मौजूदा पीढ़ी के लोगों को इस बात पर हैरानी हो सकती है कि शो मैन राज कपूर के साथ नज़र आ रही इस परम सुंदरी का क़त्ल हुए कोई 26 साल बीत चुके हैं। मुंबई पुलिस इस मामले में अपनी तफ़्तीश पूरी कर चुकी है। निचली अदालत मुक़दमे की सुनवाई पूरी करके दोषियों को सज़ा भी सुना चुकी है। लेकिन, मामला अब ऊपरी अदालत में है, और वहां पड़ रही हैं, तारीख़ पर तारीख़..!
राज कपूर के साथ इस पेटिंग में दिख रही सुंदरी का नाम है प्रिया राजवंश। इनके तथाकथित क़त्ल के बाद से ही इस कहानी पर फ़िल्में बनाने की चर्चाएं मुंबई में सुनाई देती रही हैं। हालांकि, इस बारे में अभिनेता जानकी दास के बेटे शानू मेहरा की कोशिशें भी अब आठ साल पुरानी हो चुकी हैं। तब बड़ी सरगर्मी थी कि कंगना रनौत या प्रियंका चोपड़ा में से कोई इस फ़िल्म में प्रिया राजवंश का किरदार कर सकता है, लेकिन किसी स्टूडियो ने बाद में इसमें दिलचस्पी दिखाई नहीं।
इसकी एक बड़ी वजह ये भी हो सकती है कि इस मामले का अंतिम फ़ैसला अब भी ऊपरी अदालत से होना बाक़ी है।
ये क़िस्सा ऐसा है कि जब पहली बार ये सामने आया तो इसने पूरी फ़िल्म इंडस्ट्री को ही नहीं बल्कि देश-दुनिया को हिलाकर रख दिया। अपने ज़माने की एक बेहद ख़ूबसूरत हसीना अपने बंगले में बेजान पाई गई। पुलिस ने जांचा परखा तो मामला मर्डर का निकला। तफ़्तीश हुई, मुक़दमा चला, ज़िरह हुई और फिर हुई उम्रक़ैद ऐसे चार लोगों को जिनमें दो पर इन मोहतरमा की देखरेख की जिम्मेदारी थी और दो थे, इनके पार्टनर के बेटे।
‘हीर रांझा’, ‘हंसते ज़ख्म’ जैसी सुपर-डुपर हिट फ़िल्मों की हीरोइन रहीं प्रिया राजवंश का करियर भले ही छोटा रहा हो, लेकिन उनकी ज़िदगी बहुत उतार-चढ़ावों से गुजरी। अंग्रेज़ों के जमाने में पैदा हुईं, 10 साल की उम्र में बंटवारा झेलना पड़ा, जिस बंदे से मोहब्बत की, पूरी ज़िदगी सिर्फ़ उसी की फ़िल्मों में काम किया। राज कुमार, बलराज साहनी, नवीन निश्चल, धर्मेंद्र, जैकी श्रॉफ जैसे सितारों की मौजूदगी को कैमरे के सामने बस अपनी एक अदा से फीक़ा कर देने वाली प्रिया राजवंश की ज़िंदगी यूं लगता है कि जैसे किसी जासूसी उपन्यास का क़िस्सा है।
प्रिया राजवंश का जन्म आज के पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के झेलम में हुआ। घर वालों ने नाम रखा वीरा सुंदर सिंह। जैसा कि उस दौर का चलन था हर डायरेक्टर अपने हीरो या हीरोइन को एक नया नाम देने को ही अपनी मठाधीशी का चमत्कार मानता था तो वीरा सुंदर सिंह बन गईं प्रिया राजवंश। नाम उनको ये दिया मशहूर निर्माता निर्देशक चेतन आनंद ने जिनका उन दिनों हिंदी फ़िल्मों में अलग ही रूतबा था। उनकी फ़िल्म ‘नीचा नगर’ आजादी से साल भर पहले ही कान फ़िल्म फेस्टिवल का सबसे बड़ा पुरस्कार यानी पाम डिओर यानी सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का ख़िताब जीत चुकी थी।
हीरोइनें उन दिनों चेतन आनंद के आगे पीछे मधुमक्खियों की तरह घूमती थी और वह फ़िदा हो गए अपनी प्रिया पर। नाम भी शायद उनको ये इसीलिए पसंद आया। प्रिया को भी सिनेमा में एक ढंग का मुक़ाम चाहिए था। अतीत तब तक उनका उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से तबाह कर चुका था। वह बचपन से कलाकार बनना चाहती थीं और जब चेतन आनंद जैसा फ़िल्मकार उन पर रीझा तो उन्हें लगा कि अब जाकर क़िस्मत उनके दरवाजे पहुंची है।
