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मंदिर के फूलों से करोड़ों का कारोबार: निर्माल्य की अनोखी सफलता कहानी

भगवान के चरणों मे चढ़ाए गए फूलों पर आधारीत करीब 70 लाख के निवेश से शुरू हुई यह पहल आज एक सफल स्टार्टअप बन चुकी है। पहले साल 30 लाख का टर्नओवर रहा, जो तीसरे साल 7 करोड़ तक पहुंच गया। अब कंपनी 15 करोड़ के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है।
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जिस फूल को हम भगवान के चरणों में चढ़ाकर श्रद्धा जताते हैं, वही फूल कुछ घंटों बाद कचरे में फेंक दिया जाता है… लेकिन क्या कभी सोचा है कि यही फूल करोड़ों का कारोबार भी बना सकते हैं?”
दिल्ली के मंडोली इलाके से शुरू हुई “निर्माल्य” की कहानी इसी सोच से जन्मी है। इसके को-फाउंडर राजीव बंसल ने उस चीज़ में अवसर देखा, जिसे लोग बेकार समझकर फेंक देते थे। 2018 में शिरडी यात्रा के दौरान उन्होंने देखा कि मंदिरों से निकलने वाले फूल सीधे कचरे में जा रहे हैं। यह बात उन्हें अंदर तक झ’कझो’र गई और यहीं से एक नए सफर की शुरुआत हुई।
2019 में राजीव ने बासी फूलों को रिसाइकिल कर अगरबत्ती, धूपबत्ती और हवन सामग्री बनाने का काम शुरू किया। शुरुआत में परिवार और दोस्तों ने उनका मजाक उड़ाया, उन्हें “कचरा वाला” तक कहा गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने आइडिया पर काम जारी रखा।
धीरे-धीरे उन्होंने दिल्ली-एनसीआर के सैकड़ों मंदिरों से फूल इकट्ठा करना शुरू किया। इन फूलों को सुखाकर मशीन से पाउडर बनाया जाता है और फिर उससे पूजा के कई प्रोडक्ट तैयार होते हैं। बाद में उनके साथ भरत बंसल और सुरभि बंसल जुड़े, जिन्होंने बिजनेस को मजबूती दी।
करीब 70 लाख के निवेश से शुरू हुई यह पहल आज एक सफल स्टार्टअप बन चुकी है। पहले साल 30 लाख का टर्नओवर रहा, जो तीसरे साल 7 करोड़ तक पहुंच गया। अब कंपनी 15 करोड़ के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है।
आज “निर्माल्य” में 80 से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं, जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं। यह कहानी सिर्फ बिजनेस की नहीं, बल्कि सोच बदलने और कचरे को अवसर में बदलने की मिसाल है।
साभार-कुसुम लोधी

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Author: sssrknews

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