#बंगाल विजय के गुमनाम धुरंधर:
आज पूरा देश बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की विजय की खुशी मना रहा है। #वामुल्लों का एक बड़ा अघोषित किला ध्वस्त हुआ है. इस जीत का श्रेय कोई दिल्ली के नेतृत्व को; तो कोई बंगाल के पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत और रणनीति को दे रहा है। ऐसे में बहुत कम लोग जानते हैं कि इस विजय में भी कुछ अनाम, गुमनाम #धुरंधर लोगों की भी महती भूमिका है।
वो लोग जिन्होंने एक दशक से अधिक धरातल पर कार्य किया. और इस विजय की पटकथा लिखने में अपना योगदान दिया. ऐसे ही एक धुरंधर एक की कहानी सुनाता हूं.
बात फरवरी 2017 की है जब भाई Amba Shankar Bajpai जी को कुछ चुने हुए स्वयंसेवको के साथ स्पेशल मिशन पर बंगाल भेजा गया. ज्ञात होगा कि 2017 में बंगाल के बसिरहाट में एक बहुत बड़ा साम्प्रदायिक दंगा हुआ। उंसके पहले कालियाचक धुलागढ़ जैसे दंगे हो गए थे। और इन दंगों में मुसरमानों ने हिंदुओं व हिंदुओं की संपत्ति का बहुत नुकसान किया था।
बसिरहाट वाले दंगे में कोई भी भाजपा का नेता बसिरहाट बदुरिया जा ही नहीं पाया क्योंकि TMC ने रोड ब्लॉक कर दिया था। एक टीम केंद्र से आई थी,, लेकिन सभी कलकत्ता में फंसे हुए थे. जमीन की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल पा रहा था। प्रशासनिक अधिकारी, पत्रकार, लोकल नेतृत्व कोई भी दंगे की। वीभत्सता पर बात नहीं कर रहा था.
तब ये युवा कुर्ता के बजाय जींस शर्ट पहन कर सीधे एक लोकल ट्रेन सियालदह से बसिरहाट पहूँच गए। उधर सप्ताह भर रुके पूरे क्षेत्र को समझा वहां की डेमोग्राफी समझी और दंगा क्यों हुआ था वह समझा। चूंकि क्षेत्र सीमावर्ती है तो इस क्षेत्र से लगा लगी हुई सीमा को देखा खोजदंगा बार्डर भी गए।
बंगाल में देखा कि इधर लोग डर के साये के जीते है। और बंगाल की कोई भी न्यूज़ बंगाल से बाहर नही जा पाती है। रिपोर्ट बनाई और केंद्र को भेज दी.
फिर आरम्भ हुआ जिले जिले गांव गांव का सघन दौरा और बैठकों का सिलसिला, जो 2021 के चुनाव तक अनवरत चलता रहा.
अगर आप को याद हो – सन 2017 में ही दुर्गा पूजा के दौरान दुर्गा विसर्जन का दिन व ताजिया/मुहर्रम एक ही दिन पड़े, तो ममता सरकार ने एक आदेश जारी किया कि दुर्गा मूर्ति विसर्जन एक दिन बाद होगा !!
उस दिन लगा कि कोई बोलने वाला भी नही है कि हिंदुओं के इस पवित्र नवरात्रि पर दुर्गा मूर्ति विसर्जन को एक दिन आगे के लिए टाल दिया है। और न कांग्रेस न ही सी.पी.एम. कुछ कह रहा है। हालांकि कोलकाता कोर्ट ने यह आदेश दिया कि दोनों एक ही दिन होंगे।
लेकिन ममता ने कोर्ट के आदेश तक को धता बताते हुए दुर्गा पूजा पंडालों से स्थानीय पुलिस स्टेशन से परमिशन लेना होगा ताकि “लॉ एंड ऑर्डर” मेंटेन रहे। अब जो पूजा पंडाल अनुमति लेने गया या तो उंसको मार-पीट कर शांत कर दिया गया कुछ पर केस कर दिया गया इससे भयभीत होकर शेष पंडाल वालों ने अनुमति भी नही मांगी और दूसरे दिन दुर्गा मूर्ति विसर्जित किया। ये स्थिति थी।
इसको देखते हुए अंबाशंकर जी ने पांचजन्य में एक लेख लिखा। जो उस समय बहुत वायरल हुआ था. देश को और राज्य के अन्य लोगों को भी माओमाता का तुगलकी फरमान समझ आया.
