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भानु सप्तमी 2026: सूर्य देव की कृपा पाने का दुर्लभ अवसर, जानें महत्व और उपाय

भानु सप्तमी व्रत महत्व आओ जानें

सूर्योदय से 08 जून प्रात: 03:24 तक
रविवार के दिन तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)
रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)
स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।

ज्योतिष परामर्श के लिए सम्पर्क कर सकते हैं।

घातक रोगों से मुक्ति पाने का उपाय
07 जून रविवार को सूर्योदय से 08 जून प्रातः 03:24 तक विजया सप्तमी एवं रविवारी सप्तमी है।
रविवार सप्तमी के दिन बिना नमक का भोजन करें। बड़ दादा के १०८ फेरे लें । सूर्य भगवान का पूजन करें, अर्घ्य दें व भोग दिखाएँ, दान करें । तिल के तेल का दिया सूर्य भगवान को दिखाएँ ये मंत्र बोलें :-
“जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम । तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर ।।”
नोट : घर में कोई बीमार रहता हो या घातक बीमारी हो तो परिवार का सदस्य ये विधि करें तो बीमारी दूर होगी ।
विजया सप्तमी
विजया सप्तमी को किया हुआ स्नान, दान, ध्यान, जप, तप, होम और उपवास – सब कुछ बड़े-बड़े पातकों का नाश करनेवाला है। (ब्रह्म पुराण)
​धर्मशास्त्रों के अनुसार विजया सप्तमी का व्रत रखने और सूर्य देव को अर्घ्य देने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं। यहाँ तक कि अनजाने में किए गए बड़े पापों से भी मुक्ति मिलती है।
भगवान सूर्य को ‘आरोग्य का कारक’ माना गया है। इस दिन व्रत रखने या केवल तांबे के पात्र से सूर्य देव को जल अर्पित करने से गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिलती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा व तेज बढ़ता है।
सरल शब्दों में कहें तो, यह दिन स्वयं भगवान सूर्य नारायण की विशेष कृपा पाने और जीवन की हर कठिनाई पर ‘विजय’ प्राप्त करने का एक दिव्य अवसर है।

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Author: sssrknews

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