प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 11 साल के कार्यकाल में दूसरी बार इतने लंबे विदेशी दौरे पर निकले हैं। इससे पहले वे जुलाई 2015 में रूस और मध्य एशिया के पांच देशों की एक सप्ताह लंबी यात्रा पर गए थे। मौजूदा दौरा उस यात्रा के बाद उनकी सबसे लंबी विदेश यात्रा है। इस बार प्रधानमंत्री ग्लोबल साउथ के तहत अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन देशों का दौरा कर रहे हैं। यात्रा के दौरान वे पश्चिम अफ्रीकी देश घाना, कैरिबियन राष्ट्र त्रिनिदाद और टोबैगो, लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना और ब्राजील, और अफ्रीकी महाद्वीप का एक अन्य देश नामीबिया भी जाएंगे।
घाना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
पश्चिम अफ्रीका का देश घाना लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के लिए जाना जाता है। करीब 30 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने यहां की यात्रा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 से 3 जुलाई के बीच घाना पहुंचे। इस दौरान उन्होंने घाना की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया और उन्हें राष्ट्रपति नाना अकुफो-आड्डो की ओर से देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भी प्रदान किया गया।
त्रिनिदाद और टोबैगो में प्रधानमंत्री मोदी
3 से 4 जुलाई के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैरिबियन राष्ट्र त्रिनिदाद और टोबैगो का दौरा किया। इस देश की जनसंख्या में 40 से 45 फीसदी लोग भारतीय मूल के हैं, और यहां की राजनीति में भी भारतीय मूल के नेता अहम पदों पर हैं। 1845 से 1917 के बीच अंग्रेज करीब 1.17 लाख भारतीयों को मजदूरी के लिए यहां लाए थे। आज भारतीय मूल के लोग त्रिनिदाद और टोबैगो की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। इस यात्रा का मकसद इन देशों से भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करना है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी पहले भी कैरिबियन देशों की यात्रा कर चुके हैं, और प्रवासी भारतीय कूटनीति उनकी विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है।
अर्जेंटीना यात्रा पर पीएम नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 से 5 जुलाई के बीच लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना के दौरे पर रहेंगे। भारत और अर्जेंटीना के बीच कूटनीतिक संबंधों के साथ-साथ व्यापार, तकनीक और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार गहराता जा रहा है। अर्जेंटीना में भारतीय मूल के सिंधी और पंजाबी समुदाय के लोग भी बसे हुए हैं, जो 1980 के दशक से वहां प्रवास कर रहे हैं।
इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना है। अर्जेंटीना लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का प्रमुख भंडार रखता है, जो भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। खास बात यह है कि 1968 के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली अर्जेंटीना यात्रा है। इससे पहले प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वहां दौरा किया था।
ब्राजील दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 से 7 जुलाई तक ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में रहेंगे, जिसके बाद वे 7 से 8 जुलाई तक ब्रासीलिया की यात्रा करेंगे। इस दौरान वे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, जिसकी मेजबानी इस वर्ष ब्राजील कर रहा है। आगामी वर्ष 2026 में ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता भारत करेगा।
ब्रिक्स बैठक में भागीदारी के अलावा पीएम मोदी ब्राजील में कुछ निजी और द्विपक्षीय कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे। भारत और ब्राजील के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। वर्ष 2024-25 के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार 12.20 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है।
ब्राजील को भारत के बाद G-20 की अध्यक्षता मिली थी और 2023 में हुए दिल्ली शिखर सम्मेलन में ब्राजील ने सक्रिय भागीदारी की थी। पिछले दो वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा चार बार मिल चुके हैं, जो दोनों देशों के बीच संबंधों की गर्मजोशी को दर्शाता है।
भारत और ब्राजील के रिश्ते 77 वर्षों पुराने हैं और ये संबंध रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, जैव ईंधन, तेल और गैस, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन, स्वास्थ्य, आयुर्वेद, तकनीक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे अनेक क्षेत्रों में गहराई लिए हुए हैं। इसी वर्ष भारत सरकार ने ब्राजील के वेदांताचार्य जोनास मसेती को पद्मश्री से सम्मानित कर दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्तों को और प्रगाढ़ किया है।
नामीबिया दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 जुलाई को अफ्रीकी देश नामीबिया की यात्रा पर जाएंगे। यह दौरा ऐतिहासिक है, क्योंकि 1998 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली नामीबिया यात्रा होगी — यानी लगभग 27 साल बाद।
नामीबिया हाल के वर्षों में भारत के लिए चर्चा का विषय तब बना जब सितंबर 2022 में वहां से 8 चीतों को भारत लाकर मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पुनर्वासित किया गया। यह कदम भारत और नामीबिया के बीच वन्यजीव संरक्षण में सहयोग का प्रतीक बना।
इसके अलावा नामीबिया खनिज संसाधनों से भरपूर देश है, और भारत खनन क्षेत्र में वहां की मदद कर रहा है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच डिजिटल शिक्षा, तकनीकी सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को भी विस्तार दिया जाएगा। भारत, नामीबिया को डिजिटल प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में भी सहायता देगा, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध और प्रगाढ़ होंगे।



