Home » Uncategorized » “जब उपराष्ट्रपति ट्रेन से सफ़र पर निकले — एक सादगी की मिसाल”

“जब उपराष्ट्रपति ट्रेन से सफ़र पर निकले — एक सादगी की मिसाल”

म्हे तो जीवन बस – ट्रेन में ही बितायो है… जद थाने हेलीकॉप्टर की हवा लागी है ।
शेखावत साहब 15-20 दिन पहले उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दे चुके थे । दिल्ली के राजस्थान हाउस स्थित उनके कार्यालय में Mount Abu जाने का कार्यक्रम बन रहा था । ब्रह्मकुमारी संस्थान की प्रमुख योगिनी हृदयमोहिनी जी को श्रद्धांजलि देने । मुझे लगा Air Force नहीं तो कम से कम उदयपुर तक फ्लाइट में जाएँगे और वहाँ से सड़क मार्ग से Mount Abu …. लेकिन जब कार्यक्रम की कॉपी हाथ में आई तो देखा राजधानी एक्सप्रेस से पूरी रात सफ़र करते हुए आबू रोड तक जाना है । मेरे अंदर का Teenager तो हिल सा गया “15 दिन पहले तक हवाई जहाज़ और हेलीकॉप्टरों के काफिले में जाने वाले व्यक्ति कैसे अचानक ट्रेन में जाएँगे … लोग क्या कहेंगे ? How Embarrassing !”
खैर दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन से हमने राजधानी एक्सप्रेस से आबू रोड के लिए प्रस्थान कर लिया । मुझे रात भर नींद नहीं आयी । नानोसा को ट्रेन में देखना मुझे कुछ जचा नहीं । लेकिन सुबह सब कुछ बदल गया । सुबह 8 बजे आबू रोड रेलवे स्टेशन पर जब पहुंचे तो हज़ारों लोग अपने बाबोसा की प्रतीक्षा कर रहे थे । इतनी भीड़ मैंने पिछले पाँच सालों में airport या Helipad पर नहीं देखी थी । जैसे ही शेख़ाहवत साहब ट्रेन से उतरे, वहाँ जमा भीड़ ने अपनेपन से उन्हें घेर लिया । एक बुजुर्ग सज्जन ने ने तो कह ही दिया “साहब पीछा छूटा प्रोटोकॉल से …. अब जाके आपकी पसंदीदा रबड़ी ला सका हूँ । एह पुलिस आला लावा ही ना देता”
पूरा दिन ऐसे ही बीता । सब कार्य संपन्न कर शेखावत साहब हर बार की तरह रघुनाथ जी के दर्शन करके नक्की झील की पाल पर पैदल ही पधारे । लोग आ आकर उन्हें अपना गांव और पिता – दादा का नाम बताते, और वह ज़्यादातर को तुरंत पहचान जाते । पुलिस वाले भीड़ को रोकते तो वह उन्हें हटा देते । नक्की झील के पाल पर एक पान की दुकान चलाने वाले को बुलाकर कहा “एक पान बना दो मद्रासी पत्ते के साथ …. इतने में पान वालों ने शेखावत साहब को रोकते हुए कहा “ साहब मैं जानता हूँ आप कौनसा पान खाते हो । मेरे पिताजी ने आपको पान खिलाया हुआ है”

रात को ट्रेन में मैंने नानोसा को हेलीकॉप्टर – ट्रेन वाली अपने मन की बात बतायी ।
वो मुस्कुराए …. कहा “म्हे तो सारो जीवन बस – ट्रेन में ही बितायो है, जद थाने हेलीकॉप्टर की हवा लागी है ।
और सो गए ।

जयंती पर एक और अमिट स्मृति के साथ…. कोटिशः श्रद्धांजलि ????????

sssrknews
Author: sssrknews

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

Leave a Comment

Share This