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“बदलता समाज या बढ़ता भ्रम? ‘कुंवारेपन का युग’ और विवाह पर वायरल दावों की सच्चाई”

आने वाला समय कुवांरेपन का युग होगा

एक हालिया अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार अगले छ:वर्षो में विश्व की लगभग 45% लड़कियां अविवाहित रह जाएंगी।

यह रिपोर्ट 1 फरवरी 2025 को प्रकाशित लोकमत अखबार में छपी थी, जो मार्गन स्टेनली संस्था द्वारा किए गए एक विस्तृत अध्धयन पर आधारित हैं।।

सर्वेक्षण में पाये गए प्रमुख कारण:-

१.आज की लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही है और करियर को प्राथमिकता दे रही हैं।
२.वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है और किसी पर निर्भर रहना नहीं चाहती।
३.उन्हें स्वतंत्रता प्रिय है और वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेना चाहती हैं।
४.विवाह, मातृत्व और पारिवारिक बंधनों को वे अक्सर अपनी प्रगति में बाधा मानने लगी हैं।
५.यदि यह प्रवृति बनी रही तो पारंपरिक परिवार प्रणाली और सामाजिक संरचना बिखर सकती हैं।
६.जनसंख्या में गिरावट, कुंवारे लड़को की संख्या में वृद्धि और वृद्धावस्था में अकेलेपन की समस्याएँ सामने आ सकती हैं।
७.प्रश्न यह भी उठता है प्रगति, पद और पैसा किस काम आएंगे, जब जीवन के अंत में साथ देने वाला कोई न होगा?

कई माता पिता लड़कियों के रिश्ते तो ढूंढ रहे हैं, पर स्वयं लड़की को विवाह में रूचि नहीं होती।जिसके कारण हर रिश्ता नकारा जा रहा है।
समाज के एक बड़े वर्ग को इस बदलाव की गंभीरता का अभी मालूम नहीं है,इसलिए यह आवश्यक है कि हम समय रहते चेते।

लड़कियों के विवाह के लिए उपयुक्त आयु 23 से 26 वर्ष के बीच हो यदि हो पाएं तो ओर भी जल्दी, इसके लिए सामूहिक स्तर पर जागरूकता ओर पहल जरूरी है।

यह विषय किसी के विरोध में नहीं, बल्कि भविष्य की स्थरिता और संतुलन की चिंता के तहत उठाया गया है, समाज, परिवार और व्यक्तिगत जीवन तीनों को संतुलित रखना ही सच्ची प्रगति हैं।

: हम सबको इस पर विचार अवश्य करना चाहिए

भविष्य की एक ज्वलंत समस्या

👉🏿 जब बच्चों का विवाह
20 साल में होता था, तो
एक सदी में 5 पीढ़ियाँ होती थीं.

👉🏿 जब बच्चों का विवाह
25 साल में होता था, तो
एक सदी में 4 पीढ़ियाँ होती थीं.

👉🏿 अब बच्चों का विवाह
30 साल में होता है, तो
एक सदी में 3 पीढ़ियाँ होती हैं.

👉🏿 सोचने वाली बात है.
क्या हमारा समाज
अगली सदी तक जीवित रहेगा ?
आज एक अजीब सा
अंधेरा फैल रहा है.

🏚️ गली-मोहल्ले वीरान हैं,
आस-पास के घर खाली हैं.
आज घरों में बच्चों की आवाज कम
पति-पत्नी की आवाज
ज्यादा सुनाई देती है.

★ लड़कियाँ 30-35 साल तक
कुंवारी हैं.
★ लड़के 35 साल के बाद भी
कुँवारें घूम रहे हैं.
★ देर से शादी …
फिर सम्बंध विच्छेद (तलाक)

टूटते परिवार …
दुखी माँ-बाप.
माता-पिता अकेले..
पूरी पीढ़ी खालीपन अनुभव करती है.

🤷🏻‍♀️ क्या हम इसे
“पढ़ा-लिखा समाज” कहें या
“स्वयं को नुकसान पहुँचाने वाला समाज”

💁🏻‍♂️ यह तो जनसंख्या कम करने की
एक खामोश साज़िश है.

★ अगर 50 जोड़ों में
सिर्फ़ एक बच्चा हो
तो अगली पीढ़ी में
सिर्फ़ नाममात्र के बच्चे होंगे.

👉 अगर ऐसा ही चलता रहा,
तो तीसरी पीढ़ी लगभग
गायब हो जाएगी.

👉 मोहल्ले,गलियाँ खाली पड़ी हैं.
सब लोग रोड़ पर हैं.
जीवन का आधा समय तो
रोड़ पर ही बीत जाता है.

★ गाँव के गाँव खत्म हो रहे हैं.

★ शहरों में ऊँची इमारतें हैं, लेकिन संयुक्त परिवार प्रथा समाप्त हो गयी है.

👉 नई बहुएं
“सिर्फ़ एक ही बच्चा” चाहती हैं.
🤷🏻‍♀️ क्या यही समाज है ?
❓ क्या यही हमारे पुरखों की
विरासत है ?

👉 सच तो यह है, कि ….
बच्चे अब प्यार की निशानी नहीं रहे. बल्कि बच्चे पैदा करना …एक मजबूरी सी है.

