कॉर्पोरेट करियर छोड़कर लाखों की सैलरी को ठुकराना आसान नहीं होता, लेकिन अमिता देशपांडे ने यह कदम सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि धरती और गांवों के लोगों के लिए उठाया।
लोनावला की इस पूर्व आईटी इंजीनियर ने अमेरिका की आरामदायक जिंदगी छोड़कर 2013 में शुरू किया reCharkha, जहाँ प्लास्टिक कचरे को खूबसूरत और उपयोगी बैग्स में बदला जाता है।
सिर्फ 1 लाख रुपये के निवेश से शुरू हुई यह कंपनी आज करोड़ों की वैल्यू वाली इको सोशल ब्रांड बन चुकी है।
यहां ग्रामीण महिलाएं और कारीगर प्लास्टिक को रीसायकल कर पॉटली, बीच बैग, लॉन्ड्री बैग जैसे स्टाइलिश प्रोडक्ट बनाते हैं। एक बैग में 15 से अधिक प्लास्टिक कचरा इस्तेमाल होता है, जिससे पर्यावरण भी बचता है और रोजगार भी मिलता है।
अमिता की 2 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली यह कंपनी साबित करती है कि जुनून और नीयत मिल जाएं तो कचरा भी सोना बन सकता है।





