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मध्य प्रदेश में 8000 जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर, OPD सेवाओं पर असर की आशंका

भोपाल: महंगाई भत्ते के आधार पर स्टाइपेंड संशोधन की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर सोमवार से हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल के पहले दिन मरीजों को अधिक परेशानी न हो, इसके लिए वैकल्पिक ओपीडी की व्यवस्था की गई है, लेकिन कुछ मरीजों ने सेवाओं में दिक्कत की शिकायत भी की है।

स्टाइपेंड संशोधन को लेकर नाराजगी

Junior Doctors Association (जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन) का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे नियमित ओपीडी सेवाएं नहीं देंगे। हड़ताल के दौरान जूनियर डॉक्टरों ने भोपाल के Hamidia Hospital परिसर में टेंट लगाकर प्रतीकात्मक रूप से ओपीडी संचालित की।

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष Mahendra Pratap Singh ने बताया कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित स्टाइपेंड 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा अप्रैल 2025 से मिलने वाले एरियर के भुगतान को लेकर भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है, जिससे डॉक्टरों में नाराजगी है।

अभी सीमित असर, लेकिन बढ़ सकती है परेशानी

फिलहाल हड़ताल का असर ज्यादा दिखाई नहीं दे रहा है क्योंकि सीनियर डॉक्टर ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं को संभाल रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर करीब 60 से 70 फीसदी कामकाज संभालते हैं।

ऐसे में अगर हड़ताल लंबे समय तक जारी रहती है तो अस्पतालों की ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं और मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

पहले से जारी था विरोध

गौरतलब है कि जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के नेतृत्व में राज्य के डॉक्टर पिछले कुछ दिनों से शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे। इस दौरान वे काली पट्टी बांधकर काम कर रहे थे। अब हड़ताल शुरू होने के बाद सभी की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है कि डॉक्टरों की मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है।

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Author: sssrknews

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