पति-पत्नी का प्रेम कैसा होना चाहिए आओ जानें
प्रति हर्यासि जनित्री इव सूनुम् अथर्ववेद 12.3.23
भावार्थ : “पति-पत्नी एक-दूसरे से वैसा ही प्रेम करें,जैसा एक माता अपनी संतान से करती है।”
निस्वार्थ प्रेम : जिस प्रकार एक माता का अपनी संतान के प्रति प्रेम निस्वार्थ (Unconditional) होता है, वह बदले में कुछ पाने की इच्छा के बिना केवल संतान का कल्याण चाहती है, वैसे ही वैवाहिक जीवन में प्रेम की आधारशिला निस्वार्थ भाव होनी चाहिए।
रक्षण और पोषण : माता अपनी संतान की रक्षा और पोषण के लिए सदैव तत्पर रहती है। यह मंत्र सुझाव देता है कि पति और पत्नी को भी एक-दूसरे की शारीरिक,मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति का रक्षक और पोषक बनना चाहिए।
क्षमा और धैर्य : जैसे माता संतान की त्रुटियों को क्षमा कर उसे सही मार्ग दिखाती है, वैसे ही जीवनसाथी को एक-दूसरे की कमियों को धैर्यपूर्वक स्वीकार कर प्रेम के साथ सुधारना चाहिए।
निष्कर्ष : यह मंत्र गृहस्थ आश्रम के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करता है, जहाँ प्रेम केवल आकर्षण तक सीमित न रहकर ‘वात्सल्य’ (पवित्र ममता) जैसा गहरा और अटल हो। यह संदेश परिवार में शांति और अटूट बंधन बनाए रखने की कुंजी है।
लक्ष्मी कहाँ कहाँ रूठती है
शास्त्रों में अनेक छोटी-छोटी बातें मिलती हैं जिन पर ध्यान ना दिया जाए तो व्यक्ति कर्ज में आ जाता है। लक्ष्मी उनसे मुंह मोड़ लेती है लक्ष्मी का अभाव अर्थात धन का ना होना ही कर्ज का प्रमुख कारण है। कुछ ऐसे ही कारण है जिनके कारण लक्ष्मी हमसे रुष्ट हो जाती है।
1👉 मंगलवार को कर्ज लेने पर लक्ष्मी रुष्ट हो जाती है तथा कर्ज का निवास घर में स्थाई रूप से हो जाता है।
2👉 बुधवार को ऋण (कर्ज) देने पर लक्ष्मी अप्रसन्न होती है बार-बार ऐसा करने पर वह उस घर को त्याग देती है।
3👉 कमल पुष्प, बिल्वपत्र को लांघने अथवा पैरों से कुचलने पर लक्ष्मी रुष्ट होकर अपना निवास उस घर से बदल देती है जहां ऐसा होता है।
4👉 ईशान कोण में शौचालय एवं रसोई घर बना लेने से लक्ष्मी उस घर से मुंह मोड़ लेती है यही वह अवसर होता है जब कर्ज दबे पांव घर में प्रवेश कर लेता है कर्ज को फलने फूलने में उसके साथ ही रोग में हानि विशेष सहयोग करते हैं।
5👉 ब्रह्म स्थान में जूठन गंदगी तथा गड्ढा करने वालों को लक्ष्मी कभी माफ नहीं करती है वह अपनी कृपा दृष्टि से अति शीघ्र वंचित कर देती है।
6👉 जो निर्वस्त्र होकर स्नान करता है नदियों तालाबों के जल में मल मूत्र त्यागता है उसको लक्ष्मी अपने शत्रु कर्ज की दया पर छोड़ देती है।
7👉 जो अनावश्यक भूमि भवन की दीवारों पर लिखता है कुत्सित अन्न को खाता है उस पर भी लक्ष्मीकृपा नहीं करती है।
8👉 जो पैर से पैर रगड़ कर धोता है अतिथियों का सम्मान नहीं करता है याचकों को दुत्कारता है पशु पक्षियों को चारा चुगा नहीं डालता है। गाय पर प्रहार करता है ऐसे व्यक्ति को लक्ष्मी तुरंत छोड़ देती है।
