भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के दावों पर कड़ा पलटवार करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर फैलाए जा रहे “झूठे नैरेटिव” की हवा निकाल दी। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तानी प्रतिनिधि पर ऑपरेशन से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया और पाकिस्तान को कानून के शासन का सम्मान करने की नसीहत दी।
सोच-समझकर और जिम्मेदार कार्रवाई
हरीश ने कहा कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा किए गए बर्बर हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई। इस हमले की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी निंदा की थी और दोषियों को जवाबदेह ठहराने की मांग की थी। भारत ने वही किया—उसकी कार्रवाई संतुलित, गैर-उत्तेजक और जिम्मेदार थी, जिसका लक्ष्य केवल आतंकी ढांचे को ध्वस्त करना और आतंकियों को निष्क्रिय करना था।
पाकिस्तान के ‘विजय’ दावे खारिज
भारत के प्रतिनिधि ने बताया कि 9 मई तक पाकिस्तान धमकियां देता रहा, लेकिन 10 मई को पाकिस्तानी सेना ने स्वयं भारतीय सेना से संपर्क कर संघर्ष रोकने की अपील की। हरीश ने पाकिस्तान के ‘विजयी’ होने के दावों को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय ऑपरेशन में पाकिस्तान के कई एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचा—रनवे तबाह हुए और हैंगर जले, जिनकी तस्वीरें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।
आतंकवाद ‘न्यू नॉर्मल’ नहीं
हरीश ने क्षेत्र में आतंकवाद को ‘न्यू नॉर्मल’ बनाने की किसी भी कोशिश का विरोध करते हुए कहा कि आतंकवाद को कभी सामान्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो भी आवश्यक होगा, वह करेगा।
कश्मीर और सिंधु जल संधि पर भारत का रुख
जम्मू-कश्मीर पर भारत की स्थिति दोहराते हुए हरीश ने कहा कि यह भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और इस पर टिप्पणी करने का पाकिस्तान को कोई अधिकार नहीं है। सिंधु जल संधि के निलंबन पर उन्होंने कहा कि भारत ने 65 वर्ष पहले सद्भावना से यह समझौता किया था, लेकिन पाकिस्तान ने युद्धों और आतंकवादी हमलों के जरिए इसकी भावना का बार-बार उल्लंघन किया। जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद और उसके सभी रूपों का विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से अंत नहीं करता, तब तक संधि निलंबित रहेगी।






