उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का मुद्दा आज केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि जनविश्वास के संकट का रूप ले चुका है। मुख्यमंत्री के स्तर पर लगातार सख्ती, ऑनलाइन व्यवस्था, निगरानी तंत्र और भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों के बावजूद रिश्वतखोरी कम नहीं हो पा रही, बल्कि बढ़ती जा रही है।
विडम्बना यह है कि भ्रष्टाचार अब छिपकर नहीं, बल्कि खुलेआम होने लगा है; कई दफ्तरों में दलाल व्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं। जब तक भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों को राजनीतिक संरक्षण, सामाजिक स्वीकार्यता और विभागीय ढील मिलती रहेगी, तब तक ‘जीरो टॉलरेंस’ केवल भाषणों तक सीमित रहेगा। जब परम्परा ही घूस हो जाए, तो कानून भी घूंघट ओढ़कर बैठ जाता है।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य की प्रगति केवल एक्सप्रेसवे, निवेश और बड़े आयोजनों से नहीं मापी जा सकती। असली विकास तब होगा, जब आम आदमी बिना “चढ़ावे” के अपना वैध काम सम्मानपूर्वक करा सकेगा। भ्रष्टाचार केवल पैसे की चोरी नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, अधिकार और भविष्य की चोरी है।
भ्रष्टाचार मुक्त उत्तर प्रदेश
साभार : सोशल मीडिया






