नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं लाएगी। सूत्रों के अनुसार, सरकार प्रिविलेज मोशन लाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, राहुल गांधी द्वारा हाल ही में दिए गए भाषण के कुछ हिस्सों को कार्यवाही से हटाया जाएगा, क्योंकि उन पर लगाए गए आरोपों का कोई प्रामाणिक आधार प्रस्तुत नहीं किया गया। इस बीच भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर भाषण से आपत्तिजनक शब्द हटाने की मांग की है।
निशिकांत दुबे का मोशन
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश करने की बात कही। उनका आरोप है कि राहुल गांधी “विदेशी ताकतों” के सहारे देश को गुमराह कर रहे हैं। दुबे ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए राहुल गांधी की सदस्यता समाप्त करने और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की भी बात कही। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं है, बल्कि उन्होंने उन्हें निलंबित करने से संबंधित एक अलग मोशन पेश किया है।
पीएम से मिले किरन रिजिजू
केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। माना जा रहा है कि उन्होंने सदन में जारी गतिरोध और विपक्ष के हंगामे को लेकर जानकारी दी।
जगदंबिका पाल की टिप्पणी
राहुल गांधी के भाषण के दौरान अध्यक्षीय आसन संभाल रहे भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल गांधी को अपनी भाषा और शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संसदीय लोकतंत्र में इस तरह की टिप्पणी उचित है।
व्यापार समझौते पर हंगामा
अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर विपक्षी दलों ने लोकसभा में जोरदार हंगामा किया। कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद नारेबाजी के चलते सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सदस्य आसन के निकट पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। इस बीच कांग्रेस सदस्य प्रभा मल्लिकार्जुन ने पूरक प्रश्न पूछा, जिसका जवाब ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद नाईक ने दिया। पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने विपक्ष से शांति बनाए रखने और सदन चलने देने की अपील की।



