विश्व के महाशक्तियों में शामिल किसी देश की सत्ता जब कोई सनकी मूर्ख सम्भाल रहा हो तो तबाही का कैसा मंजर होता है ये ट्रम्प को देखकर समझ सकते हैं,
इसे लगता है अमेरिका को पूरी दुनिया हज़ारों वर्षों से लूट रही है और अब इसकी बारी है हर एक देश को लूटने और बर्बाद करने की,
पहले इसने टैरिफ वार शुरू किया और जब चाइना जैसे बड़े देशों ने हड़का दिया, अमिरिकी न्यायालय ने ललकारा तो विश्वेक भूस्थिरता के नाम पर दुनिया को विश्व युद्ध की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया…
इनको ग्रीनलैंड और कनाडा भी चाहिए, मेक्सिको की खाड़ी पर कब्जा कर ही चुका है, कोलंबिया और क्यूबा पर कब्जा करने की तैयारी चल रही है और यूक्रेन को रशिया से लड़वाकर लगभग तोड़ चुका है ताकि यूक्रेन पूरी तरह अमेरिका के कर्जे में डूब जाए और ये वहां के संसाधनों, नेचुरल रिसोर्सेस पर कब्जे कर सके।
ओकिनावा जापान, कैंप हम्फ्रीज़ दक्षिण कोरिया, और रामस्टीन एयर बेस जर्मनी में अपने बड़े स्थायी सैन्य अड्डे बनाकर आस पड़ोस के देशों को थ्रेट देने की कवायद ज़ारि है,
और दिमाग देखो नार्थ कोरिया यदि गुस्सा होकर अमेरिका के मिलिट्री बेस पर अटैक करता है तो अल्टिमेटली नुकसान दक्षिण कोरिया का होगा ठीक वैसे ही जैसे ईरान के हमलों के इज़राइल और गल्फ के बाकी 9 देशों का हो रहा है, युद्ध का कर्ताधर्ता अमेरिका है पर ईरान के हमले में अमेरिका का कोई डायरेक्ट लॉस नहीं हो रहा।
दुनिया भर के देशों में अमेरिका के 750 से 900 तक सैन्य अड्डे हैं जिनमे से कुछ स्थाई और बाकी अस्थाई हैं ताकि कोई भी देश अमिरिकी हथियारों और मिसाइलों की रडार से बाहर न रहे और जब चाहे तब अपने लोकल मिलिट्री बेस की सहायता से हमले कर सके।
और बहाना देता है कि हमारे सैन्य अड्डों का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा करना, गठबंधन सहयोगियों को समर्थन देना और भू-राजनीतिक तनावों के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया देना है न कि किसी देश की सम्प्रभुता को चोंट पहुंचाना।
इनको चाहिए कि पूरा विश्व इनका टैरिफ स्वीकार करे और ये बिना टैरिफ के व्यापार करे, तेल, परमाणु ऊर्जा, हथियार, दवाई और कीमतीं धातुओं पर बस इनका एकाधिकार हो और पूरे विश्व का व्यापार बस डॉलर से चले ताकि जब मन करे डॉलर का रेट बड़ाकर दुनिया भर के देशों के टेटुए दबा सको।
अकेले अमेरिका के पास 6000 परमाणु हथियार है और दूसरे देशों पर ये सेटेलाईट से निगरानी रखता है ताकि कोई परमाणु परीक्षण न कर सके।
यदि वर्ल्ड लेवल पर कोई मिर्जापुर बनी तो ट्रम्प को अखण्डानन्द त्रिपाठी का क़िरदार मिलना चाहिए ताकि गैंगवार के साथ साथ हम एप्सटीन को भी कैरेक्टर के साथ जस्टिफाई कर सकें।
बाकी इज़राइल को बीना जी,
ईरान को मुन्ना त्रिपाठी ,
पुतिन को शरद शुक्ला,
चीन अद्दा त्यागी और शेख हसीना को गजगामिनी गुप्ता का रोल दे सकते हैं.. मोदी जी का रोल पाठक गण खुद निर्धारित कर सकते हैं।
😅😁🙈
पुष्पलता जी की वाल से साभार





