टीम इंडिया के नए टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने इंग्लैंड के खिलाफ एजबेस्टन टेस्ट में 269 रनों की यादगार पारी खेली। इस ऐतिहासिक पारी में गिल ने 387 गेंदों का सामना करते हुए 30 चौके और 3 छक्के जड़े। उनकी इस शानदार बल्लेबाज़ी ने ना सिर्फ वर्ल्ड क्रिकेट के कई रिकॉर्ड्स तोड़े, बल्कि टीम इंडिया को मज़बूत स्थिति में भी पहुंचाया। दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद कप्तान गिल ने अपनी इस रिकॉर्डतोड़ पारी के पीछे की तैयारी और मानसिकता का भी खुलासा किया।
आईपीएल के दौरान ही शुरू कर दी थी इंग्लैंड दौरे की तैयारी: शुभमन गिल
एजबेस्टन टेस्ट के दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद भारतीय टीम के नए टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने सोनी स्पोर्ट्स से बातचीत में अपनी ऐतिहासिक पारी की तैयारी को लेकर खुलासा किया। गिल ने बताया कि उन्होंने आईपीएल 2025 के अंतिम चरण के दौरान ही इंग्लैंड दौरे की तैयारी शुरू कर दी थी।
गिल ने कहा, “मैंने कुछ खास तकनीकी पहलुओं पर काम किया और उसका असर अब मेरी बल्लेबाज़ी में साफ दिख रहा है। आईपीएल के आखिरी कुछ हफ्तों से ही मेरा फोकस इस टेस्ट सीरीज की तैयारी पर था और अब तीन पारियों के बाद लग रहा है कि मेरी मेहनत रंग ला रही है।”
स्लिप में डकेट का कैच बना खास पल
गिल ने इंग्लैंड के बल्लेबाज़ बेन डकेट का स्लिप में लिया शानदार कैच भी यादगार बताया। उन्होंने कहा, “हाल ही में मैंने स्लिप फील्डिंग की ज्यादा प्रैक्टिस नहीं की, मेरा फोकस बल्लेबाज़ी पर ज्यादा था। लेकिन डकेट का कैच पकड़ना एक बेहतरीन अहसास था।”
उन्होंने आगे कहा, “टीम मीटिंग्स में भी हमने इस पर बात की थी कि फील्डिंग का टेस्ट क्रिकेट में कितना महत्व है। पिछले मैच में हमने कुछ मौकों को गंवाया, और अगर वो कैच पकड़े गए होते, तो शायद नतीजा कुछ और होता।”
गिल की बल्लेबाज़ी और फील्डिंग दोनों ही इस मैच में टीम इंडिया के लिए बड़ी ताकत साबित हो रही हैं।
गिल बोले – पहले से तय कर लिया था कि अपना विकेट आसानी से नहीं दूंगा
शुभमन गिल ने अपने बयान में आगे बताया कि टी20 से टेस्ट फॉर्मेट में आना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा, “टी20 फॉर्मेट में खेलना आसान होता है क्योंकि वहां लय जल्दी मिल जाती है, लेकिन जब आप टी20 के बाद सीधे टेस्ट क्रिकेट में आते हैं, तो शरीर और दिमाग के बीच तालमेल बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी वजह से मैंने पहले ही टेस्ट क्रिकेट के लिए ट्रेनिंग शुरू कर दी थी।”
गिल ने आगे कहा, “लीड्स टेस्ट में रन बनाना अपेक्षाकृत आसान था, लेकिन एजबेस्टन की पिच पर हालात काफी अलग थे। यहां बल्लेबाज़ी करना आसान नहीं था। इसलिए मैंने पहले से ही तय कर लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं अपना विकेट आसानी से नहीं दूंगा और मैदान में डटे रहूंगा।”
उनकी यह मानसिकता ही उन्हें इस मुकाबले में इतनी लंबी और यादगार पारी खेलने में मदद कर सकी।



