सूर्य देव के प्रभावी मंत्र एवं रामचरित मानस रामायण जो बदल सकते हैं आपका जीवन क़ो आओ जानें
भारतीय संस्कृति में सूर्य को जीवन का स्रोत माना गया है। सूर्य नमस्कार न केवल एक योगासन है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक साधना है जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करती है। सूर्य नमस्कार के दौरान विशेष 12 मंत्रों का उच्चारण किया जाता है, जो सूर्य देव के 12 स्वरूपों को समर्पित हैं।
सूर्योदय से पूर्व, स्नान कर शुद्ध मन से सूर्य की आराधना करने पर अद्भुत ऊर्जा एवं सकारात्मकता प्राप्त होती है।
सूर्य नमस्कार के 12 मंत्र….
1. ॐ मित्राय नमः – जो सभी के मित्र हैं।
2. ॐ रवये नमः – जो प्रकाश प्रदान करते हैं।
3. ॐ सूर्याय नमः – जो अंधकार का नाश करते हैं।
4. ॐ भानवे नमः – जो चमक और तेज से युक्त हैं।
5. ॐ खगाय नमः – जो आकाश में गति करते हैं।
6. ॐ पूष्णे नमः – जो पोषण करते हैं।
7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः – जो स्वर्णिम गर्भधारी हैं।
8. ॐ मरीचये नमः – जो अनगिनत किरणों के स्वामी हैं।
9. ॐ आदित्याय नमः – जो माता अदिति के पुत्र हैं।
10. ॐ सवित्रे नमः – जो सृष्टि के प्रेरक हैं।
11. ॐ अर्काय नमः – जो पूजनीय हैं।
12. ॐ भास्कराय नमः – जो प्रकाश और ज्ञान के दाता हैं।
लाभ : यह मंत्र एकाग्रता, ऊर्जा, मानसिक शुद्धता एवं शरीर की मजबूती
प्रदान करते हैं। यह एक संपूर्ण योग, भक्ति और ध्यान की प्रक्रिया है।
सूर्य बीज मंत्र….
मंत्र : ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
लाभ : यह मंत्र धन, प्रसिद्धि, रोग मुक्ति एवं आत्मबल प्रदान करता है।
इसे प्रतिदिन 108 बार जाप करने से जीवन में चमत्कारी बदलाव संभव है।
सूर्य गायत्री मंत्र…..
ॐ भास्कराय विद्महे महाद्युतीकऱाय धीमहि। तन्नो आदित्यः प्रचोदयात॥
हे भास्कर देव! हम आपका ध्यान करते हैं। कृपया हमें श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान करें और हमारे मन को प्रकाशित करें।
लाभ : यह मंत्र मानसिक शक्ति, तेज, आत्मविश्वास एवं सफलता प्रदान करता है। इसे रविवार को सूर्योदय के समय जाप करना विशेष फलदायी होता है।
आदित्य हृदय स्तोत्र मंत्र…
मंत्र: आदित्य हृदय पुण्यं सर्व शत्रु विनाशनम्।
जयावहम जपे नित्यं अक्षयं परमं शिवम्॥
अर्थ: यह सूर्य स्तुति मंत्र सभी बाधाओं को दूर कर विजय प्रदान करता है। यह मन को शुद्ध करता है और आत्मबल को जाग्रत करता है।
लाभ: शत्रु बाधा से मुक्ति
नकारात्मक विचारों का अंत
आत्मबल, तेज और साहस में वृद्धि
सूर्य मंत्र जाप की विधि…
रविवार से शुरुआत करें और सूर्योदय से पूर्व जाप करें।
साफ वस्त्र पहनकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
सूर्य को जल अर्पित करें, साथ में फूल, धूप और चंदन अर्पित करें।
मन को शांत रखें और श्रद्धा भाव से मंत्रों का जाप करें।
नियमित अभ्यास से न केवल स्वास्थ्य बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।
सूर्य देव के मंत्र केवल शब्द नहीं हैं, वे ब्रह्मांडीय ऊर्जा के स्रोत हैं। इन मंत्रों का नियमित जाप जीवन में प्रकाश, सफलता, मानसिक शांति और
आत्मशक्ति प्रदान करता है। हर व्यक्ति को अपने उद्देश्य के अनुसार सूर्य मंत्रों का चयन कर जाप करना चाहिए।
सूर्य देव की उपासना से शरीर, मन और आत्मा तीनों शुद्ध होते हैं।
सूर्य बीज मंत्र – सफलता की कुंजी, रोगों का नाशक।
सूर्य नमस्कार केवल योग नहीं, यह आत्म-जागरण है।
हर मंत्र सूर्य की कृपा को आमंत्रण देता है।
सूर्य गायत्री मंत्र – तेजस्विता और बुद्धि का वरदान।
रामचरितमानस की चौपाइयों में ऐसी क्षमता है कि इन चौपाइयों के जप से ही मनुष्य बड़े-से-बड़े संकट में भी मुक्त हो जाता है।
इन मंत्रो का जीवन में प्रयोग अवश्य करे प्रभु श्रीराम आप के जीवन को सुखमय बना देगे।
1.
