Daily panchang,सूरदास जयंती व्रत कथा महत्व पूजा विधि एवं ऋण मुक्ति और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु प्रामाणिक सरल उपाय
⛅दिनांक – 21 अप्रैल 2026
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सूरदास जयंती व्रत कथा महत्व पूजा विधि एवं ऋण मुक्ति और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु प्रामाणिक सरल उपाय आओ जानें
भारत में जन्मे महान कवि और संत सूरदास अपने साहित्यिक कार्यों और ग्रंथों के लिए प्रसिद्ध हैं। सूरदास भगवान कृष्ण के एक कट्टर भक्त थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन अपने देवता की पूजा, लेखन और गायन के लिए समर्पित कर दिया। वे अंधे पैदा हुए थे, जैसा कि उनके नाम से पता चलता है, ‘सूर’, जिसका अर्थ है ‘सूर्य का सेवक’।
उनके अंधेपन के कारण उनके परिवार वाले उनसे प्यार नहीं करते थे और उनकी उपेक्षा करते थे, इसलिए उन्होंने 6 साल की छोटी उम्र में ही अपना घर छोड़ दिया। कुछ समय बाद उन्हें श्री वल्लभाचार्य से मिलने का मौका मिला और सूरदास जल्द ही उनके शिष्य बन गए। वल्लभाचार्य ने सूरदास को भगवान कृष्ण की पूजा करने के लिए प्रेरित किया।
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सूरदास जयंती क्यों मनाते हैं?
हम महान संत का सम्मान करने और उनकी विरासत को जीवित रखने के लिए सूरदास जयंती मनाई जाती है। सूरदास ने सादगी और दिव्यता के सिद्धांत का पालन किया। इसके अलावा, भक्ति आंदोलन में उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कृष्ण के प्रति उनका अटूट प्रेम भगवान के साथ उनके गहरे संबंध को दर्शाता है, यही वजह है कि लोग उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। इसके अलावा, सूरदास की प्रसिद्ध पुस्तक ‘ सूर सागर ‘ में भगवान कृष्ण के भजन हैं जिन्हें कई मंदिरों और घरों में गाया जाता है।
सूरदास और भगवान कृष्ण के प्रति उनका दृष्टिकोण
एक दिन सूरदास की कृष्ण भक्ति पर संदेह करने वाले लोगों के एक समूह ने उनकी निष्ठा की परीक्षा लेने का फैसला किया। उन्होंने उन्हें एक धार्मिक सभा में आमंत्रित किया और उनसे कृष्ण के बारे में अपनी समझ साबित करने के लिए कहा। हालाँकि, सूरदास ने इसके विपरीत कहा कि वह कृष्ण को शारीरिक रूप से नहीं देख सकते, लेकिन आध्यात्मिक रूप से उनकी उपस्थिति महसूस कर सकते हैं।
इसलिए, परीक्षण के लिए, उन्होंने कृष्ण की एक मूर्ति रखी और सूरदास से उसका वर्णन करने को कहा। सभी को आश्चर्य हुआ जब मूर्ति से अनजान सूरदास ने ब्रज में कृष्ण की मनमोहक सुंदरता और चंचलता के बारे में गाना शुरू कर दिया।
इस घटना से सभी लोग स्तब्ध रह गए और तभी से सूरदास को कृष्ण का महान भक्त माना जाने लगा। कृष्ण के प्रति उनकी दृष्टि बेजोड़ और हृदय से निकली थी।
सूरदास जयंती के लिए अनुष्ठान
सूरदास जयंती के दिन की रस्में इस प्रकार हैं:
पूजा स्थल को गंगाजल या स्वच्छ जल से साफ और शुद्ध करके इसकी शुरुआत की जा सकती है।
सूरदास और भगवान कृष्ण की फोटो फ्रेम या मूर्ति को पवित्र मेज पर रखें।
आध्यात्मिक माहौल बनाने के लिए दीपक, अगरबत्ती या धूपबत्ती जलाकर पूजा शुरू करें।
कृतज्ञता और सम्मान दिखाने के लिए मूर्ति या तस्वीर पर ताजे फूल और पवित्र पत्ते चढ़ाएं।
शुद्ध मन से मूर्ति या फोटो पर फल या मिठाई चढ़ाएं।
गहन प्रेम और भक्ति व्यक्त करने के लिए सूरदास के कुछ प्रसिद्ध भजन गाएँ।
ज्ञान और प्रार्थना के प्रतीक के रूप में घी के दीपक से आरती करें।
