Home » ताजा खबर » “शून्य से शिखर तक: बीजेपी के 45 साल का ऐतिहासिक सफर”

“शून्य से शिखर तक: बीजेपी के 45 साल का ऐतिहासिक सफर”

दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बीजेपी के लिए आज सबसे बड़ा दिन है. असल में आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) का स्थापना दिवस है. आज ही के दिन 6 अप्रैल 1980 को बीजेपी की स्थापना हुई थी.
शून्य से शुरू हुई यह पार्टी आज देश में छाई हुई है और केंद्र समेत अधिकतर राज्यों में इसकी सरकारें हैं. लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि बीजेपी की यह शुरुआत बेहद साधारण परिस्थितियों में हुई थी.

1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बनाया जनसंघ

बीजेपी को समझने से पहले हमें उसकी जड़ों के बारे में जानना होगा, तभी हम दुनिया के इस सबसे बड़े दल के बारे में विस्तार से जान सकते हैं. राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, बीजेपी की जड़ें भारतीय जनसंघ से जुड़ी हैं. इस राजनीतिक संगठन की स्थापना 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी. यह दल 1977 तक जनता के बीच काम करता रहा और चुनाव लड़ता रहा. वर्ष 1975 में जब इंदिरा गांधी सरकार ने आपातकाल लगाया तो उसके खिलाफ जनसंघ ने बाकी दलों के साथ मिलकर जनता पार्टी का गठन किया. हालांकि, वैचारिक मतभेदों के चलते 1980 में यह पार्टी टूट गई और उसके बाद जनसंघ एक नए संगठन बीजेपी के रूप में सामने आया.

राजनीति से जुड़े लोग बताते हैं कि अपने शुरुआती दौर में बीजेपी को काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा. पार्टी ने 1984 में अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उसमें उसे करारी हार झेलनी पड़ी. उस इलेक्शन में बीजेपी को महज 2 सीटें मिलीं, जो इसके लिए बड़ा झटका था. इसके बावजूद, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व वाली बीजेपी ने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे देशभर में संगठन का विस्तार करना शुरू कर दिया.

1990 के दशक में आया टर्निंग प्वाइंट

इसके बाद 1990 का दशक आता है. यह दशक बीजेपी के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में बीजेपी ने कई राज्यों में रथ यात्रा निकाली. साथ ही, राम मंदिर आंदोलन तेज किया. इन दोनों आंदोलनों ने देशभर में पार्टी के प्रति जनसमर्थन पैदा किया. उसकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 1996 में बीजेपी पहली बार केंद्र में सबसे बड़ी पार्टी बन गई लेकिन अपनी सरकार नहीं बना पाई. तीन साल बाद अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी गठबंधन सरकार बनाने में कामयाब रही.

यह सरकार 1999-2004 तक चली. इस दौरान देश ने कारगिल में पाकिस्तान को धूल चटाई. परमाणु परीक्षण करके देश को वैश्विक महाशक्ति बनाने का काम किया. अटल सरकार ने देश में सड़कों, पुलों और रेलवे का ढांचा भी तेजी से सुधारने का काम किया.

काम के बावजूद 2004 का चुनाव हार गई पार्टी

इन बेहतरीन कामों के बावजूद बीजेपी 2004 का लोकसभा चुनाव हार गई और अगले 10 साल तक सत्ता से दूर रही. हालांकि, विपक्ष में रहते हुए भी वह मुखर बनी रही और विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरकर जनता में उसके खिलाफ जनमत तैयार किया. उसने देशभर में अपने संगठन को और मजबूत करने पर भी ध्यान दिया.

इसके बाद 2014 को वो ऐतिहासिक वर्ष आया, जब नरेंद्र मोदी एक आंधी की तरह केंद्रीय राजनीति में उभरे. उनके नेतृत्व में लड़े गए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बंपर जीत हासिल की और पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में आई. इसके बाद 2019 में भी पार्टी ने फिर से बड़ी जीत हासिल कर अपनी सरकार बनाई.

शून्य से शिखर तक का तय किया सफर

अब 2024 में लगातार तीसरी बार जीत हासिल करके BJP सत्ता में हैं. हालांकि इस बार पार्टी बहुमत से दूर रह गई और उसे जेडीयू, टीडीपी के साथ सत्ता बांटनी पड़ी है. इसके बावजूद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी न केवल राज्यों में अपनी सत्ता मजबूत कर रही है, बल्कि जनाधार भी बढ़ा रही है.

शून्य से शिखर तक का यह सफर बीजेपी के लिए केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण अध्याय भी है. इसने देश की राजनीति की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित किया है. उसे यहां तक पहुंचाने में संगठनात्मक मजबूती, स्पष्ट विचारधारा और प्रभावी नेतृत्व अहम कारक बन गए हैं.

sssrknews
Author: sssrknews

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

Leave a Comment

Share This