दिल्ली में दीवाली के बाद हो सकती है पहली कृत्रिम बारिश, IMD की मंजूरी का इंतज़ार — सिरसा ने बताया पूरा प्लान
नई दिल्ली: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और स्मॉग से निपटने के लिए क्लाउड सीडिंग यानी कृत्रिम बारिश का पहला ट्रायल दीवाली के बाद होने की संभावना है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रोजेक्ट की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और अब सिर्फ भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की मंजूरी का इंतज़ार है।
सिरसा ने कहा, “विमानों में क्लाउड सीडिंग के सभी उपकरण लगाए जा चुके हैं। पायलटों ने ट्रायल उड़ानें पूरी कर ली हैं और इलाके से अच्छी तरह परिचित हैं। अब बस IMD की हरी झंडी मिलते ही कृत्रिम बारिश का ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा।”
दीवाली के बाद तय होगी तारीख
मंत्री ने बताया कि मौसम की सही परिस्थितियों के अनुसार ट्रायल दीवाली के अगले दिन या कुछ दिनों बाद शुरू किया जा सकता है। हालांकि, फिलहाल सटीक तारीख तय नहीं की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रोजेक्ट भाजपा सरकार के उन प्रमुख वादों में से एक है, जो कई कारणों से अब तक टलता रहा है — कभी मॉनसून, तो कभी उपयुक्त बादलों की कमी के चलते।
23 विभागों से मिली मंजूरी, IIT कानपुर कर रहा संचालन
दिल्ली सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए IIT कानपुर के साथ साझेदारी की है। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि क्या कृत्रिम बारिश से सर्दियों में प्रदूषण और स्मॉग कम किए जा सकते हैं।
इस प्रोजेक्ट को DGCA समेत 23 विभागों की मंजूरी मिल चुकी है और IIT कानपुर को फंड भी ट्रांसफर कर दिए गए हैं। प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी IIT कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के पास है, जो अपने विमान सेसना 206-H (VT-IIT) का इस्तेमाल करेगा।
कैसे होगी कृत्रिम बारिश?
क्लाउड सीडिंग तकनीक के तहत बादलों में विशेष रसायन छोड़े जाते हैं ताकि वे बारिश उत्पन्न करें। यह अभियान भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे और IMD के विशेषज्ञों की मदद से चलाया जा रहा है।
सिरसा ने कहा, “हमारा मकसद दिल्ली की हवा को साफ करना और सर्दियों में स्मॉग की समस्या से राहत दिलाना है।”
DGCA के आदेश के मुताबिक, यह गतिविधि 1 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच की जाएगी और यह पूरी तरह सुरक्षा और हवाई यातायात नियंत्रण दिशा-निर्देशों के तहत होगी।
दिल्लीवासियों में बढ़ी उम्मीदें
राजधानी के लोगों को इस कृत्रिम बारिश प्रोजेक्ट से बड़ी उम्मीदें हैं। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो यह दिल्ली में प्रदूषण से लड़ने के लिए एक नया और प्रभावी समाधान साबित हो सकता है।