9👉 जो संध्या समय घर प्रतिष्ठान में झाड़ू लगाता है जो प्रातः एवं संध्या काल में धूपबत्ती से ईश्वर की आराधना नहीं करता है जहां तुलसी के पौधे की उपेक्षा अनादर होता हैट उसको लक्ष्मी उसके दुर्भाग्य के हाथों में सौंप देती है।
10👉 जिस घर में परस्पर कलह रहता हो महिलाओं का अनादर होता हो माता-पिता की उपेक्षा होती हो उस व्यक्ति से लक्ष्मी अपनी दृष्टि फेर लेती है।ट
11👉 जो व्यक्ति सूर्योदय के बाद भी सोता रहता है उस पर लक्ष्मी की कृपा दृष्टि नहीं होती ऐसे लोग सामान्यतः अकर्मण्य तथा काम से जी चुराने वाले होते हैं। ये व्यक्ति श्रम साध्य कार्यों से दूर भागते हैं कर्म के अभाव में लक्ष्मी अपनी कृपा की वर्षा कैसे करें।
12👉 देवी देवताओं की तस्वीर मूर्ति की तरफ पैर करके सोता हो उस पर तो निश्चित रूप से किसी भी देवता की कृपा नहीं हो सकती है।
13👉 मजबूर एवं अभावग्रस्त की हंसी उड़ाने वाले व्यक्ति को लक्ष्मी अपनी कृपा से वंचित कर देती है।
14👉 जिस व्यक्ति की नियत में खोट हो अर्थात सामर्थ के होते हुए भी किसी से लिया गया धन ना लौटाता हो उस व्यक्ति को लक्ष्मी की कृपा से वंचित होने से साक्षात विष्णु भी नहीं रोक सकते हैं।
15👉 जो व्यक्ति बिना पुरुषार्थ के धनी बनने हेतु झूठ चोरी बेईमानी जुआ सट्टा इत्यादि का सहारा लेता है उसे तो लक्ष्मी बिना कोई अवसर दिए तुरंत दरिद्रता के हवाले कर देती है।
16👉 जो व्यक्ति किसी भी प्रकार के व्यसन को अपनाता है तो वह निरंतर लक्ष्मी से दूर होता चला जाता है इसमें नशा उत्पन्न करने वाले व्यसन अत्यंत घातक माने गए हैं इसे लक्ष्मी धन का अपव्यय तो होता ही है साथ ही शरीर भी अनेक रोगों से ग्रस्त हो जाता है।
ऐसे अनेक कारण हैं जो देखने में भले ही साधारण लगते हो परंतु व्यवहार में हम इसका मूल्यांकन करें तो धीरे-धीरे कर्ज तथा विपत्ति की ओर धकेलने में इन कारणों का प्रमुख हाथ होता है।
सुपारी के अद्भुत लाभ धन और सौभाग्य के लिए प्रभावी उपाय
सुपारी का महत्व और प्रभाव:- सुपारी का उपयोग पूजा-पाठ में एक सामान्य वस्तु के रूप में किया जाता है, लेकिन ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में इसे अत्यंत शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, सुपारी में ऐसी ऊर्जा होती है जो घर के वातावरण को सकारात्मक बनाकर धन और सौभाग्य को आकर्षित करती है।
इसे प्रभु गणेश का प्रतीक माना जाता है, जो सभी बाधाओं को दूर करने और रुके हुए कार्यों में तेजी लाने में सहायक होती है।
वास्तु के अनुसार सुपारी का उपयोग
वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घर के पूर्व, उत्तर या ईशान कोण में चांदी या पीतल के बर्तन में साबुत सुपारी रखी जाए, तो इससे नकारात्मकता कम होती है और धन का प्रवाह प्रारंभ होता है। कई लोग वर्षों से इन उपायों का पालन कर रहे हैं और दावा करते हैं कि इससे नौकरी में उन्नति, व्यापार में लाभ और अचानक आर्थिक अवसर प्राप्त होते हैं।
सुपारी को सिद्ध करने की विधि
