यूजीसी के कारण भाजपा को जो क्षति हुई, उसकी भरपाई कांग्रेस ने कर दी…
2014 में नरेंद्र मोदी ने भारी बहुमत के साथ जब देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली तो लगा कि निकट भविष्य में अब मोदी को मात देने वाला शायद ही कोई पैदा हो। हुआ भी ऐसा। अब तक विरोधी दल के नेताओं के हर दांव-पेच फेल होते रहे और मोदी निर्विघ्न देश की बागडोर संभाले रहे। या यूं कहिए कि विरोधी दलों ने मोदी को जितना ही कमजोर करने की कोशिश की, मोदी उतना ही मजबूत होते गए।
लेकिन जनवरी 2026 में अचानक हवाओं का रुख तब बदल गया, जब केंद्र सरकार ने यूजीसी के नए प्रावधानों को जनता के सिर पर मढ़ दिया। यूजीसी के नए प्रावधानों ने जनता के मूड को तेजी से बदल दिया और लगा कि अब मोदी कमजोर हो जाएंगे। देश में अब तक जो आंधी भारतीय जनता पार्टी के साथ थी, एकाएक उसके विपरीत हो गई। तेजी से बदले हालातों को देखकर महसूस हुआ कि भाजपा इस आंधी का वेग बर्दाश्त न कर पाएगी और आगामी चुनावों में उसकी वही हालत हो जाएगी जो 2014 के पहले थी।
परंतु, मोदी तो मोदी ठहरे। राजनीति के चाणक्य। देश में भारी विरोध के बावजूद वो यूं खामोश रहे, मानो उन्हें पता था कि कांग्रेस पहले की तरह कुछ ऐसा करेगी जिससे उनकी शाख जो यूजीसी के कारण थोड़ा-बहुत डगमगाई है, फिर यथावत हो जाएगी। यह देश ने कई बार देखा है कि जब भी कांग्रेस या अन्य विपक्षी पार्टियों ने मोदी के खिलाफ कोई बड़ा मोर्चा खोला है, मोदी और मजबूती के साथ उभरे हैं।
आज अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण जब पूरा विश्व सकते में है, भारत सरकार और भारत के लोग निश्चिंत होकर पहले की भांति ही अपने कामकाज निपटा रहे हंै। तब कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने मोदी सरकार को असहज करने के लिए अपना एक और शस्त्र छोड़ दिया। यह शस्त्र है ईरान के नेता खामेनेई की हत्या का। ऐसा ही शस्त्र कांगे्रस पहले गाजा को लेकर छोड़ चुकी है। सोनिया जी ने कहा कि खामेनेई की हत्या पर मोदी की चुप्पी सरकार की विदेश नीति की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवाल है।
सोनिया जी ने अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक लेख में कहा है कि भारत सरकार द्वारा खामेनेई की हत्या की निंदा न करना समकालीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक भयावह विघटन का संकेत है। सोनिया जी ने सरकार पर अमेरिका-इजराइल के व्यापक हमले की अनदेखी का भी आरोप लगाया। अपने लेख में सोनिया जी ने और भी बहुत कुछ लिखा है, लेकिन यदि इसे संक्षेप में समझा जाए तो उनका दुख यह है कि भारत सरकार अब तक अमेरिका-इजराइल और ईरान के पचड़े में कूदी क्यों नहीं।
अब भगवान जाने सोनिया गांधी क्या चाहती हैं। लेकिन यह तो स्पष्ट है कि भारत को इन देशों की लड़ाई में बेवजह टांग नहीं अड़ाना चाहिए। यह शायद प्रधानमंत्री मोदी अच्छी तरह से जानते हैं। मोदी वही कर रहे हैं जो भारत की जनता के हित में है। इस समय सरकार का एक गलत कदम देशवासियों को मुसीबत में डाल सकता है, इसलिए यह कहा जा सकता है कि मोदी की वर्तमान विदेश नीति सही दिशा में है।
अब रही बात मोदी के फायदे की, तो भारतीय जनमानस में यूजीसी एक्ट को लेकर मोदी के प्रति जो नाराजगी थी वह सोनिया जी के लेख से दूर हो गई। भाजपा के प्रति लोगोंं का गुस्सा ठंडा हो गया, क्योंकि वर्तमान में देश में शांति से बड़ा विषय कोई नहीं हो सकता। कुल मिलाकर पिछले दो महीनों में यूजीसी की वजह से भाजपा को जो राजनीतिक क्षति उठानी पड़ी, उसकी भरपाई कांग्रेस ने एक झटके में कर दी। विपक्ष ने मोदी को एक बार फिर मजबूत कर दिया।
साभार : बालमुकुंद मिश्रा जी, रीवा की वाल से





