Home » ताजा खबर » दो महाराज, दो रास्ते

दो महाराज, दो रास्ते

पुरी वाले महाराज आए।
पुलिस वालों को समझ आ गया कि मामला सामान्य नहीं है।
कोई डर नहीं दिखा रहा था,
लेकिन सब संभलकर बोल रहे थे।

पुलिस ने काँपती आवाज़ में कहा—
“महाराज, आगे VIP रूट बंद है,
आम रास्ता जाम है…”

निश्चलानंद जी मुस्कराए—
“वत्स, हम ज्ञान के जाम सुलझाते हैं,
ये सड़क क्या चीज़ है?
लाओ वो पहियों वाली कुर्सी।”
व्हीलचेयर आई,
महाराज बैठे,
जाकर स्नान किया,
और चले गए…

पुलिस पीछे-पीछे ऐसे चली
जैसे संस्कारों की बारात हो।

उधर—
दूसरे महाराज का काफ़िला आया।
पीछे सेवादारों की फौज—
ऐसी कि बाहुबली की सेना भी
सेल्फी लेने रुक जाए।

पालकी ऐसी भारी
कि चार मुस्टंडो के कंधे
अपने-अपने भगवान को याद करने लगें।

प्रशासन ने हाथ जोड़कर कहा—
“महाराज, पुलिया बंद है,
ये रास्ता वापसी का है,
रिस्क मत लीजिए।”

सेवादार कॉलर ऊपर करके दहाड़े—
“अबे ओ वर्दी वाले,
नियम-कानून आम जनता के लिए होते हैं।
महाराज के लिए तो
पुलिया भी नाचते हुए रास्ता देती है।

चल हट!”
फिर क्या—
सेवादारों ने ऐसा गदर काटा
कि सनी देओल भी
हैंडपंप छोड़कर सोच में पड़ जाए।
वर्दियाँ ऐसे फटीं
जैसे दिवाली सेल से खरीदकर
सस्ते कुर्ते पहने हुए हो।

पुलिया का गेट टूटा,
कानून का धैर्य टूटा,
और प्रशासन का BP रिकॉर्ड टूटा।

जब पुलिस ने आगे बढ़ने से मना किया—
तो महाराज ने
सबसे घातक अस्त्र निकाला:
आमरण अनशन।

गर्जना हुई—
“जब तक योगी स्वयं आकर
मेरे चरण नहीं धोएंगे,
मैं अन्न का दाना नहीं छुऊँगा!”
समर्थक उछल पड़े—
“महाराज संघर्ष करो!”

समर्थक एक साथ चिल्लाए…
महाराज लाइव जा रहा है।”
डटे रहिए…

दो घंटे बीते—
महाराज की नजरें गेट पर।
तीन घंटे बीते—
नजरें मोबाइल नोटिफिकेशन पर।
मन ही मन हिसाब—
“कम से कम DM
एक गिलास जूस लेकर ही आ जाता…”

उधर पुलिस वाले
पेड़ के नीचे आराम से
अमरुद पर नमक लगाकर खा रहे थे।
एक सिपाही बोला—
“भैया, निश्चलानंद जी तो
दर्शन करके घर पहुँच
नींद भी ले चुके होंगे…

और ये महाराज
यहाँ लाइव स्ट्रीम में उपवास कर रहे हैं।”
शाम हुई,
एक मच्छर भी नहीं आया।
न कोई मनाने आया,
न कोई #अनशन_तोड़ो ट्रेंड चला।

उल्टा सोशल मीडिया पर लिखा गया—
“भाई,
पालकी में वजन ज़्यादा था
या ज़िद में?”
जब साफ दिख गया
कि अब भाव नहीं मिल रहा—
तो महाराज ने अचानक आँखें खोलीं
और गंभीर स्वर में बोले—

“मुझे आकाशवाणी हुई है…
कि अभी मेरा जीना
धर्म के लिए ज़रूरी है।”
निष्कर्ष बिल्कुल साफ है—
निश्चलानंद जी कहते हैं—
“नियम मानोगे तो राजा बनोगे,
व्हीलचेयर पर भी
महाराजा लगोगे।”

और अगर
अविमुक्तेश्वरानंद जी की तरह
वर्दी फाड़ोगे,
पुलिया तोड़ोगे,
तो आख़िर में
अनशन भी
खुद ही तोड़ना पड़ेगा।

sssrknews
Author: sssrknews

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

Leave a Comment

Share This