मित्रों …. आज जयपुर से दिल्ली लौटते हुए एक ऐसा दृश्य देखा जिसने भीतर तक हिला दिया …. राजस्थान की सीमा पार कर जैसे ही हरियाणा में घुसे और धारूहेड़ा के आसपास हाईवे पर नज़र गई …. तो लगा जैसे कोई युद्धभूमि हो …. पर यहाँ सैनिक नहीं खड़े थे …. यहाँ सर्विस लेन में कई किलोमीटर लंबी कतारों में खड़े थे हज़ारों डम्पर ट्रक …. जी हाँ …. सैंकड़ों नहीं …. हज़ारों !
हर एक ट्रक पत्थरों और गिट्टी से लबालब भरा हुआ …. ऐसे खड़े जैसे किसी गुप्त आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हों …. जैसे किसी “सिग्नल” के मिलते ही पूरा काफ़िला एनसीआर में घुस जाएगा …. और फिर रातों-रात शहरों की कंक्रीट में बदल जाएगा.
और सबसे दिलचस्प बात …. इन ट्रकों की नंबर प्लेटें ….
किसी पर कीचड़ पुती हुई ….
किसी पर ग्रीस लिपटी हुई ….
किसी की प्लेट ही आधी टूटी हुई ….
यानि पहचान मिटा दो …. और धंधा चलता रहे ….
अब सवाल उठता है ….
ये पत्थर कहाँ से आ रहे हैं ????
क्या हिमालय से तोड़ कर लाए जा रहे हैं ????
क्या शिवालिक की पहाड़ियों को चीर कर निकाले जा रहे हैं ????
या फिर हिन्द महासागर की गहराइयों से गोताखोर निकाल कर ला रहे हैं ????
नहीं मित्रों ….
ये पत्थर निकल रहे हैं उसी अरावली से ….
वही अरावली …. जिसे कुछ महीने पहले तक “माँ” कहा जा रहा था ….
वही अरावली …. जिसे बचाने के नाम पर सोशल मीडिया पर क्रांति की बाढ़ आ गई थी ….
वही अरावली …. जिसके लिए फेसबुक के रणबांकुरे भाला-त्रिशूल लेकर मरने-मारने को तैयार हो गए थे ….
याद है ना वो दिन ????
पोस्ट पर पोस्ट ….
वीडियो पर वीडियो ….
लाखों कमेंट ….
“अरावली हमारी माँ है”
“अरावली को छूने नहीं देंगे”
“प्रकृति बचाओ”
लेकिन मित्रों …. सच कहूँ तो वो सब भावनाएँ मूत्र की झाग जैसी निकलीं ….
ऊपर बहुत फूली हुई ….
लेकिन असल में बिल्कुल खोखली ….
क्योंकि धरातल पर क्या हुआ ????
कुछ भी नहीं ….
ना धरना ….
ना विरोध ….
ना आंदोलन ….
बस फेसबुक पर क्रांति …. और जमीन पर सन्नाटा ….
और अब नतीजा सामने है ….
अरावली को टुकड़ों में काटा जा रहा है ….
उसका सीना फाड़कर पत्थर निकाले जा रहे हैं ….
और उन्हीं टुकड़ों को ट्रकों में भरकर शहरों में भेजा जा रहा है ….
आपको याद होगा …. सरकार एक नियम लाने वाली थी ….
नियम यह था कि 100 फीट से ऊँची जमीन को पर्वत माना जाएगा …. और वहाँ खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होगा ….
लेकिन उस समय क्या हुआ ????
“तानाशाही” के नाम पर शोर मच गया ….
“लोकतंत्र खतरे में है” का ढोल बज गया ….
और नियम बनने से पहले ही उसे रोकने की मुहिम छेड़ दी गई ….
अब परिणाम देखिए ….
खनन माफिया ने रास्ता निकाल लिया ….
जहाँ जमीन 100 फीट से कम है …. वहाँ टेक्निकली पर्वत नहीं माना जाएगा ….
और वहाँ से पत्थर निकालना “कानूनी जुगाड़” बन जाएगा ….
यानि ….
अरावली भी कटेगी ….
और कागज़ पर सब कुछ नियम के भीतर भी रहेगा ….
तो हे अरावली के वीर बेटों ….
हे प्रकृति के स्वघोषित रक्षक ….
हे फेसबुक के सनातनी योद्धाओं ….
अब कहाँ हो ????
देखो ….
तुम्हारी अरावली माँ के शरीर के टुकड़े किए जा रहे हैं ….
उसकी हड्डियाँ ट्रकों में भरकर शहरों में भेजी जा रही हैं ….
और तुम अभी भी मोबाइल पर अंगूठा चला रहे हो ….
क्या अब भी नहीं जागोगे ????
क्या अब भी नहीं निकलोगे घर से ????
या फिर हमेशा की तरह ….
कुछ दिन और पोस्ट लिखकर ….
कुछ दिन और गालियाँ देकर ….
फिर चुप हो जाओगे ????
बोलो ….
अरावली बचानी है ….
या फिर अगली पीढ़ी को सिर्फ उसकी फोटो दिखानी है ????
बोलो भाई ….
कुछ तो बोलो ….
साभार पारुल सहगल जी और साथी






