नई दिल्ली: महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार बड़ी पहल की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, सरकार मौजूदा सत्र में महिला आरक्षण कानून में संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। बताया जा रहा है कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ में बदलाव कर महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की शर्तों से अलग करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इसके लिए अन्य राजनीतिक दलों की सहमति जरूरी होगी।
गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं से बातचीत की है। सोमवार को हुई बैठक में एनसीपी, सपा, बीजेडी, शिवसेना (उद्धव गुट), वाईएसआर कांग्रेस और एआईएमआईएम के नेता शामिल हुए। वहीं, कांग्रेस और टीएमसी के साथ बैठक अभी प्रस्तावित है। इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू को पत्र लिखकर इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है, ताकि सभी दलों की राय शामिल की जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार अगले सप्ताह संसद में संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। यदि यह संशोधन पारित हो जाता है, तो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 2027 से महिला आरक्षण लागू किया जा सकता है। दोनों राज्यों में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं।
गौरतलब है कि एनडीए सरकार ने 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित कर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया था। इसके लिए संसद का विशेष सत्र भी बुलाया गया था। लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन कर इसे नया नाम दिया गया था।
वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, 33 प्रतिशत महिला आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू होना तय था, क्योंकि इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था। कोविड-19 के कारण 2021 की जनगणना नहीं हो पाई थी, जिससे देरी हुई। अब सरकार इस शर्त को हटाकर महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।



