तीसरी तक पढ़े पापा, मां सातवीं तक और बेटी ग्यारहवीं में फेल हुई।
लेकिन किस्मत ने उसके लिए कुछ बड़ा सोच रखा था!
मिलिए मध्य प्रदेश की प्रियल यादव (शादी के बाद प्रियल सिंह राठौड़) से; एक किसान की बेटी, जिसने समाज की बात मानकर फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स (PCM) लिया और फेल हो गई।
सबने कहा “अब कुछ नहीं हो सकता”, लेकिन मां-बाप ने उसका साथ नहीं छोड़ा।
प्रियल ने हिम्मत नहीं हारी और MPPSC एग्ज़ाम तीन बार क्लियर किया!
2019 – रैंक 19 (District Registrar)
2020 – रैंक 34 (Assistant Commissioner)
2021 – रैंक 6 (Deputy Collector)
आज वही लड़की डिप्टी कलेक्टर बन चुकी है।
प्रियल की कहानी सिखाती है: “फेल होना अंत नहीं, बस एक रुकावट है।”
साभार : Swatantra Sagar Ji






