एक गड़ेरिया था , वो पहाड़ों में भेड़ बकरियां चराया करता था । और जब उसका भेड़ बकरियां चराई करता था वो पेड़ के निचे बैठ कर भगवान का ध्यान करके उनसे बातें करता था ।
वो बुदबुदाता था , ऐ ईश्वर आप पुरे संसार का पालन पोषण करते हैं हर किसी की समस्या सुनते हैं । इतने बड़े दुनिया में अनेको लोग है सबके पुकार पर आप वहां पहुंच जाते हैं उसकी सुनते हैं उसकी मदद करते हैं ।
ऐसे में आप थक जाते होगे , लाओ मैं आपका पांव दवा दुं । अपना जूतियां निकालिय और मेरे पास बैठ जाईए , ऐ क्या आपके जूतियां तो फट गई है । आपको बहुत भाग दौर करना परता है ना इसलिए आपकी जूतियां फट गई है । लाओ मैं इसे सिल देता हुं ।
लाओ आपके कंबल को धो देता हुं । आपकी दाढ़ी अधिक बढ़ गई है , लाईए आपके दाढ़ी की हजामत बना देता हुं । आपको नहला देता हुं । आपके कपड़े गंदे हो गय है , मैं उसे इस झील में धोकर सुखा देता हुं । आदि आदि ।
वो गड़ेरिया हर रोज पेड़ के निचे बैठ कर नियम से भगवान से ऐसी बातें करता था ।
एक दिन वहां से एक ज्ञानि ध्यानी योगी गुजर रहा था ।
उसके कान में उस गड़ेरिये की बात परी ।
उस ज्ञानी ने उस गड़ेरिये को जम कर डांटना शुरू किया ।
ऐ ये तुम क्या भगवान के बारे में उनसे गलत सलत बातें कर रहा हैं ।
भगवान के जूते क्यों फटेंगे । उनके कंबल में और बालों में जूएं क्यों होगी भला , उनके कपड़े कैसे गंदे होंगे !
तुमको ऐसा नहीं बोलना चाहिए , तुमने अपराध किया है । माफी मांगो भगवान से ।
अभी तुरंत माफी मांगो नहीं तो मैं तुमको अभी श्राप दिए देता हुं ।
यह देख कर वेचारा वो गड़ेरिया डर गया तथा गिरगिराने लगा । अब ऐसी बातें नहीं करूंगा । माफी मांगता हु आपसे ।
उसी समय अचानक भगवान प्रकट हो गये । और उसको ज्ञानी को डांटते हुए कहा ।
यह गड़ेरिया मुझे बड़ा प्रिय है । तुमसे कहीं ज्यादा । तुम स्वयं को बड़ा भक्त और ज्ञानी समझते हो , यही कारण है कि मैंने अभी तक तुमको दर्शन नहीं दिया । लेकिन तुमने मेरे वास्तविक भक्त की उपेक्षा की है । उसको डराया है ।
इसलिए अपने इस भक्त की रक्षा के लिय मुझे अभी प्रकट होना परा ।
यह हर रोज मेरी सेवा करता है । यही एक है जो मेरी चिंता करता रहता है और मुझसे कुछ नहीं मांगता ।
माफी मांगो इससे अभी तुरंत नहीं तो तुम पर मेरा चक्र अभी चल जाएगा ।
वो ज्ञानी जी उस गड़ेरिये के चरणों में लेट गया । और स्वयं को धिक्कारते हुए उससे माफी मांगते हुए उसका शुक्रिया अदा किया कि आज आपके कारण मुझे भी भगवान का दर्शन हो गय । आप धन्य है। बर्षो से आज तक सभी शास्त्रोक्त बिधि से सुंदर सुंदर श्लोकों द्वारा भगवान की स्तुति अर्चना ध्यान योग और प्रार्थना की पर भगवान को रीझा नहीं पाया । और भगवान आपके साधारण शब्दों से रीझ कर आज मुझे भी दर्शन दे दिये । आप धन्य हैं । आपने मेरा भी उद्धार करवा दिया ।
तो इस घटना से यही शिक्षा मिलती है कि हमें हर किसी के भक्ति के तरिके का और सबका सम्मान करना चाहिए ।
भाव और दीनता जरूरी है भक्ति में । वो बड़े बड़े सजाया हुआ भारी भारी शब्दो में की गई स्तुति के तरफ भगवान ध्यान भी नहीं देते कभी ।
सरलता , सीधापन और स्वाभाविक होना जरूरी है । और भगवान के गुणों को गाने में अपने स्वाभाविक शब्द ज्यादा जरूरी है । वो बनावटी और गढ़ा होना नहीं । सरलता और सहजता में सत्यता का बास होता है बनाबट में नहीं ।
बनावटी शब्दों में सिर्फ एक्टींग होता है डायलोग से भगवान नहीं रीझते ।
और एक्टिंग से भगवान कभी नहीं रीझते ।
श्री राधे 🙏🙏🙏






