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हजार वर्षों का संकल्प: कंदारिया महादेव मंदिर की अडिग कथा

यह अकल्पनीय मन्दिर १०० वर्ष नहीं, २०० वर्ष नहीं, और ५०० वर्ष भी नहीं, ये मन्दिर पूरे १००० वर्ष प्राचीन है।

देखिए और कल्पना करिए, १००० वर्ष पहले ये मन्दिर चन्देल राजाओं ने कैसे बनाया होगा….
और आज इतने वर्षों के बाद भी धर्म को लेकर खड़ा है 🙏

“कंदारिया_महादेव” मंदिर मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में खजुराहो ग्राम के समीप ६ किलोमीटर के परिसर का परास लिए ये मंदिर शिव जी के मध्यकालीन मंदिरों में कुछ सबसे भव्य मंदिरों में से एक है।

कहा जाता है कि गुफानुमा आकृति के कारण इसे कंदारिया महादेव मंदिर कहा गया।

सन १०१९ ई. में गजनी से एक बर्बर लुटेरा भारत की संपत्ति से प्रलोभित हो और दीन के विस्तार के लिए काफिरों की हत्या करने के उद्देश्य से पश्चिमोत्तर प्रान्तों को आक्रांत करते हुए जेजाकभुक्ति तक आ पहुँचा। उस समय जेजाकभुक्ति (वर्तमान महोबा, छतरपुर, पन्ना आदि जिले) पर चंदेल राजपूतों की यश-पताका लहरा रही थी। हूणों को पराजित करने वाले यशोवर्मन के कुल के महाराज विद्याधर जेजाकभुक्ति के सरंक्षक थे। भयंकर युद्ध हुआ जिसमें महमूद गजनवी को विवश होकर संधि करना पड़ा।

३ वर्ष पश्चात १०२२ ईस्वी में वो बर्बर लुटेरा महमूद गजनवी पुनः जेजाकभुक्ति पर आक्रमण के लिए आया और इस बार भी उसे मुँह की खानी पड़ी। चन्देलों से पराजित हो उसने पुनः संधि कर लिया।

महाराज विद्याधर ने इस विजय की स्मृति में कंदारिया महादेव मंदिर का निर्माण कराया। जिसके बाह्य भित्तियों पर मैथुनरत मूर्तियाँ हैं तो अंदर त्रिदेव की मूर्तियाँ।

कहा जाता है कि इस मंदिर को मुस्लिम आक्रमणकारियों से बचाने के लिए खजुराहो ग्राम के वासियों ने ग्राम ही छोड़ दिया जिससे मुस्लिम आक्रमणकारियों की दृष्टि इन मंदिरों पर न पड़े।

अँग्रेजों ने स्थानीय लोगों की सहायता से इस मंदिर को ढूँढ निकाला। उसके पहले यहाँ मात्र नाथ सम्प्रदाय के योगी ही आते थे। वर्षों तक निर्जन रहने के कारण यह मंदिर जंगलों से आच्छादित हो गया था।

हम सबका ये जानकर गर्व से सिर ऊँचा हो जाएगा कि औरंगजेब सर्वप्रथम इसी शिवलिंग पर तोप चलाने का आदेश दिया था। परन्तु उसके सारे प्रयत्न के पश्चात भी इस पर खरोंच तक नहीं आया। तभी वह देवता के प्रकोप से डर कर भाग गया।

मंदिर में बलुआ पत्थर लगे हैं जिनकी चमक आज भी विस्मित करती है। पत्थरों को चमकाने के लिए इस पर चमड़े की भारी घिसाई की गई है।

महमूद गजनवी को पराजित करने वाले महाराज विद्याधर और उस जीत की स्मृति में बने इस मंदिर को कदाचित ही अधिक लोग जानते हों।

किसी को अधिक जानकारी हो तो कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं।

लालकिला और ताजमहल के बारे में कितना बताया जाता है किंतु खजुराहो के मंदिरों की नग्न मूर्तियों के अतिरिक्त उसके शिल्प पर कभी बात नहीं होती, समय हो तो कभी यहाँ घूमने के लिए अवश्य ही जायें 😊
#महादेव 🙏
प्रेम झा जी, के पटल से साभार 🙏
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩

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Author: sssrknews

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