नई दिल्ली: 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल और गैस से जुड़े कई जहाज फंस गए थे। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि कुछ जहाजों पर हमले भी हुए और इस अहम समुद्री मार्ग को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। हालांकि, अब कूटनीतिक प्रयासों के चलते स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और भारतीय झंडे वाले जहाज सुरक्षित तरीके से इस मार्ग को पार कर भारत लौटने लगे हैं।
इसी क्रम में भारत का एक और एलपीजी कैरियर ‘ग्रीन आशा’ सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुका है। अब इस संवेदनशील क्षेत्र में केवल एक जहाज ‘जग विक्रम’ ही शेष है, जो भारतीय नौसेना के निर्देशों का इंतजार कर रहा है।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के अनुसार, 3 अप्रैल को ‘ग्रीन सान्वी’ के सुरक्षित निकलने के बाद रविवार को ‘ग्रीन आशा’ ने भी इस खतरनाक रास्ते को पार कर लिया। इससे पहले भी दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं।
‘ग्रीन सान्वी’ 46,655 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर 7 अप्रैल को गुजरात के दहेज (भरूच) पहुंचने वाली है। वहीं ‘BW TYR’ फिलहाल मुंबई के पास समुद्र में ‘शिप-टू-शिप’ ट्रांसफर के जरिए अपना कार्गो उतार रहा है। ‘BW ELM’ को 4 अप्रैल को चेन्नई के एन्नोर बंदरगाह की ओर मोड़ा गया था। इसके अलावा ‘जग वसंत’ हाल ही में कांडला (कच्छ) पहुंचा, जबकि ‘पाइन गैस’ ने न्यू मैंगलोर में 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी की डिलीवरी की।
शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक, अभी भी कई भारतीय जहाज खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं—16 फारस की खाड़ी में, 4 ओमान की खाड़ी में, 1 अदन की खाड़ी में और 2 लाल सागर में तैनात हैं। इनमें से 5 जहाज ‘शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ के हैं।
इसके अलावा पूरे खाड़ी क्षेत्र में करीब 20,000 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं, जिनमें से 528 भारतीय झंडे वाले जहाजों पर सवार हैं। अब तक 1,479 नाविकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिससे राहत की स्थिति बन रही है।






