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हिंदू समाज का आत्मविश्वास लौट रहा है — और राजनीति बदल रही है

सत्ता संघर्ष में राजनेताओं के मुंह से इन शब्दों को सुनने के लिए दशकों से #हिंदुओं के कान तरस रहे थे। पर यह दिन तो आना ही था। क्योंकि संस्कृति और धर्म #व्यवस्था_संशोधन बिना रुके करती रहती थी।

याद रखें, Narendra Modi ने जो यात्रा आरंभ की, वह यात्रा अविराम अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती जा रही है। जिसने यात्रा आरंभ की, उसके प्रति हमेशा #कृतज्ञ रहें।

शांत रहें! धैर्य रखें! आप नहीं तो आपकी सन्तति #वसुधा का भोग करेगी। अंतिम श्वांस लेते समय मन में शांति होगी, भावी पीढ़ी को #हिन्दू_भारत सौंप कर जा रहा हूं।

Himanta Biswa Sarma दादा के यह शब्द सत्ता का अहंकार नहीं, हिन्दू समाज के प्रति विनम्रता है। हिन्दू एक होगा तो सत्ता विनम्र रहेगी। इस बात को कहते या लिखते समय हर #संकोच त्याग दे। क्योंकि आपके भीतर संकोच नहीं, सदियों का #आरोपित_अपराधबोध है।

कभी पाया या या देखा? मुझे संकोच करते हुए? #पॉलिटिकली_करेक्ट होने की बचकानी कोशिश करते? सर्वस्वीकृत होने की व्यथा ह्रदय में लिए मरने की कोई अभिलाषा भी नहीं। बहुतों से बहुत अधिक खारिज होना ही मेरे अस्तित्व के होने का प्रमाण है। इस संसार में हर कार्य #रामकाज है।

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Author: sssrknews

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