इसके अलावा, प्रेम, निस्वार्थता और सादगी पर सूरदास के उपदेशों के प्रति कृतज्ञता दिखाने के लिए कुछ मिनटों के लिए ध्यान में बैठें।
भगवान को धन्यवाद देकर पूजा समाप्त करें और फिर परिवार और दोस्तों को प्रसाद वितरित करें।
कोई भी व्यक्ति पूरे दिन या आंशिक उपवास रख सकता है और केवल सात्विक भोजन ग्रहण कर सकता है।
जप करने योग्य मंत्र
सूरदास जयंती पर कृष्ण के सार को महसूस करने और संत सूरदास को याद करने के लिए इस शक्तिशाली मंत्र का जाप किया जा सकता है:-
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
‘हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम’
अर्थ – यह तीन सर्वोच्च नामों, ‘हरि’, ‘कृष्ण’ और ‘राम’ के संयोजन वाला एक महामंत्र है। इसके अतिरिक्त, कोई भी व्यक्ति इसका जाप करके भगवान से दिव्य आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।
लाभ – इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति शक्तिशाली बनता है तथा भगवान कृष्ण और सूरदास में दिव्यता जागृत होती है।
क्या करे
जरूरतमंदों को शुद्ध मन से दान या दान दें।
सूरदास को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए कुछ मिनट ध्यान करें।
इसके अतिरिक्त, कोई व्यक्ति पूर्ण उपवास या आंशिक उपवास रख सकता है और सात्विक भोजन खा सकता है।
क्या न करें
शराब का सेवन न करें।
इसके अलावा, मांसाहारी भोजन न खाएं।
किसी का अनादर या उपहास न करें।
मंगल ग्रह को प्रसन्न करने के लिए मूंगा रत्न पहनने के 15 चमत्कारी फायदे
मूंगा रत्न स्वयं किसी चमत्कार से कम नहीं है, यह एक जैविक रत्न है, जो विभिन्न जीवो के द्वारा समुद्र के गर्भ में इसका निर्माण होता है, यह देखने में रक्त के समान लाल रंग का होता है तथा इसमें प्राकृतिक रूप से विद्यमान अनेक प्रकार की सफेद रेखाएं मौजूद होती है, जो इसे और अधिक अद्भुत बनाती हैं, मूंगा रत्न पूरी दुनिया में सबसे उत्तम गुणवत्ता वाला इटली का माना जाता है इसीलिए इटालियन मूंगा रत्न लोगों में काफी लोकप्रिय है, इसके विशिष्ट गुणों के वजह से इसके लाभ भी बहुत अधिक प्राप्त होते हैं।
मूंगा रत्न मंगल ग्रह से संबंधित एक रत्न होता है तथा विविध प्रकार की चीजें जैसे- प्रशासनिक विभाग, सेना, पुलिस , मकान या निर्माण, हथियार आदि का नेतृत्व मंगल ग्रह के द्वारा किया जाता है, मंगल ग्रह अग्नि तत्व को निरूपित करता है, इसी वजह से हमारे अंदर ऊर्जा का कारक मंगल ग्रह को माना जाता है।
नौ ग्रहों में मंगल ग्रह को सेनापति की उपाधि से अलंकृत किया जाता है, सेनापति जिसके बिना अनुमति के कोई भी किसी राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता है सूर्य नौ ग्रहों के राजा है और मंगल सेनापति इसलिए राजा सूर्य तथा सेनापति मंगल की युक्ति जातक को हमेशा अद्भुत लाभ प्रदान करते हैैैै।
मूंगा रत्न को धारण करने से किसी भी जातक के जीवन में निम्नलिखित चमत्कार हो सकते हैं –
* मूंगा रत्न मंगल ग्रह को निरूपित करता है इसकी वजह से जिस भी जातक के द्वारा इस रत्न को धारण किया जाता है, उसके जीवन में आलस्य जैसी समस्या को यह रत्न दूर कर उसे ऊर्जावान बनाता है एवं उसे अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान बनाता है।
* मूंगा रत्न का उपयोग छोटे बच्चों के सुरक्षा घेरा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए किया जाता है, छोटे बच्चे को मूंगा रत्न को सोना चांदी या तांबा में जड़वा कर पहनाया जाता है, जिससे उस पर ऊपरी शक्तियां हावी नहीं होती है या ऊपरी शक्तियां बच्चे के आभामंडल को दूषित नहीं कर पाती हैं, बच्चे के ऊपर टोना टोटका जादू नजर दोष आदि चीजें विफल हो जाती हैं, यह रत्न ऐसी चीजों का दुष्प्रभाव पूरी तरह नष्ट करने की क्षमता रखता है।
