Home » Uncategorized » दैनिक पंचांग एवं धर्म विशेष : कुलदेवी की महिमा, हनुमानजी के स्वरूप और कर्म का रहस्य

दैनिक पंचांग एवं धर्म विशेष : कुलदेवी की महिमा, हनुमानजी के स्वरूप और कर्म का रहस्य

Daily panchang,कुलदेवी केवल एक देवी नही बल्कि पूरे वंश की सबसे बड़ी शक्ति कैसे होती है एवं कर्म क्या हैं

दिनांक – 19 मई 2026
⛅दिन – मंगलवार
⛅विक्रम संवत् – 2083
⛅अयन – उत्तरायण
⛅ऋतु – ग्रीष्म
⛅मास – अधिक ज्येष्ठ
⛅पक्ष – शुक्ल
⛅तिथि – तृतीया दोपहर 02:18 तक तत्पश्चात् चतुर्थी
⛅नक्षत्र – मृगशिरा सुबह 08:41 तक तत्पश्चात् आर्द्रा
⛅योग – धृति शाम 05:49 तक तत्पश्चात् शूल
⛅राहुकाल – दोपहर 03:43 से शाम 05:23 तक
⛅सूर्योदय – 05:44
⛅सूर्यास्त – 07:03
⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में

कुलदेवी केवल एक देवी नही बल्कि पूरे वंश की सबसे बड़ी शक्ति कैसे होती है एवं कर्म क्या हैं आओ जानें

कुलदेवी सिर्फ एक साधारण देवी नहीं होतीं, बल्कि वह आपके पूरे कुल की रक्षक, मार्गदर्शक और पालन करने वाली दिव्य शक्ति होती हैं। जिस घर में कुलदेवी की कृपा बनी रहती है, वहां कभी भी धन, सुख, समृद्धि और शांति की कमी नहीं होती। कुलदेवी अपने भक्तों पर हमेशा नज़र रखती हैं और समय-समय पर संकेत देकर जीवन की दिशा भी बदल देती हैं।

हर परिवार की अपनी एक अलग कुलदेवी होती है जो पीढ़ियों से उस वंश की रक्षा करती आ रही हैं। जब आप अपनी कुलदेवी को भूल जाते हैं तो जीवन में रुकावटें, परेशानियां और असफलताएं बढ़ने लगती हैं। लेकिन जैसे ही आप सच्चे मन से अपनी कुलदेवी की पूजा शुरू करते हैं वैसे ही जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखने लगते हैं।

ज्योतिष परामर्श जन्म पत्रिका दिखाने के लिए वास्तुदोष चैक कराने के लिए हमें सम्पर्क कर सकते हैं

जब पति-पत्नी मिलकर कुलदेवी की भक्ति करते हैं तो घर का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। झगड़े खत्म होने लगते हैं, प्रेम बढ़ता है, और घर में सुख-शांति का वास होने लगता है। कुलदेवी की कृपा से संतान सुख, वैवाहिक सुख और धन के नए रास्ते अपने आप खुलने लगते हैं।

कई बार हम बहुत मेहनत करते हैं लेकिन सफलता नहीं मिलती; ऐसे में समझ लेना चाहिए कि कहीं न कहीं हमने अपनी कुलदेवी को नजरअंदाज किया है। कुलदेवी की पूजा दोबारा शुरू करते ही जीवन में चमत्कार होने लगते हैं, रुके हुए काम बनने लगते हैं और किस्मत भी साथ देने लगती है !!

*श्री हनुमानजी के किस स्वरूप
की पूजा से क्या लाभ होता है*

कलियुग में हनुमानजी सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवताओं में से एक हैं। हनुमानजी के अलग-अलग स्वरूपों की कई प्रतिमाएं और चित्र आसानी से देखे जा सकते हैं। शास्त्रों में अनुसार इनके अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने पर अलग-अलग फलों की प्राप्ति होती है। जानिए हनुमानजी के विभिन्न स्वरूप और उनकी पूजा से मिलने वाले शुभ फल

1.भक्त हनुमान

इस स्वरूप में हनुमानजी श्रीराम की भक्ति में लीन दिखाई देते हैं। जो लोग इस स्वरूप की पूजा करते हैं, उन्हें कार्यों में सफलता पाने के लिए एकाग्रता और शक्ति प्राप्त होती है। लक्ष्यों को प्राप्त करने में आ रही परेशानियां दूर हो जाती हैं।

