नई दिल्ली: फरीदाबाद टेरर नेटवर्क और लाल किला धमाके की जांच कर रही एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। जांच में पता चला है कि आतंकियों के फोन से डिलीट किया गया डेटा रिकवर कर लिया गया है। सिर्फ मुजम्मिल के मोबाइल से ही लगभग 200 वीडियो मिले हैं, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर, असगर, अन्य जैश कमांडरों और ISIS से जुड़े आतंकियों की भड़काऊ तकरीरों के ऑडियो-वीडियो शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि मुजम्मिल और लाल किला धमाके के कथित सुसाइड बॉम्बर डॉक्टर उमर की मुलाकात तुर्की में एक सीरियाई ISIS कमांडर से हुई थी। आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ऐप्स को लेकर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) केजेएस ढिल्लो ने कई अहम बातें बताई हैं।
आतंकियों के फोन से मिले बम बनाने के वीडियो
गिरफ्तार डॉक्टर मुजम्मिल, आदिल, शाहीन और इरफान के फोन से कई महत्वपूर्ण वीडियो बरामद हुए हैं। डिलीटेड डेटा में करीब 80 ऐसे वीडियो मिले हैं जो आतंकी ट्रेनिंग, बम बनाने और केमिकल रिएक्शन संबंधी प्रयोगों पर आधारित हैं। मुजम्मिल के फोन से दिल्ली, यूपी, मुंबई सहित कई राज्यों के धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले बाजारों के वीडियो भी मिले हैं।
ISIS कमांडर से क्यों मिले थे उमर और मुजम्मिल?
जांच के अनुसार, तीन साल पहले मुजम्मिल और डॉक्टर उमर उन नबी तुर्की गए थे, जहां उनकी मुलाकात एक सीरियाई ISIS आतंकी कमांडर से हुई थी। यह मुलाकात जैश-ए-मोहम्मद के एक कमांडर के निर्देश पर की गई थी। वहीं, दोनों ने बम बनाने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद उसी सीरियाई कमांडर ने उन्हें बम बनाने में तकनीकी मदद दी थी।
लाल किला धमाके पर बोले लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लो
ANI से बातचीत में लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) केजेएस ढिल्लो ने कहा कि लाल किला ब्लास्ट में ISI और पाकिस्तान के डीप स्टेट का हाथ हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस हमले का पैटर्न पुलवामा अटैक जैसा दिखता है, जो इस बात का संकेत है कि भारत को ऐसे खतरों से अत्यधिक सतर्कता के साथ निपटना होगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का डीप स्टेट सिर्फ एक चीज चाहता है—भारत में आतंक फैलाना—और जैश उसी व्यवस्था का परिणाम है।
आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ऐप्स को लेकर चेतावनी
केजेएस ढिल्लो ने बताया कि आतंकी मॉड्यूल कुछ ऐसे ऐप्स का इस्तेमाल कर रहा है जिन्हें इंटरसेप्ट नहीं किया जा सकता, क्योंकि जांच एजेंसियां उनकी ट्रांसक्रिप्ट कानूनी रूप से प्राप्त नहीं कर सकतीं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को ऐसे ऐप्स के मालिकों के साथ सख्त रुख अपनाना चाहिए। अगर वे चाहते हैं कि उनके प्लेटफॉर्म भारत में चलें, तो उन्हें जरूरत पड़ने पर यूज़र डेटा देने की बाध्यता होनी चाहिए। ऐसा न करने पर, राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, ऐसे ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।






