नरेंद्र मोदी को भारतीय इतिहास का सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री कहा जा रहा है, यह दावा खोखला नहीं। 2014 से दिल्ली की कुर्सी संभालते हुए उन्होंने ऐसी ताकत हासिल की है, जो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल से भी मीलों आगे नजर आती है। इंदिरा ने 1975 का इमरजेंसी लगाकर लोकतंत्र को झुकाया था, लेकिन मोदी ने बिना संविधान को छुए, जन-जन का भरोसा जीतकर सत्ता के चरम पर पहुंचाया। उनकी शक्ति का राज सिर्फ कुर्सी नहीं, बल्कि अटूट जनाधार और वैश्विक छवि में छिपा है।
मोदी की ताकत का पहला प्रमाण आर्थिक सुधारों में दिखता है। नोटबंदी, जीएसटी और अब डिजिटल इंडिया ने अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी। इंदिरा ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया, लेकिन मोदी ने 50 करोड़ से ज्यादा लोगों को जनधन खाते देकर वित्तीय समावेशन का चमत्कार कर दिखाया। विदेश नीति में मोदी का जलवा बेमिसाल – अमेरिका से रूस तक, क्वाड से जी20 तक, उन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर सुपरपावर बनाया। इंदिरा की 1971 युद्ध जीत भले ऐतिहासिक थी, लेकिन मोदी ने बलूचिस्तान से लेकर कश्मीर तक बिना गोली चलाए दुश्मनों को ललकारा। आर्टिकल 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर को सीधे केंद्र से जोड़ा, जो इंदिरा के बस की बात न थी।
चुनावी रणनीति में मोदी का जादू लाजवाब। तीन लोकसभा चुनावों में भाजपा को 303 सीटें दिलाईं, जो किसी भी पीएम के रिकॉर्ड से ऊपर। इंदिरा ने 1971 में भारी बहुमत जीता, लेकिन 1977 में हार गईं। मोदी 11 साल बाद भी अपराजेय। कोविड संकट में फ्री वैक्सीन, गरीब कल्याण योजना से 80 करोड़ लोगों को राशन पहुंचाया। राम मंदिर, अयोध्या का उद्घाटन और योग दिवस जैसी सांस्कृतिक विजय ने हिंदू हृदय सम्राट की छवि बनाई। इंदिरा की शक्ति कांग्रेस पार्टी पर टिकी थी, मोदी की भाजपा पर नहीं, बल्कि सीधे जनता पर।
विपक्षी हमलों के बावजूद मोदी की लोकप्रियता 70% से ऊपर बनी है। राम मंदिर से लेकर रामायण सर्किट तक, उन्होंने सॉफ्ट पावर का इस्तेमाल किया। इंदिरा को ‘आयरन लेडी’ कहा गया, लेकिन मोदी ‘विश्वगुरु’ बनाने वाले लीडर। आंकड़े गवाह हैं – जीडीपी 2.5 लाख करोड़ से 400 लाख करोड़, एक्सपोर्ट डबल। 2026 तक भारत दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनेगा। यह शक्ति निरंकुश नहीं, बल्कि विकासोन्मुखी। मोदी ने साबित किया कि बिना इमरजेंसी के भी देश को मजबूत बनाया जा सकता है। इतिहास उन्हें स्वर्णिम अध्याय देगा।






