नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा, उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और संवाद क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की एक अहम पूंजी करार दिया है। यह टिप्पणी उन्होंने अंग्रेजी अख़बार ‘द हिंदू’ में प्रकाशित एक लेख के जरिए की है। थरूर ने मोदी को और अधिक सहयोग व समर्थन देने की भी वकालत की। गौरतलब है कि हाल ही में शशि थरूर ने भारतीय सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिका सहित कई देशों का दौरा किया था, जहां उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर सहित भारत के हितों का मजबूती से पक्ष रखा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस पार्टी लगातार मोदी सरकार की विदेश नीति की आलोचना कर रही है।
थरूर ने पीएम मोदी को बताया ‘प्राइम एसेट’, विदेश नीति में कूटनीतिक संवाद को बताया अहम
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा, उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और संवाद क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की एक अहम पूंजी बताया है। अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ में लिखे अपने लेख में थरूर ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद जो राजनयिक प्रयास किए गए, वह राष्ट्रीय संकल्प और प्रभावी संवाद का प्रतीक थे। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी का वैश्विक मंच पर प्रभाव भारत के लिए एक प्राइम एसेट है, लेकिन इसे और अधिक सहयोग और समर्थन की आवश्यकता है।”
थरूर ने यह भी बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से की गई दृढ़ और निर्णायक कार्रवाई ने विदेश नीति के लिहाज़ से एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि “तत्काल सैन्य प्रतिक्रिया निर्णायक थी, लेकिन उसके बाद का कूटनीतिक संवाद अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने और वैश्विक धारणाओं को प्रभावित करने में उतना ही महत्वपूर्ण, अगर उससे अधिक नहीं, साबित हुआ।”
थरूर खुद भी भारतीय सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिका सहित कई देशों की यात्रा पर गए थे, जहां उन्होंने भारत के रुख को मजबूती से प्रस्तुत किया। उन्होंने यह भी कहा कि जब भारत एकजुट होकर अपनी बात रखता है, तो वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट और दृढ़ स्वर में सुनी जाती है।
मोदी सरकार की विदेश नीति पर थरूर की तारीफ से कांग्रेस असहज
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा है कि उन्हें पश्चिमी गोलार्ध के पांच देशों—गुयाना, पनामा, कोलंबिया, ब्राजील और अमेरिका—में सात सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडलों में से एक का नेतृत्व करने का अवसर मिला। इस दौरे के अनुभवों को उन्होंने सार्वजनिक कूटनीति के एक गहन दौर के रूप में वर्णित किया और कहा कि इससे उन्हें कई महत्वपूर्ण सबक सीखने को मिले।
हालांकि, थरूर की यह टिप्पणी कांग्रेस पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है। वर्तमान में कांग्रेस मोदी सरकार की विदेश नीति को लेकर लगातार आलोचना कर रही है। पार्टी का आरोप है कि भारत की कूटनीति कमजोर पड़ी है और देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग पड़ता जा रहा है। ऐसे में थरूर द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की प्रशंसा और कूटनीतिक प्रयासों को अहम बताना, कांग्रेस के आधिकारिक रुख से अलग दिखाई देता है। इस बयान के बाद थरूर और पार्टी के बीच मतभेद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।



