महाराष्ट्र विधानसभा के शीतकालीन अधिवेशन में सरकार ने 75,286 करोड़ रुपये की पूरक मांगें पेश की हैं। यह राज्य के इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी पूरक मांग है। इससे पहले जून 2024 में 94,889 करोड़ रुपये की मांगों को मंजूरी दी गई थी।
लाडली बहन योजना के लिए 6,103 करोड़
सरकार ने बाढ़ प्रभावित किसानों की सहायता के लिए सबसे बड़ी 15,648 करोड़ रुपये की मांग की है। इसके अलावा लाडली बहन योजना के लिए 6,103 करोड़ और कुंभ मेले की तैयारियों के लिए 3,000 करोड़ रुपये की निधि का प्रस्ताव रखा गया है।
पूरक मांगों पर चर्चा 11 और 12 दिसंबर को की जाएगी। तुलना करें तो 2024 में 35,000 करोड़ की पूरक मांगें पेश हुई थीं, जबकि इस बार यह राशि लगभग दोगुनी है।
सामूहिक प्रोत्साहन योजना के लिए 9,250 करोड़
महानगरपालिका और अन्य नगरीय निकायों को विशेष अनुदान के लिए 2,200 करोड़ की व्यवस्था की गई है।
कृषि पंपों और वस्त्र उद्योगों के लिए बिजली शुल्क में छूट, साथ ही सामूहिक प्रोत्साहन योजना के लिए 9,250 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है।
इसके अलावा केंद्र सरकार की विशेष पूंजी निवेश योजना के तहत 4,439 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
संजय गांधी निराधार योजना को 300 करोड़
मनरेगा के लिए केंद्र और राज्य के हिस्से के रूप में 3,500 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
परिवहन विभाग से जुड़ी आवश्यकताओं और महाराष्ट्र राज्य परिवहन महामंडल को आर्थिक सहायता के लिए 2,008 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।
संजय गांधी निराधार योजना के तहत 300 करोड़ रुपये की राशि भी पूरक मांगों में शामिल है।
किसान और महिलाओं की योजनाओं में कमी नहीं
सरकार का कहना है कि किसानों और महिलाओं से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं में फंड की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। इससे पहले मानसून सत्र 2025 में 57,509.70 करोड़ और बजट सत्र 2025 में 6,486 करोड़ रुपये की मांग की गई थी।






