पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती, सरकार का बड़ा फैसला
सरकार ने आम जनता को राहत देते हुए शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में ₹10 प्रति लीटर की बड़ी कटौती का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर ₹3 प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह शून्य कर दिया गया है।
यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच लिया गया है, जो अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण और गहरा गया है। खासतौर पर ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा डालने से कच्चे तेल की आपूर्ति पर असर पड़ा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल और गैस सप्लाई का करीब 20% हिस्सा गुजरता है। प्रतिदिन लगभग 20 से 25 मिलियन बैरल तेल इसी रास्ते से ट्रांसपोर्ट होता है।
भारत के लिए भी यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। युद्ध से पहले देश अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 12-15% हिस्सा इसी रूट से आने वाले तेल से पूरा करता था। एक अनुमान के मुताबिक, भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 40-50% (करीब 2.2 से 2.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन) ऐतिहासिक रूप से इसी रास्ते से आता रहा है।
सरकार का फैसला और बयान
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस फैसले को आम नागरिकों के हित में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिसका सीधा असर ईंधन की कीमतों पर पड़ा है।
पुरी के अनुसार, सरकार के सामने दो विकल्प थे—या तो अन्य देशों की तरह जनता पर बोझ डाला जाए या फिर खुद वित्तीय दबाव झेलकर नागरिकों को राहत दी जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरा विकल्प चुना, जिससे आम लोगों को बढ़ती कीमतों से बचाया जा सके।
सरकार ने तेल कंपनियों के नुकसान को कम करने और घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निर्यात कर (Export Tax) भी लगाया है, ताकि रिफाइनरियां विदेशी बाजार में ईंधन भेजने के बजाय घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दें।
एक्साइज ड्यूटी में बदलाव का असर
पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बदलाव का सीधा असर उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ता है।
- ड्यूटी बढ़ने पर: ईंधन महंगा होता है, जिससे महंगाई बढ़ती है और जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
- ड्यूटी घटने पर: ईंधन सस्ता होता है, जिससे आम लोगों को राहत मिलती है और महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलती है।
यह टैक्स सरकार के प्रमुख राजस्व स्रोतों में से एक है, जिसका उपयोग इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा और कल्याणकारी योजनाओं में किया जाता है।
संक्षेप में असर:
- ईंधन कीमत: घटने की संभावना
- महंगाई: कम हो सकती है
- सरकारी राजस्व: घटेगा
- आम जनता की बचत: बढ़ेगी




