हिमाचल में भारी तबाही: मानसून शुरू होने के बाद से 312 लोगों की मौत, 2.75 लाख करोड़ का नुकसान
हिमाचल प्रदेश में इस साल का मानसून जानलेवा साबित हो रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जून से अब तक कुल 312 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से 160 मौतें बारिश से जुड़ी आपदाओं—जैसे भूस्खलन, बादल फटना, अचानक बाढ़, डूबना और बिजली गिरने—की वजह से हुईं। वहीं, 152 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए।
सबसे ज्यादा नुकसान बुनियादी ढांचे को
राज्य की अर्थव्यवस्था को अब तक 2,75,354.81 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। इसमें सार्वजनिक ढांचा, निजी संपत्ति, कृषि, बागवानी और पशुधन को भारी क्षति पहुंची है। इस आपदा में 1,854 पशु और 25,700 से ज्यादा पोल्ट्री पक्षियों की मौत भी दर्ज की गई है।
किन जिलों में सबसे ज्यादा जानें गईं?
रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश से सबसे ज्यादा मौतें कांगड़ा (30) में हुईं। इसके बाद मंडी (29), चंबा (14), किन्नौर (14) और कुल्लू (13) का नंबर आता है। सड़क हादसों में चंबा और मंडी में सबसे ज्यादा 22-22 मौतें हुईं। कांगड़ा (19) और शिमला (15) में भी बड़ी संख्या में जानें गईं।
विभागवार नुकसान का आकलन
-
PWD: 1.53 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा
-
जल शक्ति विभाग (पेयजल व सिंचाई): 94,772.97 करोड़ रुपये
-
बिजली क्षेत्र: 13,946 करोड़ रुपये से अधिक
इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण-शहरी विकास, मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्रों को भी बड़ा नुकसान हुआ है।
आवासीय क्षति
-
338 पक्के मकान पूरी तरह ढह गए
-
438 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त
-
3,367 पक्के मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त
साथ ही दुकानों, गौशालाओं, झोपड़ियों, घाटों और कृषि भूमि को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है।
राहत और बचाव कार्य जारी
राज्य सरकार राहत व पुनर्वास कार्यों में जुटी हुई है। एसडीएमए के अनुसार, संपर्क मार्ग, बिजली आपूर्ति और पेयजल बहाली सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर बारिश का दौर ऐसे ही जारी रहा तो मौतों और नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है।