* मूंगा रत्न धारण करने से जातक दृढ़ निश्चय दृढ़ संकल्पित व्यक्तित्व वाला व्यक्ति बनता है, जिससे उसके लक्ष्य को बाधित करने वाले कितने भी विघ्न या बाधा क्यों नहीं आते, फिर भी जातक का दृढ़ संकल्प एवं दृढ़ निश्चय स्वभाव को बदलने में सक्षम नहीं हो पाते हैं तथा जातक परिस्थितियों से जूझते हुए अपने स्वर्णिम लक्ष्य को प्राप्त करने की संभावना को बहुत अधिक बढ़ा देता है।
* बहुत से ऐसे लोग होते हैं जिनमें आलस्य जैसी चीज उनका जीवन पूरा बर्बाद कर देती है, आलस्य होने की वजह से उनमें व्याप्त अविश्वसनीय गुण भी बेकार हो जाता है क्योंकि सही समय पर अपने गुणों का उपयोग करने की जगह जातक आलस्य प्रवृत्ति होने की वजह से अपने कार्यों को पूरी तरह से टालता रहता है, जिसके दुष्प्रभाव के कारण वह जिस भी क्षेत्र से संबंधित होता है उसमें उसे हानि ही होती है, उसके कार्य का दिनोंदिन क्षरण होता चला जाता है, ऐसे में यह रत्न ऐसे लोगों के लिए किसी चमत्कार या किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि यह उनकी संरचना को सुधारने में बहुत मदद करता है तथा आलस्य जैसी बीमारी को दूर करने में बहुत कारगर होता है एवं जातक का पूरा ध्यान उसके कार्यों की ओर केंद्रित करता है जिससे जातक अपने अविश्वसनीय कौशलों का उपयोग अपने कार्यों को पूर्ण करने में लगाता है।
* रक्त से संबंधित विकार हो या मिर्गी जैसी बीमारी हो या पीलिया जैसे रोग इन सभी रोगों में यह रत्न चमत्कारिक रूप से अपना असर दिखाता है तथा जातक को अप्रतिम रूप से स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।
* मूंगा रत्न हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाता है, इसके साथ-साथ हमारे मन में व्याप्त किसी भी प्रकार का भय को यह पूरी तरह से नष्ट कर देता है, यह हमारे अंदर के नकारात्मकता को दूर करता है, जिससे हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचरण होने लगता है एवं हम अपने कार्यों का निर्वहन बहुत ही अच्छे तरीके से कर पाते हैं।
* मूंगा रत्न को धारण करने से जातक के अंदर अद्भुत नेतृत्व क्षमता का विकास होता है, जिससे जीवन में आने वाली विभिन्न प्रकार की विषम परिस्थितियों में भी जातक अचल रहता है, उसका निडर व्यक्तित्व का गुण विषम परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देते हैं।
* इस रत्न के चमत्कार के कारण किसी ऐसी महिला जो गर्भ धारण करना चाहती है एवं चाहती है कि उसके गर्भ का पात ना हो तो ऐसी परिस्थिति में उसे गर्भ के शुरुआती कुछ महीनों में यह रत्न अवश्य धारण करना चाहिएl यह रत्न उसके गर्व की सुरक्षा करने में बहुत कारगर सिद्ध होता है।
* हमारे पूर्वजों के द्वारा मूंगा रत्न का उपयोग विभिन्न प्रकार के विषधर के विष को कम करने के लिए उपयोग में लाया जाता था, जब कभी किसी को कोई विषधर काट लेता तो ऐसी परिस्थिति में इस रत्न को उक्त जगह पर रगड़ने से विष का प्रभाव बहुत हद तक कम हो जाता था, आज भी यह पद्धति बहुत से सुदूर इलाकों में उपयोग में लाया जाता है किंतु विस्तृत ज्ञान के अभाव में यह पद्धति लोगों में अधिक प्रचलित नहीं है।
* प्रशासनिक विभाग में ऊंचे पद पर प्रतिष्ठित होने के लिए मंगल ग्रह का बहुत मजबूत होना आवश्यक होता है यह रत्न मंगल ग्रह के अनुकूल प्रभाव को और अधिक मजबूत एवं प्रभावशाली बनाता है इसलिए प्रशासनिक विभाग के लोगों के द्वारा मूंगा रत्न धारण किए जाने पर उन्हें अप्रतिम लाभ प्राप्त होता है।
