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शशि थरूर का बयान- ट्रंप की सख़्ती से भारत-अमेरिका रिश्ते नहीं टूटेंगे

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को कहा कि भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों को भले ही फिलहाल झटके लगे हों, लेकिन दोनों देशों के दीर्घकालिक हित अंततः उन्हें फिर से “समान धरातल” पर ले आएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि टैरिफ बढ़ोतरी और H-1B वीज़ा शुल्क में इजाफ़े के बावजूद, दोनों देश सरकार और संस्थानों के विभिन्न स्तरों पर निरंतर सहयोग कर रहे हैं।

पूर्व विदेश राज्य मंत्री से जब पूछा गया कि क्या भारत-अमेरिका रिश्ते वापसी-रहित मोड़ पर पहुंच चुके हैं, तो उन्होंने साफ किया कि रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और कई अन्य क्षेत्रों में सक्रिय सहयोग जारी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है—छात्रों से लेकर सिलिकॉन वैली के सीईओ तक।

“अल्पकालिक झटका, दीर्घकालिक मजबूती”
थरूर ने एक इंटरव्यू में कहा, “मैं इसे वापसी का अंत नहीं कहूंगा। दोनों देशों के दीर्घकालिक हित हमें फिर से नज़दीक लाएंगे। हां, यह फिलहाल बड़ा झटका है, नौकरियों का नुकसान हो रहा है और भारत के लिए यह साल निश्चित ही कठिन है। लेकिन बड़ी तस्वीर को देखें तो साझेदारी आगे भी जारी रहेगी।”

उन्होंने कहा कि नई दिल्ली और वाशिंगटन दोनों ही विभिन्न स्तरों पर संवाद और सहयोग में सक्रिय हैं, और यह किसी भी तरह से रुकता हुआ नहीं दिख रहा है।

“भारत को खत्म करने की मंशा नहीं”
थरूर ने स्पष्ट किया, “क्या अमेरिका, ट्रंप जो भी करें, भारत को पूरी तरह अलग-थलग करने की तैयारी कर रहा है? ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है। रक्षा, खुफिया साझेदारी, आईटी, एआई, अंतरिक्ष और कई क्षेत्रों में लगातार सहयोग हो रहा है।”

“40 लाख से अधिक भारतीय मूल के अमेरिकी”
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका में 40 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं। अमेरिकी जनगणना ब्यूरो और अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे (ACS) 2023 के अनुसार, लगभग 59 लाख लोग स्वयं को भारतीय पहचान से जोड़ते हैं। भारतीय अब अमेरिका की एशियाई आबादी का 21% से अधिक हिस्सा हैं, जबकि चीनी मूल के लोग दूसरे स्थान पर हैं।

“तीन दशक पुरानी साझेदारी पर आघात क्यों?”
थरूर ने यह भी सवाल उठाया कि भारत पर टैरिफ और प्रतिबंध लगाना, जबकि चीन पर इसी तरह की कार्रवाई न करना, अनुचित है। उन्होंने कहा, “तीन दशकों से चल रही साझेदारी को अचानक क्यों बाधित किया गया? व्यापार प्रतिबंधों की अन्यायपूर्ण प्रकृति और राष्ट्रपति ट्रंप व उनके सलाहकार पीटर नवारो के अपमानजनक बयानों ने भारत में गहरी नाराज़गी पैदा की है। सच कहूं तो, तीन दशक से मज़बूत होते रिश्तों के बीच इस तरह की भाषा और रवैया बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।”

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Author: sssrknews

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