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क्या संविधान से हटाए जाएंगे ये दो शब्द? RSS नेता दत्तात्रेय होसबोले ने उठाई मांग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने संविधान की प्रस्तावना में शामिल “समाजवादी” और “धर्मनिरपेक्ष” शब्दों की पुनः समीक्षा की मांग उठाई है। संघ के वरिष्ठ नेता और संगठन में नंबर-2 माने जाने वाले दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि ये दोनों शब्द आपातकाल के दौरान जोड़े गए थे और मूल संविधान, जिसे डॉ. भीमराव आंबेडकर ने तैयार किया था, में इनका उल्लेख नहीं था।

कब जोड़े गए थे ये शब्द?
आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में “समाजवादी” और “धर्मनिरपेक्ष” शब्द डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए मूल संविधान का हिस्सा नहीं थे। उन्होंने बताया कि ये शब्द 1975 में आपातकाल के दौरान जोड़े गए, जब देश में मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था, संसद सुचारू रूप से काम नहीं कर रही थी और न्यायपालिका भी सीमित हो गई थी।

होसबोले के अनुसार, आपातकाल के उस दौर में जब लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर थीं, तभी इन शब्दों को प्रस्तावना में शामिल किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में इस विषय पर चर्चा जरूर हुई, लेकिन प्रस्तावना से इन शब्दों को हटाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। इसलिए, अब यह विचार किया जाना चाहिए कि क्या ये शब्द प्रस्तावना में बने रहें या नहीं।

इमरजेंसी को लेकर आयोजित कार्यक्रम में बोले दत्तात्रेय होसबोले, उठाए प्रस्तावना पर सवाल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने इमरजेंसी को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम में संविधान की प्रस्तावना में शामिल “समाजवादी” और “धर्मनिरपेक्ष” शब्दों पर पुनर्विचार की बात कही। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पहले भी चर्चा हुई, लेकिन कभी गंभीरता से इन शब्दों को प्रस्तावना से हटाने पर विचार नहीं किया गया।

होसबोले ने सवाल उठाया, “क्या इन शब्दों को संविधान की प्रस्तावना में रहना चाहिए? क्या समाजवाद भारत के लिए एक शाश्वत विचारधारा है, जबकि प्रस्तावना को शाश्वत माना जाता है?”

इमरजेंसी के जुल्मों को किया याद
दत्तात्रेय होसबोले ने 25 जून, 1975 को लागू की गई इमरजेंसी को याद करते हुए कहा कि उस दौर में हजारों लोगों को जेल में डाल दिया गया था और उन पर अत्याचार किए गए थे। उन्होंने कहा कि उस समय न्यायपालिका और मीडिया की स्वतंत्रता पर भी भारी अंकुश लगाया गया था।

कांग्रेस पर कड़ा हमला
होसबोले ने इमरजेंसी के दौरान जबरन नसबंदी जैसे कदमों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जो लोग उस दौर की गलत नीतियों में शामिल थे, वे आज संविधान की प्रति लेकर घूम रहे हैं, लेकिन उन्होंने कभी माफी नहीं मांगी।” उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह अपने पूर्वजों द्वारा किए गए कार्यों के लिए देश से माफी मांगे।

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Author: sssrknews

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