* मंगल ग्रह की भौतिक ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए भी इस रकम का उपयोग लोगों के द्वारा किया जाता है।
* मंगल ग्रह के द्वारा विभिन्न प्रकार के ग्रहों के साथ मिलकर बनाए गए अन्य अशुभ योग में भी मूंगा रत्न बहुत कारगर सिद्ध होता है, जैसे- मांगलिक योग में भी इस रत्न का बहुत अधिक गहरा प्रभाव पड़ता है, वैवाहिक जीवन में स्थिरता लाने के लिए भी यह रत्न धारण किया जाता है दांपत्य जीवन खुशियों से भरा रहे इसलिए भी यह रत्न धारण किया जाता है, इस रत्न के प्रभाव से किसी भी जातक के दांपत्य जीवन के विभिन्न कष्ट दूर होते हैं एवं सुख समृद्धि कावास उनके घर में आसीन होता है।
ऋण से मुक्ति और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु प्रामाणिक एवं सरल उपाय
चींटियों की सेवा करना और उन्हें भोजन देना (जिसे ‘चींटी चुगा’ या ‘कसीर’ भी कहा जाता है) भारतीय परंपरा में बहुत पुण्य का काम माना जाता है। आटा और चीनी से इसे तैयार करने की सबसे सरल और सही विधि नीचे दी गई है:
चींटी चुगा तैयार करने की विधि
1. सामग्री:
गेहूं का आटा:
1 कप।
चीनी या बुरा (पिसी हुई चीनी):
आधा कप (आप गुड़ के पाउडर का भी उपयोग कर सकते हैं)।
देसी घी:
1 से 2 बड़े चम्मच (यह चींटियों के लिए बहुत पौष्टिक होता है और खुशबू से उन्हें आकर्षित करता है)।
सूखा नारियल (कद्दूकस किया हुआ):
2 चम्मच (वैकल्पिक, सेवा के फल को बढ़ाने के लिए)।
2. बनाने का तरीका:
आटा भूनें:
एक कड़ाही में थोड़ा सा घी डालें और गेहूं के आटे को धीमी आंच पर हल्का भूरा होने तक भूनें। भूनने से आटे में नमी खत्म हो जाती है और यह खराब नहीं होता।
ठंडा करें:
जब आटे से सोंधी खुशबू आने लगे, तो गैस बंद कर दें और आटे को पूरी तरह ठंडा होने दें।
चीनी मिलाएं:
आटे के ठंडा होने के बाद इसमें चीनी या बुरा मिलाएं। (ध्यान रहे: गरम आटे में चीनी डालने से वह पिघल कर चिपक सकती है, इसलिए ठंडा होना जरूरी है)।
नारियल डालें:
अंत में कद्दूकस किया हुआ नारियल मिला दें।
सेवा करने का सही तरीका (कहाँ और कैसे डालें?)
पेड़ों की जड़ें: पीपल, बरगद या शमी के पेड़ के पास जहाँ चींटियों के बिल (बांबी) हों, वहां इसे डालें।
समय: –
गर्मियों में सुबह जल्दी (सूरज निकलने से पहले) या शाम को सूर्यास्त के बाद डालना सबसे अच्छा है, क्योंकि इस समय चींटियाँ बाहर निकलती हैं।
मात्रा: –
एक ही जगह ढेर न लगाएं, बल्कि बिल के आसपास थोड़ा-थोड़ा बिखेर दें।
सावधानी: –
इसे घर के अंदर डालने से बचें, वरना घर में चींटियाँ बढ़ सकती हैं।
इसे हमेशा खुले मैदान या सार्वजनिक पेड़ों के पास ही डालें।
सेवा का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, चींटियों को आटा और चीनी खिलाने से –
ग्रह दोष (विशेषकर राहु और शनि)
शांत होते हैं और कर्ज से मुक्ति मिलती है। आपकी यह निस्वार्थ सेवा उन छोटे जीवों के लिए गर्मियों में जीवनदान साबित होगी।
आप यह सेवा कल से भी शुरू कर सकते हो, इसमें कोई मुहूर्त की जरूरत नहीं होती है! साथ में गौसेवा के लिए अगर चारे का प्रबंध हो जाए🎋 हर सभी समस्या कितना भी विकट समस्या हो दूर होती है🎋 जय श्री कृष्णा 🌹🙏
आदरणीय – मेरा निवेदन है जहां भी करें रोजाना करें,कोई भी दिन नहीं छूटना चाहिए़ चीटियाँ आपका इंतजार करती हैं फिर भूखी रहती हैं
🎋 यह सेवा करने के बाद में ही खाना खाए🎋 आपकी जो भी मनोकामना है, जरूर पूरी होगी🌿
(((((जय श्री कृष्णा)))))






