नई दिल्ली: भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में कदम रखने वाले 634वें एस्ट्रोनॉट बन गए हैं। वे अंतरिक्ष यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय भी बन गए हैं। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को शुभांशु शुक्ला से संवाद किया। इस खास बातचीत की एक तस्वीर भी सामने आई है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से बातचीत की।”
“यह यात्रा पूरे देश की है” – पीएम मोदी और शुभांशु शुक्ला के बीच खास संवाद
अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा, “आपके नाम में भी शुभ है और आपकी यह यात्रा एक नए युग की शुभ शुरुआत है। अंतरिक्ष में भारत का परचम लहराने के लिए मैं आपको दिल से बधाई देता हूं।”
जवाब में शुभांशु शुक्ला ने कहा, “मैं यहां बिल्कुल ठीक हूं और यह अनुभव एकदम नया है। यह सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की यात्रा है। हम दिन में 16 बार सूर्योदय और 16 बार सूर्यास्त देखते हैं और 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंतरिक्ष में आगे बढ़ रहे हैं। यह गति दर्शाती है कि हमारा देश कितनी तेज़ी से प्रगति कर रहा है। यहां से पृथ्वी बिल्कुल एक नजर आती है, कोई सीमा रेखा नजर नहीं आती। जब हमने पहली बार भारत को देखा, तो वो बेहद भव्य और विशाल दिखा — मैप से कहीं ज्यादा सुंदर।”
“यह मिशन भारत की अंतरिक्ष यात्रा की पहली सीढ़ी”
प्रधानमंत्री मोदी ने पूछा कि स्पेस स्टेशन की परिस्थितियां कैसी हैं? इस पर शुभांशु शुक्ला ने मुस्कुराते हुए बताया, “यहां का हर अनुभव अलग है। अपने पैरों को बांधकर रखना पड़ता है, नहीं तो हवा में तैरने लगते हैं। यहां आप कहीं भी सो सकते हैं। भारत अब अंतरिक्ष की ओर दौड़ रहा है और यह मिशन उसी दौड़ की पहली सीढ़ी है। आने वाले समय में भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन भी होगा।”
युवा पीढ़ी के लिए संदेश देते हुए शुभांशु ने कहा, “भारत आज जिस दिशा में बढ़ रहा है, हम बहुत ऊंचे सपने देख रहे हैं। सफलता का कोई एक रास्ता नहीं होता, लेकिन हर रास्ते में एक बात समान होती है – कोशिश कभी मत छोड़िए।”
पीएम मोदी ने शुभांशु शुक्ला को दिया खास होमवर्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से बातचीत के दौरान उन्हें आगामी मिशनों को लेकर अहम ज़िम्मेदारी सौंपी। उन्होंने कहा, “हमें मिशन गगनयान को आगे ले जाना है, अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाना है और भविष्य में चंद्रमा पर भारतीय एस्ट्रोनॉट्स की लैंडिंग भी करानी है। इन सभी मिशनों के लिए आपका अनुभव बेहद उपयोगी होगा। मुझे यकीन है कि आप अंतरिक्ष में अपने अनुभवों को रिकॉर्ड कर रहे होंगे।”
इस पर शुभांशु शुक्ला ने जवाब दिया, “मैं यहां जो भी अनुभव ले रहा हूं, उसे एक स्पॉन्ज की तरह आत्मसात कर रहा हूं। ये अनुभव भारत के आगामी अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे और हमें अपने लक्ष्यों को तेजी से प्राप्त करने में मदद करेंगे।”
“भारत सिर्फ उड़ान नहीं भरेगा, बल्कि उड़ानों के लिए मंच तैयार करेगा” – पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “आज मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूं कि यह ऐतिहासिक यात्रा भारत के गगनयान मिशन की सफलता की पहली कड़ी है। आपकी यह उड़ान सिर्फ अंतरिक्ष की नहीं, बल्कि विकसित भारत की यात्रा को भी नई रफ्तार और मजबूती देने वाली है। भारत अब दुनिया के लिए स्पेस की नई संभावनाओं के द्वार खोलने जा रहा है। भविष्य में भारत सिर्फ अंतरिक्ष में उड़ान नहीं भरेगा, बल्कि नई उड़ानों के लिए मंच भी तैयार करेगा।”
अंतरिक्ष पहुंचने के बाद शुभांशु शुक्ला का भावुक संदेश
634वें अंतरिक्ष यात्री के रूप में अंतरिक्ष में कदम रखने वाले भारत के शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर सफल डॉकिंग के बाद हिंदी में अपना पहला संदेश भेजा। करीब 28 घंटे की अंतरिक्ष यात्रा के बाद उन्होंने कहा, “यह भारत के लिए बेहद खास पल है और मैं गर्व से अपना तिरंगा साथ लेकर आया हूं।”
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “सिर थोड़ा भारी लग रहा है, लेकिन धीरे-धीरे आदत हो जाएगी। यहां खड़ा होना आसान लग रहा है, पर शुरुआत में कुछ कठिनाइयां आ रही हैं, जो सामान्य हैं। यह इस यात्रा का पहला कदम है।”
आईएसएस में हुए औपचारिक स्वागत समारोह में उन्होंने संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए कहा, “मैं 634वां अंतरिक्ष यात्री हूं और यहां पहुंचना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। आपके प्यार और आशीर्वाद से मैं यहां तक पहुंचा हूं।”
बातचीत के अंत में उन्होंने गर्व से “जय हिंद, जय भारत” का उद्घोष किया।
14 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा, विज्ञान के नाम
शुभांशु शुक्ला ने बताया कि जैसे ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में प्रवेश किया और वहां के चालक दल से मुलाकात की, उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ने अपने घर के दरवाजे खोल दिए हों। उन्होंने कहा, “यह अनुभव शानदार रहा। यहां आकर मेरी उम्मीदों से कहीं अधिक दृश्य और अनुभव मिला है। आपने मुझे बहुत सम्मानित महसूस कराया।”
आने वाले मिशन को लेकर उत्साह जताते हुए उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि अगले 14 दिन विज्ञान और अनुसंधान के लिए बेहद फलदायक होंगे। हम मिलकर नई ऊंचाइयों को छूएंगे और मानवता की सेवा में योगदान देंगे।”





