों के लिए।
आज वे घरेलू हिंसा, उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को मुफ्त कानूनी सहायता दिला रही हैं। उनका एक ही लक्ष्य है — कोई भी महिला सिर्फ डर या पैसों की कमी के कारण न्याय से वंचित न रहे।
सेवा का दायरा यहीं नहीं रुका।
गाजियाबाद और NCR में श्रुति बेसहारा जानवरों की आवाज़ बन चुकी हैं। आवारा कुत्तों के लिए स्टेरलाइजेशन, इलाज और जागरूकता अभियान सालों से चला रही हैं ताकि हादसों और बीमारियों पर रोक लग सके।
कोरोना काल में, जब लोग घरों में बंद थे — श्रुति सड़कों पर थीं।
उन्होंने बिना किसी भेदभाव के करीब 1.5 लाख लोगों तक राशन और मदद पहुंचाई। यही वजह है कि आज भी गाजियाबाद में उनका नाम सम्मान से लिया जाता है।
आज श्रुति रावत सिर्फ ज़मीनी कार्यकर्ता नहीं, बल्कि नेशनल न्यूज चैनलों पर महिला अधिकारों और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने वाली सशक्त आवाज़ हैं। उनका मानना है —
“अगर एक महिला ठान ले, तो पूरा समाज बदल सकती है।”
श्रुति रावत की कहानी हमें सिखाती है कि
???? सच्चा सुख सेवा में है
???? और असली पहचान दूसरों के काम आने से बनती है।






