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नोटबंदी, एनपीए और मोदी सरकार: आर्थिक संकट से उबरने की कहानी या सियासी बहस?

आप कहाँ-कहाँ गड्ढे खोदकर गये हो जी ??
अब समझ में आ रही है नोट बंदी ???
कांग्रेस के अर्थशास्त्री PM मनमोहन सिंह जी ने बैंकों के एनपीए 37% बताये थे, जो वस्तुतः 82% थे !
कितना बड़ा झूठ ….
बैंकें डूबने की कगार पर थीं …
कुल एनपीए था 56 लाख करोड़ रुपये …
कल्पना कीजिये जब ये सच्चाई नव नियुक्त पीएम के सामने आयी होगी तो उन पर क्या बीती होगी, अगर बैंकें फेल हो जातीं तो देश किस हालत में होता ? …
आर्थिक अराजकता सामाजिक अराजकता में बदल चुकी होती, देश भयंकर संकटों में घिर चुका होता …
नया पीएम उसकी भेंट चढ़ गया होता और आंकड़ों की भूलभुलैया में यही विपक्ष अपने पाप को मोदी के सर मढ रहा होता …

नोटबंदी ने इस दुष्चक्र से बाहर निकाल दिया ….
बैंकों के पास तत्काल ढ़ेर सारा कैश आ गया !
फिर बैंक डिफाल्टरो पर नकेल कसने का काम शुरू हुआ और हजारों, लाखों करोड़ की संपत्तियां जब्त हुई !

लोग मोदी से तमाम मुद्दों पर क्षुब्ध रहते हैं, उन्हें अंदाजा ही नहीं है कि देश कितना खोखला कर दिया गया था ।
डिफेंस आतंरिक सुरक्षा विदेशनीति ,आर्थिक अव्यवस्था , सामाजिक विग्रह, आस्तीन के सांप इन सबसे एक साथ निपटना बहुत दुष्कर, विवेकपूर्ण और राजनैतिक इच्छाशक्ति का काम है !

हम मोदी शासन के कारण देशद्रोहियों की गहरी जड़ों को कुछ कुछ देख पा रहे हैं, मिडिया शिक्षा संस्थान, न्यायपालिका सब जगह आज भी विषधर बैठे हुए हैं ….
इन सबके बीच अपने को सुरक्षित रखते हुए देश को सुरक्षित करने का काम मोदी जी कर रहे हैं …
हमें पूरा विश्वास है कि मोदी हमारी आशाओं आकांक्षाओं को निश्चित ही पूरा करेंगे …
ये दौर इन विषधरों के दांत तोड़ने का है !

मोदी को हमारे सार्थक समर्थन की आवश्यकता है,
धैर्य के साथ मोदी के साथ खड़े होने की आवश्यकता है,
अधैर्य से हम मोदी को ही नहीं खोएंगे, अपितु उन्ही दरिंदों के हाथों में देश और अपनी संतानों के भविष्य को सौंप देंगे
सत्ता की ताक में बैठे बहेलिये यही चाहते हैं और हमें गुमराह कर रहे हैं ! दुश्मन जो चाहता है अगर वैसा ही करेंगे, तो पराजय और दुर्भाग्य तो निश्चित है …..

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Author: sssrknews

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