रक्षा के लिए
मामभिरक्षक रघुकुल नायक |
घृत वर चाप रुचिर कर सायक ||
2.
विपत्ति दूर करने के लिए
राजिव नयन धरे धनु सायक |
भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक ||
3.
सहायता के लिए
मोरे हित हरि सम नहि कोऊ |
एहि अवसर सहाय सोई होऊ ||
4.
सब काम बनाने के लिए
वंदौ बाल रुप सोई रामू |
सब सिधि सुलभ जपत जोहि नामू ||
5.
वश मे करने के लिए
सुमिर पवन सुत पावन नामू |
अपने वश कर राखे राम ||
6.
संकट से बचने के लिए
दीन दयालु विरद संभारी |
हरहु नाथ मम संकट भारी ||
7.
विघ्न विनाश के लिए
सकल विघ्न व्यापहि नहि तेही |
राम सुकृपा बिलोकहि जेहि ||
8.
रोग विनाश के लिए
राम कृपा नाशहि सव रोगा |
जो यहि भाँति बनहि संयोगा ||
9.
ज्वार ताप दूर करने के लिए
दैहिक दैविक भोतिक तापा |
राम राज्य नहि काहुहि व्यापा ||
10.
दुःख नाश के लिए
राम भक्ति मणि उस बस जाके |
दुःख लवलेस न सपनेहु ताके ||
11.
खोई चीज पाने के लिए
गई बहोरि गरीब नेवाजू |
सरल सबल साहिब रघुराजू ||
12.
अनुराग बढाने के लिए
सीता राम चरण रत मोरे |
अनुदिन बढे अनुग्रह तोरे ||
13.
घर मे सुख लाने के लिए
जै सकाम नर सुनहि जे गावहि |
सुख सम्पत्ति नाना विधि पावहिं ||
14.
सुधार करने के लिए
मोहि सुधारहि सोई सब भाँती |
जासु कृपा नहि कृपा अघाती ||
15.
विद्या पाने के लिए
गुरू गृह पढन गए रघुराई |
अल्प काल विधा सब आई ||
16.
सरस्वती निवास के लिए
जेहि पर कृपा करहि जन जानी |
कवि उर अजिर नचावहि बानी ||
17.
निर्मल बुद्धि के लिए
ताके युग पदं कमल मनाऊँ |
जासु कृपा निर्मल मति पाऊँ ||
18.
मोह नाश के लिए
होय विवेक मोह भ्रम भागा |
तब रघुनाथ चरण अनुरागा ||
19.
प्रेम बढाने के लिए
सब नर करहिं परस्पर प्रीती |
चलत स्वधर्म कीरत श्रुति रीती ||
20.
प्रीति बढाने के लिए
बैर न कर काह सन कोई |
जासन बैर प्रीति कर सोई ||
21.
सुख प्रप्ति के लिए
अनुजन संयुत भोजन करही |
देखि सकल जननी सुख भरहीं ||
22.
भाई का प्रेम पाने के लिए
सेवाहि सानुकूल सब भाई |
राम चरण रति अति अधिकाई ||
23.
बैर दूर करने के लिए
बैर न कर काहू सन कोई |
राम प्रताप विषमता खोई ||
24.
मेल कराने के लिए
गरल सुधा रिपु करही मिलाई |
गोपद सिंधु अनल सितलाई||
25.
शत्रु नाश के लिए
जाके सुमिरन ते रिपु नासा |
नाम शत्रुघ्न वेद प्रकाशा ||
26.
रोजगार पाने के लिए
विश्व भरण पोषण करि जोई |
ताकर नाम भरत अस होई ||
27.
इच्छा पूरी करने के लिए
राम सदा सेवक रूचि राखी |
वेद पुराण साधु सुर साखी ||
28.
पाप विनाश के लिए
पापी जाकर नाम सुमिरहीं |
अति अपार भव भवसागर तरहीं ||
29.
अल्प मृत्यु न होने के लिए
अल्प मृत्यु नहि कबजिहूँ पीरा |
सब सुन्दर सब निरूज शरीरा ||
30.
दरिद्रता दूर के लिए
नहि दरिद्र कोऊ दुःखी न दीना |
नहि कोऊ अबुध न लक्षण हीना ||
31.
प्रभु दर्शन पाने के लिए
अतिशय प्रीति देख रघुवीरा |
प्रकटे ह्रदय हरण भव पीरा ||
32.
शोक दूर करने के लिए
नयन बन्त रघुपतहिं बिलोकी |
आए जन्म फल होहिं विशोकी ||
33.
क्षमा माँगने के लिए
अनुचित बहुत कहहूँ अज्ञाता |
क्षमहुँ क्षमा मन्दिर दोऊ भ्राता ||
।। राम राम ।।