और इस लेख के बाद यह बात आई कि यह दीदी के खिलाफ है अब TMC वाले तुम्हे छोड़ेंगे नही। मतलब सीधा थ्रेट था। धमकियां आरम्भ हो गई. संगठन के वरिष्ठों ने भी कहा गया कि किसी #अज्ञात नाम ( id) से लिखो अगर लिखना है।
लेकिन उसी समय से बंगाल के लिए प्रतिमाह पांचजन्य के लिए लेख विभिन्न मुद्दों पर लिखा शुरू किया और 2022 तक नियमित लेख बंगाल राजनीति पर लिखा गया। 2017 से पहले बंगाल की कोई भी न्यूज़ बंगाल से बाहर नहीं जाती थी।
सोशल मीडिया पर मोमता अधिकृत बंगाल/Momta occupied Bengal व Bengal the Untold स्टोरी सीरीज चलाई गई। नैरेटिव बनना शुरू हुआ.
बंगाल की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक तीनो विषयो से शेष भारत को अवगत कराया गया।
धीरे धीरे इस धुरंधर की टीम ने बंगाल की 42 लोकसभा व 294 विधान सभा के प्रत्येक विधानासभा में। 2019 लोकसभा चुनावों में 50,000+ लोगो से मिलकर माहौल बनाने और लोगों को परिवर्तन के लिए अंदर ही अंदर माहौल बनाने का कार्य हुआ. 294 विधानसभा के हर विधानसभा के कम से कम पांच गांवों में जाना हुआ। बंगाल जैसे छोटे से राज्य में लगभग 30 हज़ार km की यात्रा की होगी। और चुनाव के समय 6 माह तो केवल औसतन 4 घण्टे से ज्यादा सोए भी नही।
मुझे याद है – अफ्रीका में होने के नाते मैं अक्सर (भारतीय समयानुसार) आधी रात के समय ही फोन करता हूं. परंतु जब फोन करूं, वे देर रात किसी ना किसी गांव में बैठक ले रहे होते और कहते सुबह फोन करूंगा. और अगले दिन सुबह अफ्रीका में मै उनके फोन से ही जागता… 😆
उन्होंने एक बात पूरे बंगाल में देखी – बंगाल में लोग एक ही बात बोलते थे वे #पोरिवर्तन या बदलाव चाहते हैं, लेकिन फिर भी डर का माहौल था. हिन्दू, विशेषकर जो बंगलादेश से आया हुआ है, उंसको डर यह है कि हम लोगो को बंगलादेश से भागना पड़ा और मोमता ने उन्ही बांग्लादेशी मुस्लिमो को यहां बुला लिया है। और अब हम कहाँ जायेगे?
माओमाता संख्या-लघु या अल्पसंख्यक या मुस्लिम तुस्टीकरण की ही बात करती है।
खैर 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को 42 लोकसभा सीटों में से 18 सीटों पर 40.8% वोट शेयर के साथ विजय प्राप्त हुई।
यह अनवरत संघर्ष 2021 के विधानाभा चुनावो तक जारी रहा। उस विधानसभा चुनाव में भाजपा को 77 सीटों पर विजय प्राप्त हुए। जबकि 2016 में bjp को मात्र 3 सीटें प्राप्त हुई थी।
सरकार नहीं बन पाई और फिर शुरू हुआ #डायन के गुंडों का तांडव !!
2021 के विधानसभा चुनावों के बाद जो हिंसा हुई, वो आप सब को पता ही है। पूरा “कैरम क्लब गिरोह” अम्बा जैसे जमीनी कार्यकर्ताओं की खोज में लग गया था. समय रहते अपना ये धुरंधर अंडरग्राउंड हो कर बंगाल छोड़ निकल पड़े दक्षिण में केरल को अपनी कर्मभूमि बनाने.
2021 के चुनाव में भाजपा को 38.70% वोट मिले थे, उनने जो जमीन तैयार की, आज पांच साल बाद उनमें 7% की बढ़ोतरी हुई और भाजपा का महल बनकर तैयार हुआ है।
खैर… आज जब भाजपा की सरकार बन चुकी है तो वे केरल के किसी कोने में चुपचाप वहां के कार्यकर्ताओं को लड्डू खिला कर वे केरल में भविष्य के चुनाव में बंगाल की तरह के प्रदर्शन को रिपीट करने में जुटे हैं.
जय हो अम्बा भाई…
जय हो राष्ट्रनिष्ठ
और
धर्मनिष्ठ धुरंधर लोगों की.
🧡😊🧡






