देश में पलटू राम के नाम से मशहूर नितीश कुमार बिहार के दस बार मुख्यमंत्री रहे..
लालू के पतन के बाद नितीश अंगद की तरह बिहार में पैर जमाकर बैठ गए..लालू अपने मुकदमो में उलझ गए.. उन्होंने मोदीं से बैर ठाना तो पलट कर नहीं देखा..
नितीश ने अवसर बुनाने में देर नहीं की और जिन मोदी को अछूत मानकर हाथ मिलाने से मना किया था बाद में नितीश के हाथ मोदी के पैरो तक चले गए..
लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात जों शायद कम लोगो को पता हो भाजपा ने नितीश की सत्ता लोलुपता के कंधे पर चढ़कर बिहार साधने की रणनीति पर बहुत पहले काम शुरू कर दिया था.. एक सोची समझी राजनीति के तहत संघ और भाजपा ने अपने एक नेता संजय झा को जे डी यू में संजय 2012 में शामिल करा दिया..
संजय झा नितीश के विश्वास पात्र बनते चले गए.. उन्होंने नीतीश को लालू से दूर करने के अलावा उन्हें मोदी के करीब लाने का भी काम किया.. संजय झा राजयसभा सदस्य हैँ और जे डी यू के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैँ.. उन्होंने नीतीश को इस कदर ग्रिप में ले रखा हैँ कि पिछले दस साल से जे डी यू के अधिकांश फैसले वें ही ले रहे हैँ..
उन्हें नीतीश का ब्रेन कहा जाने लगा.. उन्होंने नीतीश के सभी करीबी लोगो को ठिकाने लगा दिया..
आज संजय झा भाजपा का रिमोट हैँ.. भाजपा जे डी यू को निगल तो पिछले साल विधनसभा चुनाव के वक़्त ही जाती मगर विपक्ष द्वारा किये इस प्रचार से डरकर कि भाजपा नीतीश को मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी, भाजपा ने कुछ दिन इंतज़ार किया..
भाजपा का ट्रेक रिकॉर्ड हैँ वह सहयोगी पार्टियों को निगल जाती हैँ.. नया निवाला जे डी यू हैँ…
मार्गदर्शक मंडल मे नीतीश कुमार का स्वागत है!