2. सेवक हनुमान

बजरंग बली के इस स्वरूप में हनुमानजी श्रीराम की सेवा में लीन दिखाई देते हैं। इस स्वरूप की पूजा करने पर भक्त के मन में कार्य और रिश्तों के प्रति सेवा और समर्पण की भावना जागृत होती है। व्यक्ति को परिवार और कार्य स्थल पर सभी बड़े लोगों का विशेष स्नेह प्राप्त होता है।

3. वीर हनुमान

वीर हनुमान स्वरूप में साहस, बल, पराक्रम व आत्मविश्वास दिखाई देता है। हनुमानजी अपने साहस और पराक्रम से कई राक्षसों को नष्ट किया और श्रीराम के काज संवारें। वीर हनुमान की पूजा से भक्त को भी साहस की प्राप्ति होती है।

4. सूर्यमुखी हनुमान

सूर्य देव हनुमानजी के गुरु हैं। सूर्य पूर्व दिशा से उदय होता है। सूर्य और सूर्य का प्रकाश, गति और ज्ञान के भी प्रतीक हैं। जिस तस्वीर में हनुमानजी सूर्य की उपासना कर रहे हैं या सूर्य की ओर देख रहे हैं, उस स्वरूप की पूजा करने पर भक्त को भी ज्ञान और कार्यों में गति प्राप्त होती है। सूर्यमुखी हनुमान की पूजा से विद्या, प्रसिद्धि, उन्नति और मान-सम्मान प्राप्त होता है।

5. दक्षिणामुखी हनुमान

हनुमानजी की वह प्रतिमा जिसका मुख दक्षिण दिशा की ओर होता है, वह हनुमानजी का दक्षिणमुखी स्वरूप है। दक्षिण दिशा काल यानी यमराज (मृत्यु के देवता) की दिशा मानी जाती है। हनुमानजी रुद्र (शिवजी) अवतार माने जाते हैं, जो काल के नियंत्रक हैं। इसलिए दक्षिणामुखी हनुमान की पूजा करने पर मृत्यु भय और चिंताएं समाप्त होती हैं।

6.उत्तरामुखी हनुमान

देवी-देवताओं की दिशा उत्तर मानी गई है। इसी दिशा में सभी देवी-देवताओं का वास है। हनुमानजी की जिस प्रतिमा का मुख उत्तर दिशा की ओर है, वह हनुमानजी का उत्तरामुखी स्वरूप है। इस स्वरूप की पूजा करने पर सभी देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त होती है। घर-परिवार में शुभ और मंगल वातावरण रहता है।

मंत्र जप व शुभ संकल्प की सिद्धि के लिए विशेष योग
मंगलवारी चतुर्थी को किये गए जप-संकल्प, मौन व यज्ञ का फल अक्षय होता है ।
मंगलवार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना … जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है…

मंगलवारी चतुर्थी
अंगार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना …जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है…
बिना नमक का भोजन करें
मंगल देव का मानसिक आह्वान करो
चन्द्रमा में गणपति की भावना करके अर्घ्य दें
कितना भी कर्ज़दार हो ..काम धंधे से बेरोजगार हो ..रोज़ी रोटी तो मिलेगी और कर्जे से छुटकारा मिलेगा |

मंगलवार चतुर्थी
भारतीय समय के अनुसार 19 मई 2026 को (दोपहर 02:18 से 20 मई सूर्योदय तक) चतुर्थी है, इस महा योग पर अगर मंगल ग्रह देव के 21 नामों से सुमिरन करें और धरती पर अर्घ्य देकर प्रार्थना करें, शुभ संकल्प करें तो आप सकल ऋण से मुक्त हो सकते हैं..
मंगल देव के 21 नाम इस प्रकार हैं :-
1) ॐ मंगलाय नमः
2) ॐ भूमि पुत्राय नमः
3 ) ॐ ऋण हर्त्रे नमः
4) ॐ धन प्रदाय नमः
5 ) ॐ स्थिर आसनाय नमः
6) ॐ महा कायाय नमः
7) ॐ सर्व कामार्थ साधकाय नमः
8) ॐ लोहिताय नमः
9) ॐ लोहिताक्षाय नमः
10) ॐ साम गानाम कृपा करे नमः
11) ॐ धरात्मजाय नमः
12) ॐ भुजाय नमः
13) ॐ भौमाय नमः
14) ॐ भुमिजाय नमः
15) ॐ भूमि नन्दनाय नमः
16) ॐ अंगारकाय नमः
17) ॐ यमाय नमः
18) ॐ सर्व रोग प्रहाराकाय नमः
19) ॐ वृष्टि कर्ते नमः
20) ॐ वृष्टि हराते नमः
21) ॐ सर्व कामा फल प्रदाय नमः
ये 21 मन्त्र से भगवान मंगल देव को नमन करें ..फिर धरती पर अर्घ्य देना चाहिए..अर्घ्य देते समय ये मन्त्र बोले :-
भूमि पुत्रो महा तेजा
कुमारो रक्त वस्त्र का
ग्रहणअर्घ्यं मया दत्तम
ऋणम शांतिम प्रयाक्ष्मे
हे भूमि पुत्र!..महा क्यातेजस्वी,रक्त वस्त्र धारण करने वाले देव मेरा अर्घ्य स्वीकार करो और मुझे ऋण से शांति प्राप्त कराओ