⚖️ सबसे बड़ी गलती —
लड़की के पिता की है,
वही पिता जिसने
20-22 साल की उम्र में
विवाह करके
परिवार बसाया था.

अब वही पिता 30 साल की उम्र तक
अपनी बेटी का विवाह न करके बहादुरी दिखा रहे हैं.

👉 परिणाम ????

लड़के लड़कियाँ डिप्रेशन में जा रहे हैं.

👉 आज बच्चों का सही समय पर विवाह नहीं हो रहा है, और
न सही समय पर कोई नौकरी मिल रही है.

👉 समाज धीरे-धीरे
समाप्त होता जा रहा है.

👉 इसी कारण बच्चे
समाज के साथ नहीं
अकेले रहना पसंद करते हैं.
यानी एकल परिवार
यहाँ तक कि बच्चे भी नहीं चाहिए.

★ देर से शादी करना
★ देर से बच्चा करना, फिर
एक बच्चे के बाद
मेडिकल और लालन-पालन का
बहाना करना.
💁🏻‍♀️ यह आम बात हो गई है.

हजारों जवान लड़के लड़किया उम्र के कारण कुंवारे घूम रहे हैं.

समाज के समझदार लोग
चुप्पी साधे हुए हैं

★ विवाह, परिवार, बच्चे –
इन सब को बोझ समझा जा रहा है.

🎈 विवाह … कोई दुनियावी बंधन नहीं यह घर परिवार और समाज का स्तम्भ है.

🎈 प्रजाति, सभ्यता और संस्कार कोआगे बढ़ाने का एक तरीका है.

💥 अब हम सब को समझने का समय आ गया है.
🫵 बच्चों को ‘हद से ज्यादा’
आजादी दे कर हमने उनकी
समझ छीन ली.

★ विवाह टलता रहा, और जब हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

फिर वही अकेलापन

🫵 लड़के लड़कियों के लिए
विवाह की सही उम्र
🔹 लड़कों के लिए 25 साल से पहले
🔸 लड़कियों की 20 साल से पहले.

🚩 वर्ना इतिहास लिखेगा …
“वह हिंदू समाज, जिसने चुपचाप स्वयं को खत्म कर लिया.”

सोचो और समझदारी दिखाओ.

अपने बच्चों का विवाह
समय पर कीजिये.
🙏

क्योंकि … परिवार नहीं बचा, तो समाज को भी देर सवेर ध्वस्त होते देर नहीं लगनी है.

यही कारण है …डेविड सेलबॉर्न, सतीश बंसल और बिल वार्नर जैसे लेखक यह कहने पर मजबूर हो जाते हैं , कि
★ इस्लाम के मज़बूत
फैमिली सिस्टम की वजह से …
देर सवेर … अधिकांश देश भारत में भी हिन्दू परिवार परम्परा का पतन होना प्रारम्भ हो चुका है.

रक्त के 5 रिश्ते
समाप्त होने की कगार पर हैं.
ताऊ, चाचा, बुआ, मामा
मौसी जैसे रिश्ते
आने वाले समय में
देखने-सुनने को
नहीं मिलने वाले हैं.

इसे इस तरह 👇🏽
समझा जा सकता है-

पुत्र पुत्री
2 1 (मौसी X)
1 2 (चाचा, ताऊ X)
1 1 (चाचा, ताऊ, मौसी X)
1 0 X
0 1 X
परिणाम
0 0

सिंगल चाइल्ड फैमिली को
उनका निर्णय तीसरी पीढ़ी याने जिनके आप … दादा-दादी होंगे बुरी तरह प्रभावित करेगा. जिस दादा को मूल से अधिक ब्याज प्यारा होता है, उसका तो ….मूलधन भी समाप्त हो जाएगा.
इसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी है.

इसलिए दम्पत्ति को
सिंगल चाइल्ड के निर्णय पर गंभीरता से विचार करना होगा.

यह घटती आबादी के आँकड़े
बोल रहे हैं.
यह विश्लेषण सरकारी आँकड़ों के अध्ययन से आ रहा है.

आपका पौत्र या प्रपौत्र
इस संसार में
अकेला खड़ा होगा.

उसे अपने रक्त के रिश्ते की
आवश्यकता होगी तो
इस पूरे ब्रह्मांड में उसका अपना कोई नहीं होगा.

यह अत्यंत सोचनीय विषय है.

ये न केवल हमारे बच्चों को
एकाकी जीवन जीने को
मजबूर करेगा बल्कि हमारी
हिंदू परिवार सभ्यता को ही नष्ट कर देगा.

हम जो हिन्दू एकता की बात करते हैं ये तो सभ्यता ही समाप्त हो जाएगी और इन सबके लिए हमारी वर्तमान पीढ़ी उत्तरदायी होगी.


अगर आप इस विषय को
गंभीर समझते हैं तो
इस समस्या पर विचार करें,

घर परिवार में, पति पत्नी के बीच, रिश्तेदारों में, दोस्तो में एवं
विभिन्न बैठकों एवं आयोजनों में इस विषय पर मंत्रणा करें.

अपनी सभ्यता, संस्कार औऱ पीढ़ियों को बचाये.

बहुत गंभीर समस्या है.

साभार: सोशल मीडिया

“जय जय सियाराम”
💐🙏💐🇮🇳

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Author: sssrknews

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