शास्त्रों के अनुसार, सुपारी तभी प्रभावी होती है जब इसे सही विधि से ‘सिद्ध’ किया जाए। सुपारी सिद्धि के लिए शुभ नक्षत्र जैसे पुष्य, विजयादशमी, दीपावली या अक्षय तृतीया को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इन विशेष दिनों में लाल या पीले कपड़े पर सुपारी रखकर गणपति का आवाहन किया जाता है। हल्दी, कुमकुम, अक्षत, चंदन और फूलों से सुपारी का विधिवत पूजन करने के बाद लक्ष्मी या गणपति मंत्र का जाप किया जाता है। इस प्रक्रिया से सुपारी में सकारात्मक ऊर्जा भरी जाती है।
मनोकामना पूर्ति के लिए सुपारी का उपाय
यदि कोई इच्छा लंबे समय से पूरी नहीं हो रही है या जीवन में बाधाएं आ रही हैं, तो सुपारी का मनोकामना पूर्ति उपाय बेहद प्रभावी माना जाता है। शुभ मुहूर्त या बुधवार को किसी मंदिर में साबुत सुपारी, गंगाजल से भरा तांबे का लोटा और थोड़ी सी दक्षिणा अर्पित की जाती है। यह उपाय ईश्वर तक आपकी मनोकामना को सीधे पहुंचाने वाला माना जाता है।
पूर्णिमा पर सुपारी का उपाय
पूर्णिमा को चंद्रमा की ऊर्जा अपने चरम पर होती है, इसलिए इस दिन किया गया सुपारी उपाय अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। पूर्णिमा की रात साबुत सुपारी पर हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक बनाकर उसे चावल की ढेरी पर रखा जाता है। इसके ऊपर लाल धागे से बंधी दूसरी सुपारी रखी जाती है और पूरा पूजन धूप-दीप और मंत्रजाप के साथ किया जाता है। यह उपाय लक्ष्मी को आकर्षित करने वाला माना जाता है, जिससे घर में स्थायी समृद्धि आती है।
सड़क पर पड़ी चीजों से बचने के ज्योतिषीय संकेत
आपने अक्सर अपने परिवार के बड़े सदस्यों से सुना होगा कि चौराहे को पार न करें, चौराहे के बीच से न जाएं, और सड़क पर पड़ी चीजों पर पैर न रखें। जबकि इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, ज्योतिष शास्त्र में इनका विशेष महत्व है। कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं, जिन पर गलती से भी पैर रखना अशुभ माना जाता है।*
मरे जीवों पर पैर न रखें:-
यह मान्यता है कि यदि गलती से मरे हुए जीव पर पैर पड़ जाए, तो यह पाप की श्रेणी में आता है। इसके अलावा, मरे हुए जीव से निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति पर प्रभाव डाल सकती है।
जली लकड़ी को न लांघें:-
जली हुई लकड़ी का अर्थ होता है कि या तो इसका उपयोग किसी अंतिम संस्कार में हुआ है या फिर तांत्रिक क्रियाओं में। इसलिए, जली लकड़ी पर पैर रखना भी उचित नहीं है।
सड़क पर पड़े बालों से बचें:-
व्यक्ति के शरीर में ऊर्जा का प्रवाह सबसे पहले सिर से होता है। इसीलिए, सड़क पर पड़े बालों पर पैर रखना भी नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित कर सकता है।
खाने पर पैर न रखें:-
खाने का अपमान करना भगवान का अपमान माना जाता है। इसके अलावा, अनाज का उपयोग टोने-टोटके में भी किया जाता है। इसलिए, सड़क पर पड़े खाने पर पैर रखने से बचें।
अन्य वस्तुओं से बचें:-
सड़क पर पड़े काले कपड़े, फटे जूते, चूड़ियां, कुमकुम-सिंदूर, नींबू, मिर्च, लौंग, और कपूर जैसी चीजों पर भी पैर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकती हैं।



