Home » Uncategorized » **जब माफ़िया संगठित हैं, तो पत्रकार बिखरे क्यों? — सच्चाई पर मौन समाज का आईना ????**

**जब माफ़िया संगठित हैं, तो पत्रकार बिखरे क्यों? — सच्चाई पर मौन समाज का आईना ????**

आप कभी गौर करिएगा…बड़े आपराधिक संगठनों या गिरोह के सदस्यों में बड़ी एकता होती है, उनमें अनुशासन है…और सबसे बड़ी बात वो सभी अपने मास्टरमाइंड की बनाई योजना और रणनीति को मानते हैं और उसी पर कार्य करते हैं… कोई if या but नही।
उदाहरण के तौर पर आप शराब माफिया, शिक्षा माफिया और ड्रग्स माफिया से ही समझ लीजिए…!!
इनका नेटवर्क कई राज्यों तक फैला रहता है ..!!

अभी आप 4 वकील और 4 जुझारू कर्मठ पत्रकारों को जोड़ने की कोशिश करिए किसी संवैधानिक और नैतिक कार्य के लिए के लिए , तो स्थिति ऐसी होगी जैसे एक तराजू में मेंढ़कों को बैठाकर तौलना…!!

अधिकतर तो आपस में ही उलझ पड़ेंगे कि मैं तुमसे ज्यादा काबिल हूं…. मौजूदा हालात में तो सबसे बड़ा विवाद तो इस बात का हो जाएगा…
कि कोई किसी को अंधभक्त कहेगा और कोई किसी को…चमचा..!!
कहो तो आपस में हाथापाई तक कर लें…????

वकीलों में फिर भी एकता होती है…कोई पुलिसकर्मी बेवजह हाथ लगाकर देखें तो हजारों वकीलों की भीड़ का आक्रोश झेलना पड़ जाता है
वहीं आज पत्रकारों को पीटा जाता है तो कोई झूठे मुकदमों में फंसाया जाता है तो पत्रकारों की सुरक्षा का दावा करने वाले तमाम पत्रकार संगठन मौन हो जातें हैं और कुछ तो उपहास उड़ाते हैं..❗

क्या आप भी पत्रकार हैं..??
पत्रकारों से अच्छे तो कौवा और बंदर होते हैं…एक मर जाए तो झुंड लगा देते हैं… यहां आए दिन कोई पत्रकार मारा जाता है या झूठे मुकदमे में जेल भेजा जाता है और हम मौन है।
जिस समाज के लिए पत्रकार दुश्मनी मोल लेता है, वो समाज भी पत्रकारों की मौत पर मौन धारण कर लेता है और कहता है,, हमसे क्या मतलब..??
क्या जरूरत थी पड़ी लकड़ी लेने की..????

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Author: sssrknews

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