वीरा सुंदर सिंह के चेतन आनंद तक पहुंचने का किस्सा भी काफी फ़िल्मी है। वीरा के पिता सुंदर सिंह जंगलों के बड़े अफसर थे। बंटवारा हुआ तो वह किसी तरह परिवार लेकर शिमला आ बसे। नौ साल की थी वीरा, जब उसने अपने स्कूल में एक अंग्रेज़ी नाटक ‘वर्ल्ड विदाउट मेन’ में एक्टिंग का अवार्ड जीता। स्कूल से कॉलेज पहुंची और एक्टिंग के इसी शौक़ ने एक दिन उनकी मुलाक़ात करा दी मशहूर अभिनेता बलराज साहनी से।
ये क़िस्सा भार्गव म्युनिसिपल कॉलेज का है। वीरा का नाटक देखने बलराज साहनी आए हुए थे। उनकी नज़र जब इस बेहद ख़ूबसूरत और हुनरमंद अदाकारा पर पड़ी तो वह बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने वीरा को रॉयल अकैडमी ऑफ ड्रैमेटिक आर्ट यानी राडा, लंदन में दाख़िला लेने की सलाह दी। इत्तेफाक़ से प्रिया के पिता संयुक्त राष्ट्र के असाइनमेंट पर लंदन में ही थे तो वीरा की फ़िल्मी पढ़ाई भी वहीं शुरू हो गई।
वीरा इतनी ख़ूबसूरत थीं कि हिंदुस्तान से जो भी प्रोड्यूसर डायरेक्टर उन दिनों लंदन जाता तो उससे मिलने जरूर जाता। ऐसे ही एक प्रोड्यूसर रणवीर सिंह की नजर वीरा पर पड़ी और उन्होंने फ़िल्म ‘द लांग डुएल’ के लिए वीरा को साइन कर लिया। लेकिन फ़िल्म बन नहीं पाई। और, यहां कहानी में एंट्री हुई हैंडसम एंड फेमस डायरेक्टर चेतन आनंद की।
अभिनेता देव आनंद के भाई चेतन अपनी नई फ़िल्म के लिए एक नई हीरोइन की तलाश थी। जब रणवीर सिंह ने उन्हें वीरा की तस्वीर दिखाई तो वह पहली नज़र में ही अपनी फ़िल्म और अपना दिल दोनों इस नई लड़की को दे बैठे। उन्होंने वीरा को अपनी फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ के लिए साइन कर लिया।
वीरा से प्रिया बनकर इस हसीना ने अपना फ़िल्मी करियर शुरू तो कर दिया लेकिन जो भी हीरो उससे मिलता, वह उससे शादी करने के लिए उत्सुक हो जाता। लेकिन प्रिया ने अपना पूरा ध्यान अपने करियर और अभिनय पर लगाया। उन्हें अपनी पहली ही फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ में धर्मेंद्र और बलराज साहनी जैसे बड़े कलाकारों के साथ काम करने का मौक़ा मिला। यह फ़िल्म बहुत बड़ी हिट साबित हुई। इस फ़िल्म की गिनती सर्वश्रेष्ठ वॉर फ़िल्मों में की जाती है। यहां से प्रिया का करियर परवान चढ़ना शुरू हुआ।
चेतन आनंद का प्रिया के साथ बहुत गहरा रिश्ता रहा। प्रिया ने अपनी सभी फ़िल्में चेतन आनंद के निर्देशन में ही कीं। चेतन आनंद की भी तकरीबन सभी फ़िल्मों में प्रिया ने काम किया है। फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ से शुरू हुआ सिलसिला ‘हीर रांझा’, ‘हिंदुस्तान की क़सम’, ‘हंसते ज़ख्म’, ‘साहेब बहादुर’ और ‘क़ुदरत’ से होता हुआ ‘हाथों की लक़ीरें’ पर आकर ख़त्म हुआ। इसके बाद प्रिया ने अपने फ़िल्मी करियर को अलविदा कह दिया।
प्रिया राजवंश और चेतन आनंद ने कभी शादी तो नहीं की, लेकिन इस रिश्ते की वजह से चेतन आनंद अपनी पत्नी उमा आनंद से अलग हो गए थे। चेतन और प्रिया की उम्र में लगभग 20 साल का फासला था। ये दोनों साथ ही रहते थे। वर्ष 1997 में चेतन के गुज़र जाने के बाद प्रिया पूरी तरह टूट चुकी थीं।
27 मार्च 2000 को चेतन के जुहू वाले बंगले में प्रिया का शव पाया गया। मुंबई पुलिस के मुताबिक़, उनकी हत्या की गई थी। पुलिस ने उनकी हत्या के जुर्म में चेतन के बेटे केतन और विवेक आनंद को दो नौकरों माला चौधरी और अशोक चिन्नास्वामी के साथ गिरफ़्तार भी किया। प्रिया की हत्या करने की वजह चेतन की वसीयत बताई गई।
प्रिया के लिखे नोट्स और पत्रों को अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया गया। इसके बाद चारों दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई। बाद में सभी हत्याभियुक्तों को ज़मानत मिल गई और मामला फ़िर से वहीं का वहीं रह गया।



