तुलसीजी की माला धारण क्यों करनी चाहिए आओ जानें
तुलसीजी का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रूप से अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह मन को शांत, नकारात्मक ऊर्जा को दूर, इम्यूनिटी बढ़ाने और भगवान विष्णु/कृष्ण की भक्ति में सहायक है। इसके विपरीत, इसके लिए सख्त नियम भी हैं जैसे तामसिक भोजन का त्याग,सफाई रखना,और संवेदनशील त्वचा पर एलर्जी। इसे धारण करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और अकाल मृत्यु का भय भी कम होता है।
तुलसी माला पहनने के प्रमुख लाभ
आध्यात्मिक ऊर्जा यह शरीर की शुद्धि करती है,नकारात्मक ऊर्जा दूर करती है और व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
स्वास्थ्य लाभ तुलसी में मौजूद एंटीबायोटिक और एंटीवायरल गुण गले में धारण करने से इम्यूनिटी बढ़ाते हैं, रक्त परिसंचरण में सुधार लाते हैं और तनाव कम करते हैं।
मन की शांति यह मन को एकाग्र करती है,जिससे ध्यान और मंत्र जाप (विशेषकर कृष्ण मंत्र) में मदद मिलती है।
मानसिक स्थिरता गुस्से को कम करने और मन को स्थिर रखने में यह बहुत सहायक है।
तुलसी माला पहनने की सावधानियां (नियम न मानने पर)
तामसिक भोजन वर्जित माला धारण करने वाले को मांस, मछली, मदिरा, और प्याज-लहसुन का त्याग करना अनिवार्य है।
अशुद्धता गंदे स्थानों (जैसे श्मशान) या अशुद्ध अवस्था में इसे धारण करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
त्वचा की समस्या संवेदनशील त्वचा वालों को तुलसी के दानों से एलर्जी, जलन या चकत्ते हो सकते हैं।
नियमों का पालन नित्य क्रिया,या अनैतिक कार्यों के समय माला उतारना आवश्यक होता है,अन्यथा यह अशुद्ध मानी जाती है।
महत्वपूर्ण नियम
इसे हमेशा सात्विक जीवन शैली के साथ पहनना चाहिए।
इसे धारण करने से पहले इसे गंगाजल से शुद्ध करना बेहतर होता है।
यदि आप हमारे संस्थान से शुद्ध तुलसी कंठी या जाप प्राप्त करना चाहते हैं तो आप हमें परसनल व्ट्सप संदेश लिखें
शयन के नियम
1. सूने तथा निर्जन घर में अकेला नहीं सोना चाहिए। देव मन्दिर और श्मशान में भी नहीं सोना चाहिए। (मनुस्मृति)
2. किसी सोए हुए मनुष्य को अचानक नहीं जगाना चाहिए। (विष्णुस्मृति)
3. विद्यार्थी, नौकर औऱ द्वारपाल, यदि ये अधिक समय से सोए हुए हों, तो इन्हें जगा देना चाहिए। (चाणक्यनीति)
4. स्वस्थ मनुष्य को आयुरक्षा हेतु ब्रह्ममुहुर्त में उठना चाहिए। (देवीभागवत) बिल्कुल अँधेरे कमरे में नहीं सोना चाहिए। (पद्मपुराण)
5. भीगे पैर नहीं सोना चाहिए। सूखे पैर सोने से लक्ष्मी (धन) की प्राप्ति होती है। (अत्रिस्मृति) टूटी खाट पर तथा जूठे मुँह सोना वर्जित है। (महाभारत)
6. “नग्न होकर/निर्वस्त्र” नहीं सोना चाहिए। (गौतम धर्म सूत्र)
7. पूर्व की ओर सिर करके सोने से विद्या, पश्चिम की ओर सिर करके सोने से प्रबल चिन्ता, उत्तर की ओर सिर करके सोने से हानि व मृत्यु तथा दक्षिण की ओर सिर करके सोने से धन व आयु की प्राप्ति होती है। (आचारमय़ूख)
8. दिन में कभी नहीं सोना चाहिए। परन्तु ज्येष्ठ मास में दोपहर के समय 1 मुहूर्त (48 मिनट) के लिए सोया जा सकता है। (दिन में सोने से रोग घेरते हैं तथा आयु का क्षरण होता है)
9. दिन में तथा सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सोने वाला रोगी और दरिद्र हो जाता है। (ब्रह्मवैवर्तपुराण)
10. सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घण्टे) के बाद ही शयन करना चाहिए।
11. बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिये हितकर है।
12. दक्षिण दिशा में पाँव करके कभी नहीं सोना चाहिए। यम और दुष्ट देवों का निवास रहता है। कान में हवा भरती है। मस्तिष्क में रक्त का संचार कम को जाता है, स्मृति- भ्रंश, मौत व असंख्य बीमारियाँ होती है।
13. हृदय पर हाथ रखकर, छत के पाट या बीम के नीचे और पाँव पर पाँव चढ़ाकर निद्रा न लें।
14. शय्या पर बैठकर खाना-पीना अशुभ है।
15. सोते सोते पढ़ना नहीं चाहिए। (ऐसा करने से नेत्र ज्योति घटती है )
16. ललाट पर तिलक लगाकर सोना अशुभ है। इसलिये सोते समय तिलक हटा दें।
इन १६ नियमों का अनुकरण करने वाला यशस्वी, निरोग और दीर्घायु हो जाता है।
नोट :- यह सन्देश जन जन तक पहुँचाने का प्रयास करें। ताकि सभी लाभान्वित हों !
जय सनातन धर्म,जय सनातन संस्कृति और शिक्षा।