कर्म के प्रकार
भारतीय दर्शन में कर्म का सिद्धांत बहुत गहरा है। “जैसा बोओगे वैसा काटोगे” – पर कर्म सिर्फ एक तरह का नहीं होता।
मुख्य 3 प्रकार – काल के आधार पर
1. संचित कर्म – Storehouse of Karma
क्या है: पिछले अनगिनत जन्मों के सारे कर्मों का जमा हुआ भंडार।
उदाहरण: बैंक में जमा FD की तरह। अभी नहीं भोग रहे, पर खाते में पड़ा है।
नाश कैसे हो: ज्ञान, भक्ति, गुरु कृपा से ही नष्ट होता है।
2. प्रारब्ध कर्म – Destiny Karma
क्या है: संचित में से जो हिस्सा इस जन्म में भोगने के लिए निकल आया है।
उदाहरण: थाली में परोसा हुआ खाना – अब खाना ही पड़ेगा। शरीर, परिवार, सुख-दुख जो मिला है वो प्रारब्ध है।
खास बात: इसे भोगना ही पड़ता है। “प्रारब्ध पहले रचा, पीछे रचा शरीर”। बड़े-बड़े योगी भी इसे भोगते हैं।
3. क्रियमाण/आगामी कर्म – Present/Future Karma
क्या है: इस जन्म में जो नए कर्म अभी कर रहे हैं।
उदाहरण: आज जो बोओगे, वो भविष्य का संचित बनेगा।
खास बात: इसी पर हमारा नियंत्रण है। यहीं से भाग्य बदला जा सकता है।
सरल सूत्र: संचित = गोदाम, प्रारब्ध = दुकान का माल, क्रियमाण = नई फसल—
दूसरे वर्गीकरण – उद्देश्य के आधार पर
1. नित्य कर्म
रोज करने योग्य। न करने से पाप।
उदाहरण: संध्या, पूजा, शौच-स्नान, माता-पिता की सेवा
2. नैमित्तिक कर्म
किसी विशेष कारण/अवसर पर।
उदाहरण: श्राद्ध, ग्रहण स्नान, तीर्थ यात्रा
3. काम्य कर्म
किसी इच्छा से किए गए।
उदाहरण: पुत्र के लिए यज्ञ, नौकरी के लिए व्रत
फल: इच्छा पूरी हो तो भोगना पड़ता है, फिर जन्म लेना पड़ता है
4. निषिद्ध कर्म
शास्त्र में मना किए गए।
उदाहरण: हिंसा, चोरी, झूठ, व्यभिचार
फल: दुख, नरक, नीच योनि
5. प्रायश्चित कर्म
पाप का नाश करने वाले।
उदाहरण: गंगा स्नान, जप, दान, उपवास—
गीता के अनुसार – गुण के आधार पर
1. सात्विक कर्म
फल की इच्छा बिना, शास्त्र-सम्मत, राग-द्वेष रहित।
फल: शांति, मोक्ष की ओर ले जाता है
2. राजसिक कर्म
भोग-इच्छा से, अहंकार से, बहुत परिश्रम से किया गया।
फल: सुख-दुख, बार-बार जन्म
3. तामसिक कर्म
बिना सोचे-समझे, हठ से, दूसरों को कष्ट देकर किया गया।
फल: अज्ञान, अधोगति
सबसे जरूरी बात – कर्म से मुक्ति कैसे?
गीता का सूत्र: “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”
कर्म करो पर फल की इच्छा छोड़ दो। जब “मैं” कर्ता नहीं रहता, तो कर्म बंधन नहीं बनता। इसे निष्काम कर्म योग कहते हैं

sssrknews
Author: sssrknews

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

Leave a Comment

Share This